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चंडीगढ़ः 9वीं-11वीं का रिजल्ट धड़ाम, फेल साबित हुए दावे, तो शिक्षा विभाग ने लिया बड़ा फैसला
Wed, 03 Apr 2019 12:49 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 03 Apr 2019 12:49 PM IST
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चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बावजूद सत्र 2018-19 में नौंवीं व 11वीं कक्षा का रिजल्ट काफी खराब रहा है। शहर के 6 स्कूल तो ऐसे हैं, जिनका रिजल्ट 30 से 40 प्रतिशत के बीच रहा है। खराब रिजल्ट वाले ज्यादातर स्कूल शहर के पेरीफेरी के हैं। इनमें जीएमएचएस-25, जीएचएस-दरिया, जीएमएसएसएस-मलोया, जीएमएसएसएस-करसान, जीएमएचएस-मौलीजागरां आदि शामिल हैं। इन स्कूलों का ओवरऑल रिजल्ट 30 से 40 प्रतिशत के बीच रहा है।
नौंवी कक्षा में कुल 14,694 छात्रों ने परीक्षा दी थी, उनमें केवल 8,079 विद्यार्थी ही पास हुए हैं, जबकि 4,723 फेल हो गए और 1,892 छात्रों के कंपार्टमेंट आए हैं। ओवरऑल रिजल्ट मात्र 55 फीसदी ही रहा है। वहीं, 11वीं कक्षा में कुल 11,661 स्टूडेंट्स में 8,228 बच्चे पास हुए हैं। जबकि 1,295 बच्चे फेल और 2,138 बच्चों की कंपार्टमेंट है। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए विभाग द्वारा दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नतीजों पर उनका असर देखने को नहीं मिल रहा है।
नामी स्कूलों का रिजल्ट भी खराब
शहर के नामी स्कूलों का रिजल्ट भी काफी खराब रहा है। जीएमएसएसएस-19, जीएमएसएसएस-33, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएस-37, जीएमएसएसएस-22 आदि का रिजल्ट कभी 85 से 90 फीसदी तक रहा है। अच्छे रिजल्ट को लेकर इन स्कूलों की चर्चा हुआ करती थी। लेकिन इस बार इनका परीक्षा परिणाम 70 प्रतिशत तक ही रहा।
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नौंवी कक्षा में कुल 14,694 छात्रों ने परीक्षा दी थी, उनमें केवल 8,079 विद्यार्थी ही पास हुए हैं, जबकि 4,723 फेल हो गए और 1,892 छात्रों के कंपार्टमेंट आए हैं। ओवरऑल रिजल्ट मात्र 55 फीसदी ही रहा है। वहीं, 11वीं कक्षा में कुल 11,661 स्टूडेंट्स में 8,228 बच्चे पास हुए हैं। जबकि 1,295 बच्चे फेल और 2,138 बच्चों की कंपार्टमेंट है। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए विभाग द्वारा दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नतीजों पर उनका असर देखने को नहीं मिल रहा है।
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नामी स्कूलों का रिजल्ट भी खराब
शहर के नामी स्कूलों का रिजल्ट भी काफी खराब रहा है। जीएमएसएसएस-19, जीएमएसएसएस-33, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएस-37, जीएमएसएसएस-22 आदि का रिजल्ट कभी 85 से 90 फीसदी तक रहा है। अच्छे रिजल्ट को लेकर इन स्कूलों की चर्चा हुआ करती थी। लेकिन इस बार इनका परीक्षा परिणाम 70 प्रतिशत तक ही रहा।
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ग्रेस मार्क्स नहीं मिले, इसलिए फेल हुए ज्यादा छात्र
शिक्षा विभाग की मानें तो इस साल किसी भी छात्र को पास होने के लिए ग्रेस मार्क्स नहीं दिए गए। जिसकी वजह से नौवीं में काफी संख्या में छात्र फेल हो गए। एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने ग्रेस मार्क्स देने की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिस्टम बिल्कुल गलत है। इसे बंद करने की जरूरत है।
