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कोरोनाः पंजाब यूनिवर्सिटी ने बांट दिए होते 50 करोड़ तो लॉकडाउन में शिक्षक कर रहे होते शोध
Wed, 01 Apr 2020 02:21 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 01 Apr 2020 02:21 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी के कुछ अफसर अपने मतलब के कामों को रातोंरात निपटा लेते हैं, लेकिन बात जब शिक्षकों के हित की आती है तो फिर हीलाहवाली शुरू हो जाती है। कमियां भी खूब निकाली जाती हैं। इसी का उदाहरण आज सामने है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान यानी रूसा के तहत रिसर्च के लिए मिले 50 करोड़ रुपये शिक्षकों को नहीं बांटे गए।
यदि रकम समय रहते उन्हें मिल जाती तो वह लॉकडाउन के इस समय का रिसर्च के जरिये सदुपयोग कर रहे होते। पीयू को इस बार रूसा के तहत बड़ी रकम हाथ लगी थी। इसके लिए 147 शिक्षकों ने रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपे थे। उनमें से बेहतर रिसर्च को छांटकर संबंधित शिक्षकों को पैसे आवंटित किए जाने थे। इसके लिए कमेटी बनाई गई और रिसर्च प्रोजेक्ट का चयन किया गया।
60 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट कमेटी ने फाइनल किए थे। इस कार्य के बाद शिक्षकों को प्रोजेक्ट की रकम दी जानी थी, लेकिन यह लॉक डाउन से पहले नहीं दी गई। कुछ शिक्षकों ने कहा है कि यह रकम समय से मिल जाती तो संबंधित शिक्षक आज घर पर रिसर्च का आधा काम निपटा लेते। साथ ही फाइंडिंग आदि का काम लॉकडाउन खुलने के बाद कर लेते लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षकों ने कहा है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, उसकी जांच होनी चाहिए।
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यदि रकम समय रहते उन्हें मिल जाती तो वह लॉकडाउन के इस समय का रिसर्च के जरिये सदुपयोग कर रहे होते। पीयू को इस बार रूसा के तहत बड़ी रकम हाथ लगी थी। इसके लिए 147 शिक्षकों ने रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपे थे। उनमें से बेहतर रिसर्च को छांटकर संबंधित शिक्षकों को पैसे आवंटित किए जाने थे। इसके लिए कमेटी बनाई गई और रिसर्च प्रोजेक्ट का चयन किया गया।
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60 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट कमेटी ने फाइनल किए थे। इस कार्य के बाद शिक्षकों को प्रोजेक्ट की रकम दी जानी थी, लेकिन यह लॉक डाउन से पहले नहीं दी गई। कुछ शिक्षकों ने कहा है कि यह रकम समय से मिल जाती तो संबंधित शिक्षक आज घर पर रिसर्च का आधा काम निपटा लेते। साथ ही फाइंडिंग आदि का काम लॉकडाउन खुलने के बाद कर लेते लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षकों ने कहा है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, उसकी जांच होनी चाहिए।
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300 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहे
पीयू में 300 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सबसे अधिक प्रोजेेक्ट साइंस विभाग के पास हैं। यहां के अधिकांश शिक्षक रिसर्च कर रहे हैं। साथ ही पीएचडी भी करवा रहे हैं। इनके अधीन 500 से अधिक स्कॉलर रिसर्च कर रहे हैं। इसमें आधे रिसर्च प्रोजेक्ट चार से पांच माह में पूरे हो जाएंगे। बाकी के रिसर्च दिसंबर तक होंगे। हालांकि भारत सरकार द्वारा फंडिड रिसर्च प्रोजेक्ट अधिक अवधि के होते हैं। उन्हें पूरा करने में अभी समय लगेगा।
इसरो सेंटर स्थापना पर चल रहा काम
पंजाब यूनिवर्सिटी ने इसरो केंद्र की स्थापना के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा था। सूत्रों का कहना है कि प्रथम चरण में यह प्रस्ताव पास हो गया। फाइनल केंद्र सरकार की कमेटी करेगी। वर्तमान में लॉकडाउन है, लेकिन जैसे ही खुलेगा इस पर काम होगा। यदि पीयू में यह स्थापित हो जाएगा तो इसके जरिये नए नए रिसर्च पीयू कर सकेगा। साथ ही परिणाम भी बेहतर आएंगे।
रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए रकम की मंजूरी के बारे में पता किया जाएगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई पीयू
इसरो सेंटर स्थापना पर चल रहा काम
पंजाब यूनिवर्सिटी ने इसरो केंद्र की स्थापना के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा था। सूत्रों का कहना है कि प्रथम चरण में यह प्रस्ताव पास हो गया। फाइनल केंद्र सरकार की कमेटी करेगी। वर्तमान में लॉकडाउन है, लेकिन जैसे ही खुलेगा इस पर काम होगा। यदि पीयू में यह स्थापित हो जाएगा तो इसके जरिये नए नए रिसर्च पीयू कर सकेगा। साथ ही परिणाम भी बेहतर आएंगे।
रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए रकम की मंजूरी के बारे में पता किया जाएगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई पीयू