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पंजाब यूनिवर्सिटी सिंडिकेट चुनाव 2019 में गोयल बंधुओं का दबदबा रहा कायम, 11 सीटें जीतीं

Mon, 16 Dec 2019 10:30 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 16 Dec 2019 10:30 AM IST
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Goyal Brothers Group Wins Punjab University Syndicate Elections 2019
गोयल बंधु - फोटो : अमर उजाला
पंजाब यूनिवर्सिटी सिंडिकेट चुनाव में एक बार फिर गोयल बंधुओं का दबदबा रहा। चुनाव में गोयल ग्रुप ने 11 सीटें जीतीं जबकि सुभाष शर्मा ग्रुप के हाथ चार सीटें लगीं। इस बार सुभाष शर्मा ग्रुप ने गोयल ग्रुप में सेंध लगाने में कामयाब रहा और 15 में से चार सीटें अपने कब्जे में कर लीं। उम्मीद अधिक थी लेकिन इनके वोटर सभी नहीं पहुंचे।
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गोयल ग्रुप के पास पुख्ता रणनीति थी और उसी पर काम किया। उन्होंने 10 से 11 सीटें हासिल करने का आंकड़ा लगाया था, जो फिट बैठा। सुबह नौ बजे सिंडिकेट के चुनाव सीनेट हॉल में हुए। सबसे पहले आर्ट्स फैकल्टी के चुनाव हुए। सुभाष शर्मा ग्रुप से राजिंदर भंडारी, डॉ. आरएस झांजी, डॉ. सरबजीत कौर ने जीत हासिल की।
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यहां से गोयल ग्रुप ने एक ही मेंबर प्रो. रोनकी राम को मैदान में उतारा था, जो जीत नहीं पाए। इस फैकल्टी में गोयल ग्रुप के पास वोटों की संख्या काफी कम रही। साइंस फैकल्टी के लिए चुनाव नहीं हुआ। डॉ. नवदीप गोयल, जरनैल सिंह सैनी, डॉ. सुरिंदर कौर निर्विरोध चुनी गईं। कंबाइंड फैकल्टी से सुभाष ग्रुप से डॉ. सतीश शर्मा को जीत मिली।
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वहीं दो सीटों पर गोयल ग्रुप से डॉ. इकबाल संधू और डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर जीते। लैंग्वेज में गोयल ग्रुप से अशोक गोयल व प्रो. केशव मल्होत्रा विजयी रहे। लॉ में अनु चतरथ व डीपीएस रंधावा निर्विरोध चुने गए। मेडिकल फैकल्टी में गोयल ग्रुप से रविंद्र नाथ शर्मा व हरप्रीत दुआ ने जीत दर्ज की।

जीत के लिए सभी को बधाई और सबका आभार, जो जीत दिलाई। हर बार की तरह पीयू को ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए कार्य किए जाएंगे। शिक्षकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
- डॉ. नवदीप गोयल

सिंडिकेट में कोर वोटर्स का साथ मिला और चार सीट से विजयी हुए। मेडिकल की दो सीटें दोबारा चुनाव होने के कारण हाथ से निकलीं, क्योंकि उस समय तक हमारे कई वोटर शहर से बाहर जा चुके थे। हमारा उद्देश्य पीयू को आगे ले जाना है।
- सुभाष शर्मा

किसको कितने मिले वोट

आर्ट फैकल्टी
नाम                      वोट
राजिंदर भंडारी           22
डॉ. आरएस झांजी        22
डॉ. सरबजीत कौर        21

कंबाइंड फैकल्टी
डॉ. सतीश शर्मा           44
प्रो. इमैनुअल नाहर        44
डॉ. इकबाल संधू          38
 
लैंग्वेज फैकल्टी
अशोक गोयल             23
डॉ. केशव मल्होत्रा         23

मेडिकल फैकल्टी
रविंद्र नाथ शर्मा          29
हरप्रीत सिंह दुआ         31

सिंडिकेट चुनाव में भाजपा नेताओं ने नहीं लगाई ताकत

पीयू में रविवार को हुए सिंडिकेट चुनाव में दो ग्रुप लीड कर रहे थे। भाजपा से सुभाष शर्मा ग्रुप, जबकि कांग्रेस खेमे से डॉ. नवदीप गोयल और अशोक गोयल ग्रुप। गोयल ग्रुप ने अपने एक-एक मेंबर को धागे में पिरोकर रखा और वोट डलवाए भी। लेकिन भाजपा के नेताओं में एकता नहीं दिखी, वे लोग बिखरे-बिखरे से नजर आए।