नो डिटेंशन पॉलिसी की वजह से भी गिरी छात्रों की परफॉर्मेंस
एक्सपर्ट्स की मानें तो नो डिटेंशन पॉलिसी की वजह से भी छात्रों की परफॉर्मेंस गिरी है। 8वीं तक फेल न होने के कारण बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। टीचर्स के फोर्स करने पर छात्रों का जवाब होता है कि कम मार्क्स पर भी फेल तो होंगे नहीं। ऐसे में बच्चों को जब 10वीं बोर्ड फेस करना पड़ता है, तो उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
क्या है नो डिटेंशन पॉलिसी
यह पॉलिसी 2010 में राइट-टू-एजुकेशन के तहत देशभर के स्कूलों में अपनाई गई, जिसके तहत प्राइमरी एजुकेशन सिस्टम यानी 8वीं क्लास तक बच्चों की परफॉर्मेंस खराब होने पर भी उन्हें फेल नहीं कर सकते हैं। यह पॉलिसी बच्चों में पढ़ाई के डर को कम करने के लिए शुरू की गई थी। वे बच्चे जो पढ़ाई छोड़ रहे थे या फिर काफी प्रेशर में थे, उन पर पढ़ाई का प्रेशर खत्म करने के लिए यह पॉलिसी एजुकेशन सिस्टम में लाई गई थी।
नो डिटेंशन पॉलिसी की वजह से भी गिरी छात्रों की परफॉर्मेंस
एक्सपर्ट्स की मानें तो नो डिटेंशन पॉलिसी की वजह से भी छात्रों की परफॉर्मेंस गिरी है। 8वीं तक फेल न होने के कारण बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। टीचर्स के फोर्स करने पर छात्रों का जवाब होता है कि कम मार्क्स पर भी फेल तो होंगे नहीं। ऐसे में बच्चों को जब 10वीं बोर्ड फेस करना पड़ता है, तो उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
क्या है नो डिटेंशन पॉलिसी
यह पॉलिसी 2010 में राइट-टू-एजुकेशन के तहत देशभर के स्कूलों में अपनाई गई, जिसके तहत प्राइमरी एजुकेशन सिस्टम यानी 8वीं क्लास तक बच्चों की परफॉर्मेंस खराब होने पर भी उन्हें फेल नहीं कर सकते हैं। यह पॉलिसी बच्चों में पढ़ाई के डर को कम करने के लिए शुरू की गई थी। वे बच्चे जो पढ़ाई छोड़ रहे थे या फिर काफी प्रेशर में थे, उन पर पढ़ाई का प्रेशर खत्म करने के लिए यह पॉलिसी एजुकेशन सिस्टम में लाई गई थी।
विभाग की तैयारी, ऐसे सुधारेंगे रिजल्ट
शहर के पेरीफेरी के स्कूलों के खराब रिजल्ट को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग नए सेशन से कई प्रयोग करने जा रहा है। एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि उन्होंने शहर के सेंट्रल सेक्टर्स के स्कूलों में सालों से बैठे टीचर्स की लिस्ट बनाने को कहा है। उनको शहर के पेरीफेरी इलाकों में भेजा जाएगा।
इस पर काफी तेजी से काम चल रहा है। वहीं ‘फिनिक्स एप’ को लेकर बीएल शर्मा को कहना है कि इस एप की मदद से हर छात्र की परफॉर्मेंस पर नजर रखी जा सकेगी। इससे छात्र के रिजल्ट में काफी सुधार होगा। ग्रेस मार्क्स देने बंद कर दिए गए हैं, इन फैसलों का असर अगले साल के रिजल्ट में देखने को मिलेगा।
इस पर काफी तेजी से काम चल रहा है। वहीं ‘फिनिक्स एप’ को लेकर बीएल शर्मा को कहना है कि इस एप की मदद से हर छात्र की परफॉर्मेंस पर नजर रखी जा सकेगी। इससे छात्र के रिजल्ट में काफी सुधार होगा। ग्रेस मार्क्स देने बंद कर दिए गए हैं, इन फैसलों का असर अगले साल के रिजल्ट में देखने को मिलेगा।