फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Engineering Students are suffering due to lack of Practicals in online Classes

बढ़ी परेशानी: ऑनलाइन पढ़ाई के कारण प्रेक्टिकल हो रहे कम, संकट में इंजीनियरिंग के छात्र 

Wed, 14 Jul 2021 12:32 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 14 Jul 2021 12:32 PM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग विभाग के अलावा सीसीईटी व पेक से हर साल एक हजार से अधिक इंजीनियरिंग के विद्यार्थी पासआउट होते हैं। तीनों संस्थानों का नौकरी औसत पहले 95 फीसदी तक था, लेकिन कोरोना के कारण यह घटकर 80 प्रतिशत तक पहुंचा है।
 

विज्ञापन
Engineering Students are suffering due to lack of Practicals in online Classes
ऑनलाइन शिक्षा - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना के कारण हर क्षेत्र की पढ़ाई प्रभावित हुई है। ऑफलाइन कक्षाओं को ऑनलाइन चलाया जा रहा है। कक्षाओं की इस प्रणाली से इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को नुकसान हो रहा है। उन्हें चार साल में 120 से अधिक प्रयोग करने होते हैं, लेकिन दो साल उनके कोरोना खा गया। यानी आधे प्रयोग वे नहीं कर पाएंगे। इस कारण वह कई क्षेत्र की नौकरियों में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि इसकी पूर्ति के लिए शिक्षण संस्थान मेहनत कर रहे हैं। 
विज्ञापन


इंजीनियरिंग की डिग्री चार साल में पूरी होती है। दो साल पहले जिन विद्यार्थियों में दाखिला लिया है, उन्हें प्रयोग के जरिए पढ़ाया जाना था। दो साल में 60 प्रयोग होने चाहिए थे, जो पूरी तरह नहीं हो पाए। सॉफ्टवेयर कोर्सेज से जुड़े विद्यार्थियों ने तो जैसे-तैसे कर लिए, लेकिन कोर कोर्सेज से जुड़े विद्यार्थियों को परेशानी हुई। फार्मा हो या फिर दूसरी इंडस्ट्री, इन सभी में प्रशिक्षित छात्रों को ही लिया जाता है। 
विज्ञापन



नौकरी में 10 से 20 ही प्रयोग काम आते
शिक्षाविद विनोद सिंह, सुधांशु कुमार का कहना है कि नौकरी के लिए 10 से 20 प्रयोग ही काम आते हैं। उन्हीं के आधार पर वे नौकरी करते हैं, लेकिन उन्हें दूसरी फील्ड के लिए आवेदन करना होता है तो फिर संकट खड़ा होता है। क्योंकि दूसरी फील्ड के लिए प्रयोग छात्र कम कर पाए, जो कंपनी में जाकर उन्हें करने होंगे। कंप्यूटर विज्ञान और आईटी के विद्यार्थियों को अधिक दिक्कतें नहीं हुईं लेकिन बाकी ट्रेड के छात्रों को संकट हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक हजार से अधिक छात्र होते हैं पासआउट 
पीयू के पूर्व छात्र इंजीनियर उमाशंकर सिंह का कहना है कि पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के अलावा सीसीईटी व पेक से हर साल एक हजार से अधिक इंजीनियरिंग के विद्यार्थी पासआउट होते हैं। तीनों संस्थानों का नौकरी औसत पहले 95 फीसदी तक था, लेकिन कोरोना के कारण यह घटकर 80 प्रतिशत तक पहुंचा है। यानी कंपनियां भी नौकरी पर छात्रों को कम बुला रही हैं। उसमें एक कारण यह भी है कि कोरोना के कारण छात्र पूरी तरह पारंगत नहीं हो पाए हैं। हालांकि कुछ छात्र नौकरी करने से पहले अन्य क्षेत्रों में जाकर पढ़ाई करने की इच्छा जताते हैं। यही बात इंजीनियरिंग के छात्र सुभाष शर्मा कहते हैं कि इस बार प्रयोग कम हुए हैं, इसका असर कहीं न कहीं नौकरियों पर पड़ा है। कंपनियां पारंगत विद्यार्थियों का चयन पहले करती हैं। ऐसे में अब शिक्षण संस्थानों को अधिकाधिक प्रयोग पर बल देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed