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Hindi News ›   Chandigarh ›   Education Department Chandigarh Working on to Implement New Education System in Schools

बैग का बोझ कमः महाराष्ट्र-तेलंगाना की तर्ज पर तैयार होगा एजूकेशन सिस्टम, खाका हो रहा तैयार

Mon, 03 Dec 2018 03:10 PM IST
अनुभव अवस्थी, न्यूज डेस्क, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, न्यूज डेस्क, चंडीगढ़ Updated Mon, 03 Dec 2018 03:10 PM IST
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से स्टूडेंट्स के बैग का बोझ कम किए जाने का फरमान जारी होने के बाद यूटी प्रशासन ने इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। यूटी का शिक्षा विभाग शहर में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए महाराष्ट्र और तेलंगाना की तर्ज पर एजूकेशन पैटर्न लागू करेगा। इसके लिए शिक्षा सचिव बीएल शर्मा की ओर से डिपार्टमेंट को एक माह के अंदर दोनों राज्यों की शिक्षा प्रणाली का पूरा खाका तैयार करने के लिए कहा गया है।
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सब कुछ ठीक रहा तो नए सत्र से यूटी के सरकारी स्कूलों की शिक्षा में बदलाव देखने को मिलेंगे। यह गुणवत्ता परक शिक्षा के हिसाब से टीचर्स और स्टूडेंट्स दोनों के लिए सुविधाजनक होगा। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अगले शैक्षणिक वर्ष में शिक्षा विभाग की तरफ से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
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खास बात यह है कि राज्य की स्कूली शिक्षा को महाराष्ट्र और तेलंगाना की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग को जल्द पूरा खाका तैयार करने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग कई योजनाएं बना रहा है। शिक्षा विभाग स्कूलों में डिजिटल व्यवस्था लागू करने सहित शिक्षकों व स्कूलों के उन्नयन पर जोर दे रहा है।
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स्कूल न जाने वाले बच्चों पर नजर

शिक्षा विभाग की नजर स्कूल न जाने वाले बच्चों पर रहेगी। ऐसे बच्चों के आंकड़े जुटाए जाएंगे, जो प्रवेश लेने के बाद भी स्कूल नहीं जाते या स्कूल छोड़ चुके हैं। इसके बाद इनमें से अधिकतर बच्चों को स्कूल में दाखिला दिया जाएगा। इससे स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी।

मोबाइल नंबर पर मिलेगी जानकारी
महाराष्ट्र और तेलंगाना में स्कूल कम आने वाले छात्रों के अभिभावकों को सर्वे कराने के बाद मोबाइल दिया गया है। इस मोबाइल के जरिए जो छात्र स्कूल नहीं आते हैं, उनकी जानकारी ली जाती है। ऐसे ही यूटी प्रशासन भी सर्वेक्षण के बाद जिन बच्चों को स्कूलों में दाखिला देगा, उनके परिजनों को मोबाइल की सुविधा मुहैया कराने पर विचार कर रहा है।

स्कूल भी तैयार करेंगे प्रारूप
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी स्कूलों को स्कूल शैक्षिक विकास का एक मसौदा बनाना अनिवार्य किया जाएगा। उसमें शिक्षा का स्तर, विद्यार्थियों की उपस्थिति आदि का समावेश है। इसमें हर बच्चे के विकास के लिए योजना बनाई जाएगी।

स्टूडेंट्स के परफामेंस से तय होगा शिक्षकों का भविष्य
शिक्षकों का भविष्य उनके स्टूडेंट्स के परफारमेंस पर निर्भर करेगा। यूटी प्रशासन इस योजना पर काम करने की योजना तैयार कर रहा है। यदि छात्र अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उसका लाभ शिक्षकों को मिलेगा। यदि स्टूडेंट्स खराब प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके लिए प्रशासन स्पेशल ट्रेनिंग सेशन का आयोजन कराएगी। छात्रों के साथ शिक्षक भी स्पेशल सेशन से कुछ सीख सकेंगे। इसके बाद एजूकेशन और शिक्षक दोनों में गुणवत्ता आएगी।

कॉमन एग्जाम कराए जाने पर विचार

प्रशासन की मंशा है कि क्लास एक से लेकर आठवीं तक सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा के साथ ही सभी कक्षाओं में एक कॉमन एग्जाम की व्यवस्था की जाए। कॉमन एग्जाम होने से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। शिक्षा में सुधार होगा। स्टूडेंट्स की क्षमता बढ़ेगी, जोकि आगे की कक्षाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

ओपन स्कूल बोर्ड खोलने पर विचार
यूटी प्रशासन शिक्षा को गुणवत्ता परक बनाने के लिए 8वीं तक के सरकारी स्कूलों में सुस्त पड़ी सरकारी शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए स्टूडेंट्स के साथ साथ टीचर्स को भी एक्टिव बनाने के लिए ओपेन स्कूल बोर्ड स्थापित करेगा। इस बोर्ड के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की प्रमाण पत्र परीक्षा ली जाएगी। इससे छात्रों के फेल होने की संख्या में कमी आएगी। ओपेन स्कूल बोर्ड स्थापित करने का मकसद सभी को समानांतर शिक्षा मुहैया कराना है।

एजुकेशन डिपार्टमेंट तैयार कर रहा है खाका
राज्य के शैक्षणिक प्रारूप और कार्य योजना को बनाने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र विद्या प्राधिकरण को दी गई है। इसमें शिक्षा के स्तर से लेकर मूल्यांकन तक प्राधिकरण और महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद की योजना से संबंधित अधिकारी मसौदा बनाने में मदद करेंगे। शिक्षा विभाग सर्व शिक्षा अभियान के तहत जनवरी में केंद्र सरकार को वार्षिक कार्ययोजना सौंपेगा।

ऐसा हो सकता है नए शैक्षिक सत्र का आगाज
सभी बच्चों को स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य। सौ फीसदी बच्चों को पढ़ना आना चाहिए। सभी बच्चों को गुणा, भाग, जोड़, घटाना आदि का पर्याप्त ज्ञान जरूरी है। अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का ग्रेड बरकरार रखने पर जोर। सभी स्कूलों में डिजिटल व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य। 100 प्रतिशत शिक्षकों को टेक्नोलॉजी के उपयोग के लिए प्रेरित करना। अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए नतीजे देने वाले प्रमुख बिंदुओं पर जोर। 70 प्रतिशत स्कूल ए ग्रेड में लाने पर जोर।
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