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फ्रेंडली क्लासरूम बनाने के लिए पहली बार टीचर्स के लिए ‘क्या करें क्या न करें’, लागू हुए दिशा-निर्देश

Tue, 02 Jul 2019 12:18 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 02 Jul 2019 12:18 PM IST
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do's and dont's for teacher for friendly classroom
फाइल फोटो
एक पुरानी कहावत है: बच्चों को बताओगे तो वह भूल जाएंगे, अगर दिखाओगे तो याद हो सकता है लेकिन अगर बच्चों को पढ़ाई में इनवॉल्व करोगे तो वह कभी नहीं भूलते हैं। चंडीगढ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट अब इस कहावत को सच करने जा रहा है। पहली बार विभाग ने सभी टीचर्स के लिए दिशा-निर्देश बनाए हैं, जिसमें 17 प्वाइंट्स में बताया गया है कि टीचर्स को क्लासरूम में क्या-क्या करना है।
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इसके साथ ही 10 प्वाइंट ऐसे भी हैं, जिनमें बताया गया है कि टीचर्स को क्लासरूम में क्या नहीं करना है। यह सभी दिशा-निर्देश इसी सत्र से लागू हो जाएंगे। शहर के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से 12वीं तक सभी विषयों के स्टूडेंट्स को पढ़ाने के तरीके में बदलाव किया जा रहा है।
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निर्देशों में कहा गया है कि एक टीचर, माता-पिता और परिवार के बाद छात्रों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। बचपन में स्टूडेंट्स के दिमाग पर टीचर जो प्रभाव डालता है, वह स्टूडेंट जिंदगी भर याद रखता है। इसलिए एक टीचर को स्टूडेंट के लिए बातचीत, पढ़ाने और आचरण में रोल मॉडल होना चाहिए।
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टीचर्स को सलाह दी गई है कि वह स्टूडेंट्स के क्रिएटिव थिंकिंग, प्रैक्टीकल नॉलेज और साइंटिफिक टैंपर पर जोर देंगे। आसान तरीकों से बच्चों का ज्ञान बढ़ाने के लिए कहा गया है।

 
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पढ़ाई को दिलचस्प बनाने पर जोर

एजुकेशन डिपार्टमेंट की कोशिश है कि वह पढ़ाई को दिलचस्प बना दें, जिससे कि बच्चे दिमाग पर बोझ लेकर नहीं बल्कि रुचि के साथ पढ़ाई करें। छोटी क्लासेस में भी स्टूडेंट्स को ज्यादातर वे टीचर पसंद आते हैं जो बोझिल से बोझिल सब्जेक्ट को भी दिलचस्प अंदाज में पढ़ाते हैं।

ऐसा करते वक्त आम जिंदगी में उस सब्जेक्ट से जुड़े एप्लिकेशन बच्चों के सामने रखनी चाहिए, जिससे बच्चे आसानी से रिलेट कर सकें। किताबी पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टीकल चीजों की जानकारी देना जरूरी है। इसलिए उसे असल जिंदगी के अनुभवों के साथ जोड़कर बताएं।

उदाहरण के लिए अगर बच्चे को बारिश पर कोई कविता याद करा रहे हों तो उनकी उम्र के हिसाब से किसी फिल्मी गाने को जोड़कर समझा सकते हैं। स्पोर्ट्स की जानकारी देनी हो तो बड़े खिलाड़ियों का जिक्र करके बता सकते हैं। सब्जेक्ट्स को सवाल-जवाब के जरिए पढ़ाएं। इसके लिए खुद भी तैयारी करें। ग्राफिक टेक्नीक का इस्तेमाल करें क्योंकि बच्चों को शब्दों से ज्यादा तस्वीरें अपने करीब खींचती हैं।

