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पंजाब यूनिवर्सिटीः 15 दिन के संघर्ष के बाद ई रिक्शा चालकों को मिल ही गया ‘दिवाली का तोहफा’

Sat, 19 Oct 2019 02:16 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 19 Oct 2019 02:16 PM IST
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e-rickshaw drivers and punjab university administration clash finished
ई-रिक्शा - फोटो : फाइल फोटो
पंजाब यूनिवर्सिटी में 15 दिन तक चला ई रिक्शा चालकों का संघर्ष काम आया। उनका मेहनताना, काम करने का समय आदि तय करके उन्हें दिवाली का तोहफा दिया गया। अपनी जीत की खुशी में सभी चालकों ने जश्न मनाया। आदेश हुए हैं कि वर्किंग डे में ई रिक्शा चालक ठेकेदार को प्रतिदिन 400 रुपये व नॉन वर्किंग डे में 250 रुपये देंगे। बाकी रकम जो भी बचेगी वह ई रिक्शा चालकों का मेहनताना में शामिल होगी।
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मालूम हो कि पीयू में ई रिक्शा के संचालक की ओर से चालकों का कई माह का मेहनताना नहीं दिया गया। साथ ही उनको हर दिन 750 रुपये कमाने के लिए कहा गया। योजना थी कि इन रिक्शा चालकों को हटाकर दूसरे चालकों को लगाया जाएगा। इसके विरोध में सभी ई रिक्शा चालकों ने हड़ताल शुरू कर दी। इनके समर्थन में आइसा व एसएफएस छात्र संगठन भी आ गए। उन्होंने भी प्रोटेस्ट किया। 15 दिन तक आंदोलन चला।
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ई रिक्शा चालकों की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। आखिर 15 दिन बाद पीयू प्रशासन की आंखें खुली और ठेकेदार पर दबाव बनाकर समस्या समाधान को कहा गया। आखिर में निर्णय ई रिक्शा चालकों के हक में हुआ। आदेश हुए कि वर्किंग डे में ई रिक्शा चालक ठेकेदार को प्रतिदिन 400 रुपये व नॉन वर्किंग डे में 250 रुपये देंगे। बाकी रकम जो भी बचेगी वह ई रिक्शा चालकों का मेहनताना में शामिल होगी।
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साथ ही सुबह सात बजे से रात आठ बजे तक ई रिक्शा चलाने का समय तय हुआ। बताया जाता है कि ठेकेदार का टेंडर निरस्त किए जाने का दबाव बना तो ठेकेदार को बैकफुट पर आना पड़ा।
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