यहीं कारण रहा कि परिणाम 4 सीट तक रहे। अगर सभी एक साथ रहते तो मेडिकल की दोनों सीटों पर उनका ही कब्जा होता। इसके साथ ही लैंग्वेज और कंबाइंड फैकल्टी से भी सीटें बेहतर आ सकती थीं। सिंडिकेट के चुनाव के बाद अब तैयारी सीनेट के लिए की जा रही हैं जो वर्ष-2020 में होंगे।

सूत्रों का कहना है कि सुभाष शर्मा ग्रुप 36 सीटें जो चांसलर कार्यालय से नामित होती हैं, उन पर कब्जा कर सकता है। इसके साथ ही कुछ सीटें चुनाव के जरिये निकाली जा सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो फिर नजारा बदलेगा। लेकिन गोयल ग्रुप किसी से कम नहीं है। वह सीनेट में भी अपनी ताकत का एहसास करवाएंगे।

सूत्रों का यह भी कहना है कि सीनेट का रिफॉर्म होगा, अगर ऐसा हुआ तो फिर नई व्यवस्था के मुताबिक पीयू की योजनाओं को पंख मिलेंगे। इसके लिए भी तैयारी चल रही है।

मेडिकल फैकल्टी की अग्निपरीक्षा में दो वोट से जीता गोयल ग्रुप

पीयू में सिंडिकेट के चुनाव में गोयल और सुभाष शर्मा ग्रुप को उस समय अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा जब दोनों के मेंबरों को बराबर के वोट मिले। ऐसी स्थिति में दोबारा चुनाव करवाए गए और इस अग्निपरीक्षा में गोयल ग्रुप को जीत मिली। इस दौरान दोनों ही ग्रुपों को बराबर वोट मिलने से ठंड में भी पसीने आ गए। लेकिन गोयल ग्रुप ने बेहतर रणनीति के जरिये अपने चेहरों को जीत दिलाई। हालांकि सुभाष शर्मा ग्रुप के कुछ मेंबर दोबारा वोट नहीं डालने आए। अगर वे दोबारा वोट डालने आते तो परिणाम फिर कुछ ओर भी हो सकता था।

इस बार मेडिकल फैकल्टी के चुनाव वाकई कठिन थे। लेकिन दोनों ग्रुपों को पहले विश्वास था कि वह चुनाव जीत ही जाएंगे। जैसे ही दोनों सीटों के रिजल्ट आए तो सुभाष शर्मा ग्रुप से डॉ. निशा शर्मा विजयी हो गई और इसी ग्रुप के वीरेंद्र गिल और गोयल ग्रुप के रविंद्र नाथ शर्मा को बराबर के 27-27 वोट मिल गए। इससे दोनों ग्रुपों का पैंतरा ही बदल गया और सभी के चेहरे हवाईयां उड़ने से देखने लायक थे। लेकिन नियमों के अनुसार दोबारा चुनाव करवाए जाने थे। नियम ये भी था कि एक सीट के लिए चुनाव नहीं होता है, अगर टाई रहता है तो फिर दोनों ही सीटों के लिए चुनाव करवाया जाता है।

दोबारा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और जल्दबाजी में सभी ग्रुप अपने-अपने वोटरों को ढूंढ रहे थे, क्योंकि दोनों ग्रुपों की प्रतिष्ठा दांव पर थी। एक तरफ डॉ. सुभाष शर्मा लगातार फोन लगा रहे थे तो दूसरी ओर डॉ. नवदीप गोयल और अशोक गोयल। आखिर में दोबारा चुनाव हुए और परिणाम आने के बाद रविंद्र नाथ शर्मा को 29 और हरप्रीत सिंह दुआ को 31 वोट मिले। यह दोनों ही गोयल ग्रुप से चुनाव लड़ रहे थे। जबकि सुभाष ग्रुप के जो वोटर थे वो उस समय तक मौके से जा चुके थे।
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