टीचर्स को यह करने की सलाह दी गई

1. क्लास रूम में एक जीवंत वातावरण बनाएं ताकि छात्र न केवल सीखने का आनंद लें, बल्कि सीखने के लिए उसमें एक ललक पैदा हो।
2. सब्जेक्ट को इस ढंग से प्रस्तुत किया जाए कि स्टूडेंट्स में उसे पढ़ने और समझने की जिज्ञासा पैदा हो। वह सब्जेक्ट के बारे में विभिन्न सवाल पूछें।
3. कमजोर स्टूडेंट को भी टीचर्स यह विश्वास दिलाएं कि वह कर सकते हैं। बताया जाए कि उनमें लक्ष्य हासिल करने की क्षमता है।
4. पढ़ाने की पुरानी प्रथाओं, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों को छोड़ अपने नॉलेज को नियमित रूप से अपडेट करें। नए विचारों और दृष्टिकोणों के लिए हमेशा तैयार रहें।
5. छात्रों के बीच जिज्ञासा और पूछताछ आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
6. टीचर्स की यह कोशिश होनी चाहिए कि स्टूडेंट के हर टॉपिक का बेसिक क्लीयर हो।
7. स्टूडेंट्स में साइंटिफिक टैंपर, तर्कसंगत दृष्टिकोण और पॉजिटिव एटीट्यूड को बढ़ावा दें।
8. टॉपिक को समझाने के लिए हमारे आपास होने वाली चीजों से उसे को-रिलेट कर समझाएं ।
9. एक्सपेरिमेंटल लर्निंग को प्रमोट किया जाए। इनोवेटिव, प्रैक्टीकल नॉलेज को बढ़ावा दें। टीचिंग प्रोसेस को रोचक बनाने के लिए अधिक से अधिक उपकरणों का उपयोग करें।

10. छात्रों को सूचना/डेटा और स्थितियों का विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित करें। क्रिएटिव थिंकिग को बढ़ावा देने के लिए टीचर्स प्रयास करें।
11. सूचना, आकार और ग्राफिक टूल के महत्वपूर्ण विश्लेषण को बढ़ावा देना।
12. स्टूडेंट्स में सेल्फ लर्निंग को बढ़ावा देना।
13. गणित, साइंस मानविकी और आर्ट में टीचर्स यह सुनिश्चित करें कि स्टूडेंट का कंासेप्ट पूरी तरह से क्लीयर हो।
14. स्टूडेंट के बैकग्राउंड को जानने का प्रयास करें। अगर बच्चा किसी विषय को समझ नहीं पा रहा है तो उसकी परेशानी समझें और फिर उसे हल करने का प्रयास करें।
15. सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, अनाथ, स्पेशल श्रेणी से आने वाले स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स करुणामय व्यवहार करें। उन्हें समझने का प्रयास करें।
16. जो सीखने में थोड़े कमजोर हैं, उन पर ज्यादा समय लगाएं।
17. पीसा फ्रेमवर्क और पीसा टेस्ट आइटम की आवश्यकता के अनुसार टीचर्स खुद सको ढालें और स्टूडेंट्स को तैयार करें।

 

टीचर्स को यह नहीं करने की सलाह दी गई

1. किसी भी कारण से किसी भी छात्र को डिमोटिवेट न करें।
2. प्रश्न पूछने से छात्रों को हतोत्साहित न करें, बल्कि उचित जवाब देकर उसके जिज्ञासा को शांत करें।
3. स्टूडेंट्स को धमकाएं नहीं।
4. स्टूडेंट्स को पढ़ने के सरल तरीके को बढ़ावा न दें, उसके बेसिक क्लीयर होने चाहिए।
5. जाति, रंग, पंथ, धर्म और पृष्ठभूमि आदि के आधार पर छात्रों से भेदभाव न करें।
6. सिलेबस को पूरा करने में जल्दबाजी नहीं दिखाएं।
7. जब छात्र प्रश्न पूछते हैं या कांसेप्ट क्लीयर करने के लिए अनुरोध करते हैं, तो परेशान न हों।
8. किसी भी छात्र को यह महसूस न कराएं कि वह कम बुद्धिमान है या उसकी क्षमता कम है।
9. टीचर्स उन छात्रों के लिए कठोर न बनें, जो घर पर कठिन परिस्थितियों के कारण होमवर्क नहीं कर पाए हों। ऐसे छात्रों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं।
10. किसी भी छात्र को गलत उत्तर देने पर भी हंसी नहीं उड़ानी चाहिए और न ही उसका मजाक उड़ाया जाना चाहिए।

हम स्टूडेंट्स को हेल्थी क्लासरूम देना चाहते हैं, जिससे कि वह पढ़ाई को बोझ नहीं समझे बल्कि रुचि लेकर पढ़े। इस मकसद को पूरा करने के लिए सीनियर टीचर्स के साथ मिलकर मैंने कुछ प्वाइंट्स तैयार किए हैं। हम पढ़ाने के तरीकों में बदलाव करने जा रहे हैं। इससे 2021 में होने वाले पीसा में भी फायदा होगा।
- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़(यूटी)
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