{"_id":"5eb245978ebc3e90a359bb6a","slug":"coronavirus-lockdown-punjab-university-action-employees-and-workers","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउनः पंजाब यूनिवर्सिटी ने दिन में 800 लोगों को नौकरी से निकाला, देर रात आदेश लिया वापस","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
लॉकडाउनः पंजाब यूनिवर्सिटी ने दिन में 800 लोगों को नौकरी से निकाला, देर रात आदेश लिया वापस
Wed, 06 May 2020 10:35 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 06 May 2020 10:35 AM IST
विज्ञापन
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब विश्वविद्यालय पढ़े-लिखे लोगों का गढ़ माना जाता है, लेकिन कोरोना संकट के बीच ऐसे-ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं कि छवि धूमिल हो रही है। पीएम नरेंद्र मोदी तक के आदेशों को दरकिनार किया जा रहा है। मंगलवार को दिन में पीयू के 800 लोगों को नौकरी से बाहर निकालने के आदेश जारी कर दिए गए।
कारण बना कि आठ मई को इनका टर्म पूरा हो रहा है। शाम को यह बात आग की तरह फैली। सीनेटर डॉ. सुभाष शर्मा, डीपीएस रंधावा आदि ने सीनेट के वाट्सएप ग्रुप पर इस आदेश का खूब विरोध किया। जब पोल खुली तो पीयू प्रशासन को देर रात इस आदेश को वापस लेना पड़ा। यानी शिक्षक व कर्मचारी पूर्व की तरह काम करते रहेंगे।
ये हैं निकाले गए कर्मियों के आंकड़े
पंजाब विश्वविद्यालय में कांट्रेक्ट पर 200 शिक्षक काम कर रहे हैं। इन शिक्षकों को हर माह लगभग 50 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। इनके अलावा गेस्ट फैकल्टी की संख्या भी इतनी ही है। उन्हें 25 हजार रुपये प्रति माह पगार दी जाती है। कांट्रेक्ट कर्मचारियों में क्लीनर, स्वीपर, क्लर्क व अन्य कर्मी आते हैं। इनकी संख्या लगभग 400 है।
विज्ञापन
क्लीनर व स्वीपर को हर माह 15 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं क्लर्क को लगभग 21 हजार रुपये मिलते हैं। हर साल इनका कांट्रेक्ट रिन्यू होता है। आठ मई तक इन सभी का पीयू के साथ अनुबंध है। हर साल अनुबंध होता है और रिन्यू हो जाता है। पीयू ने कभी इन लोगों को बेरोजगार नहीं किया। कुछ समय का गैप देकर इनसे फिर काम लेना शुरू किया जाता था।
विज्ञापन
कारण बना कि आठ मई को इनका टर्म पूरा हो रहा है। शाम को यह बात आग की तरह फैली। सीनेटर डॉ. सुभाष शर्मा, डीपीएस रंधावा आदि ने सीनेट के वाट्सएप ग्रुप पर इस आदेश का खूब विरोध किया। जब पोल खुली तो पीयू प्रशासन को देर रात इस आदेश को वापस लेना पड़ा। यानी शिक्षक व कर्मचारी पूर्व की तरह काम करते रहेंगे।
विज्ञापन
ये हैं निकाले गए कर्मियों के आंकड़े
पंजाब विश्वविद्यालय में कांट्रेक्ट पर 200 शिक्षक काम कर रहे हैं। इन शिक्षकों को हर माह लगभग 50 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। इनके अलावा गेस्ट फैकल्टी की संख्या भी इतनी ही है। उन्हें 25 हजार रुपये प्रति माह पगार दी जाती है। कांट्रेक्ट कर्मचारियों में क्लीनर, स्वीपर, क्लर्क व अन्य कर्मी आते हैं। इनकी संख्या लगभग 400 है।
विज्ञापन
क्लीनर व स्वीपर को हर माह 15 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं क्लर्क को लगभग 21 हजार रुपये मिलते हैं। हर साल इनका कांट्रेक्ट रिन्यू होता है। आठ मई तक इन सभी का पीयू के साथ अनुबंध है। हर साल अनुबंध होता है और रिन्यू हो जाता है। पीयू ने कभी इन लोगों को बेरोजगार नहीं किया। कुछ समय का गैप देकर इनसे फिर काम लेना शुरू किया जाता था।
खड़े हुए थे ये सवाल
अब लॉकडाउन है लोगों के सामने एक-एक रुपये की दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। इसी बीच पीयू ने आदेश जारी कर दिया कि वह इन सभी शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवाएं आठ मई के बाद नहीं लेगा। सभी लोगों के बेरोजगार होने की खबर जब फैली तो सभी की आंखों में आंसू आ गए। परिवारों की महिलाएं रोने लगी। बाहर लॉकडाउन है। कोई दूसरा काम भी नहीं मिलेगा। घरों का संचालन कैसे होगा।
बच्चों का पेट कैसे भरेगा। इन सभी सवालों को लेकर सब हैरान हैं। जानकारों का कहना है कि कम से कम लॉकडाउन जब तक रहता पीयू को इन सभी को काम पर रखना चाहिए था। लॉकडाउन खत्म होता तो पीयू अपने खर्च के लिए कर्मियों की कटौती कर सकता था। उस समय यह बेरोजगार होते तो कहीं दूसरी जगह भी नौकरी की तलाश कर लेते। पीयू के इस निर्णय की चारों ओर निंदा हो रही है।
कह रहे हैं कि सरकारी संस्थान से ऐसी आशा तो नहीं की जा सकती थी। कुछ लोगों ने यह भी कहा है यदि यह लोग काम नहीं कर रहे थे तो अन्य लोगों के काम करने की गारंटी पीयू कैसे ले सकता है। वह भी घरों में ही हैं। उन्हें पगार फिर क्यों दी जा रही है। हालांकि कुछ लोग ऑनलाइन काम जरूर कर रहे हैं। दिन भर सवाल पर सवाल खड़े हुए।
रात को सीनेटरों ने लंबी बहस करके इस आदेश को वापस करा दिया। इसका श्रेय डॉ. सुभाष शर्मा, डीपीएस रंधावा आदि को जाता है, जिन्होंने शिक्षकों व कर्मियों का पक्ष लिया और कहा कि लॉकडाउन में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।
बच्चों का पेट कैसे भरेगा। इन सभी सवालों को लेकर सब हैरान हैं। जानकारों का कहना है कि कम से कम लॉकडाउन जब तक रहता पीयू को इन सभी को काम पर रखना चाहिए था। लॉकडाउन खत्म होता तो पीयू अपने खर्च के लिए कर्मियों की कटौती कर सकता था। उस समय यह बेरोजगार होते तो कहीं दूसरी जगह भी नौकरी की तलाश कर लेते। पीयू के इस निर्णय की चारों ओर निंदा हो रही है।
कह रहे हैं कि सरकारी संस्थान से ऐसी आशा तो नहीं की जा सकती थी। कुछ लोगों ने यह भी कहा है यदि यह लोग काम नहीं कर रहे थे तो अन्य लोगों के काम करने की गारंटी पीयू कैसे ले सकता है। वह भी घरों में ही हैं। उन्हें पगार फिर क्यों दी जा रही है। हालांकि कुछ लोग ऑनलाइन काम जरूर कर रहे हैं। दिन भर सवाल पर सवाल खड़े हुए।
रात को सीनेटरों ने लंबी बहस करके इस आदेश को वापस करा दिया। इसका श्रेय डॉ. सुभाष शर्मा, डीपीएस रंधावा आदि को जाता है, जिन्होंने शिक्षकों व कर्मियों का पक्ष लिया और कहा कि लॉकडाउन में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।
हाईकोर्ट जाने का बना लिया था मन
कर्मचारी नेताओं ने यह आदेश पीयू से वापस लेने को कहा था। अन्यथा कर्मचारी हाईकोर्ट का रास्ता खटखटाएंगे और पीएमओ को पत्र लिखेंगे। कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि वह पीयू के अधिकारियों के घरों के बाहर आकर धरना देंगे। मालूम हो कि पीयू वीसी प्रो. राजकुमार की अध्यक्षता में 30 अप्रैल को बैठक हुई थी। उसी बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। कहा है कि आठ मई को सेशन पूरा हो रहा है।
इसलिए अब उनसे काम नहीं लिया जा सकता। लॉकडाउन खुलेगा तब सेवाएं ली जाएंगी। इस संबंध में पीयू डीपीआर कार्यालय की ओर से प्रेसनोट जारी किया गया। यह प्रेसनोट दो बार संशोधित हुआ। देर रात फिर एक बार इस आदेश को वापस लेने के लिए प्रेसनोट भेजा गया। सवाल यह खड़े हो गए कि पीयू की ओर से जारी प्रेसनोट दो से तीन बार बदले जा रहे हैं। क्या अधिकारी एक ही विषय पर निर्णय एक बार में नहीं ले पा रहे हैं?
पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन तक भी पहुंच गया मामला
कर्मचारियों ने कहा था कि देश बुरे दिनों से गुजर रहा है। हर कोई कष्ट भोग रहा है। ऐसे में पीयू ने जिन लोगों को नौकरी से निकाला है उनके परिवारों की स्थिति को देखते हुए पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व यूटी प्रशासन को इसमें दखल देने को कहा था। कुछ लोगों ने यह मामला ऊपर तक पहुंचा दिया था। पंजाब सरकार के अलावा यूटी प्रशासन को भी इसकी खबर लग गई थी। साथ ही केंद्र सरकार को भी मामला पहुंच गया था।
इसलिए अब उनसे काम नहीं लिया जा सकता। लॉकडाउन खुलेगा तब सेवाएं ली जाएंगी। इस संबंध में पीयू डीपीआर कार्यालय की ओर से प्रेसनोट जारी किया गया। यह प्रेसनोट दो बार संशोधित हुआ। देर रात फिर एक बार इस आदेश को वापस लेने के लिए प्रेसनोट भेजा गया। सवाल यह खड़े हो गए कि पीयू की ओर से जारी प्रेसनोट दो से तीन बार बदले जा रहे हैं। क्या अधिकारी एक ही विषय पर निर्णय एक बार में नहीं ले पा रहे हैं?
पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन तक भी पहुंच गया मामला
कर्मचारियों ने कहा था कि देश बुरे दिनों से गुजर रहा है। हर कोई कष्ट भोग रहा है। ऐसे में पीयू ने जिन लोगों को नौकरी से निकाला है उनके परिवारों की स्थिति को देखते हुए पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व यूटी प्रशासन को इसमें दखल देने को कहा था। कुछ लोगों ने यह मामला ऊपर तक पहुंचा दिया था। पंजाब सरकार के अलावा यूटी प्रशासन को भी इसकी खबर लग गई थी। साथ ही केंद्र सरकार को भी मामला पहुंच गया था।
केंद्र सरकार के मना करने के बाद भी पीयू ने सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकालकर उन्हें सताया गया। देर रात मुद्दा हमने उठाया तो आदेश वापस ले लिए गए लेकिन यह मामला सब जगह पहुंच गया। इससे पीयू की छवि धूमिल हुई है। पीयू के अधिकारी ध्यान दें कि भविष्य में ऐसे निर्णय न लिए जाएं।
- डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेटर पीयू
इस समय कोरोना का प्रभाव है। लोगों की मदद एक-दूसरे को दूर रहकर करनी चाहिए लेकिन पीयू ने जिन कर्मियों को हटाने का आदेश निकाला था वह गलत था। रात को सीनेट के वाट्सएप ग्रुप पर हमने प्रकरण उठाया। पीयू ने आदेश समय रहते वापस लिया। भविष्य में भी इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ऐसे आदेश जारी न हों।
- डीपीएस रंधावा, सीनेटर पीयू
- डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेटर पीयू
इस समय कोरोना का प्रभाव है। लोगों की मदद एक-दूसरे को दूर रहकर करनी चाहिए लेकिन पीयू ने जिन कर्मियों को हटाने का आदेश निकाला था वह गलत था। रात को सीनेट के वाट्सएप ग्रुप पर हमने प्रकरण उठाया। पीयू ने आदेश समय रहते वापस लिया। भविष्य में भी इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ऐसे आदेश जारी न हों।
- डीपीएस रंधावा, सीनेटर पीयू