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कोरोना का असरः चंडीगढ़ में निजी स्कूलों से विद्यार्थियों का मोह भंग, 4985 सरकारी में हुए दाखिल
Wed, 07 Oct 2020 10:11 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 07 Oct 2020 10:11 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना के बाद अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों को हटाकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार इस बार 4985 विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। ये सभी विद्यार्थी पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ते हैं। शिक्षा निदेशक रूबिन्दरजीत सिंह बराड़ ने बताया कि अब अभिभावकों के बीच सरकारी स्कूल नई पसंद है। इस बार पहली से आठवीं तक 9233 विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया।
इनमें से 4985 विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूलों में महामारी के दौरान फीस बढ़ाने और ऑनलाइन क्लास से संतुष्ट नहीं होने के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को वहां से हटा लिया। वहीं दाखिला करवाने आए कई परिजनों ने साझा किया कि यूटी के सरकारी स्कूलों की तरफ से दी जा रही सुविधाओं से वे परिचित ही नहीं थे।
फीस बढ़ाने पर अभिभावकों में थी नाराजगी
कोरोना के कारण लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद रहे, लेकिन निजी स्कूलों ने फीस कम करने की बजाय फीस बढ़ा दी। वहीं महामारी के दौरान कई अभिभावकों की नौकरी चली गई। इससे परेशान अभिभावकों ने कई महीने प्रदर्शन के साथ शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों के खिलाफ कई शिकायत पत्र सौंपे। निजी स्कूलों के प्रति अभिभावकों की नाराजगी के कारण उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवा दिया।
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शिक्षा विभाग ने ऑफलाइन और ऑनलाइन किया था प्रमोशन
पहली से आठवीं तक के दाखिले के दौरान सरकारी स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा आवेदन प्राप्त हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। विभाग ने स्कूल प्रमुख को संदेश भेजकर ज्यादा से ज्यादा दाखिले की प्रमोशन करने के निर्देश दिए थे। सभी शिक्षकों ने गली-मोहल्ले, मार्केट में सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए प्रमोशन किया था।
वहीं हर सार्वजनिक क्षेत्र में लोगों को सूचना पहुंचाने के लिए पोस्टर चिपकाए गए थे। इन पोस्टर में सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सभी सुविधाओं का विस्तार से जिक्र किया गया था। स्कूल स्टाफ ने अपने आस-पास के एरिया में पब्लिक पिलर, मार्केट की दुकानों, संपर्क केंद्र और गार्डन में ‘एडमिशन ओपन’ के पोस्टर चिपकाकर दाखिले का प्रमोशन किया था।
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इनमें से 4985 विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूलों में महामारी के दौरान फीस बढ़ाने और ऑनलाइन क्लास से संतुष्ट नहीं होने के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को वहां से हटा लिया। वहीं दाखिला करवाने आए कई परिजनों ने साझा किया कि यूटी के सरकारी स्कूलों की तरफ से दी जा रही सुविधाओं से वे परिचित ही नहीं थे।
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फीस बढ़ाने पर अभिभावकों में थी नाराजगी
कोरोना के कारण लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद रहे, लेकिन निजी स्कूलों ने फीस कम करने की बजाय फीस बढ़ा दी। वहीं महामारी के दौरान कई अभिभावकों की नौकरी चली गई। इससे परेशान अभिभावकों ने कई महीने प्रदर्शन के साथ शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों के खिलाफ कई शिकायत पत्र सौंपे। निजी स्कूलों के प्रति अभिभावकों की नाराजगी के कारण उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवा दिया।
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शिक्षा विभाग ने ऑफलाइन और ऑनलाइन किया था प्रमोशन
पहली से आठवीं तक के दाखिले के दौरान सरकारी स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा आवेदन प्राप्त हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। विभाग ने स्कूल प्रमुख को संदेश भेजकर ज्यादा से ज्यादा दाखिले की प्रमोशन करने के निर्देश दिए थे। सभी शिक्षकों ने गली-मोहल्ले, मार्केट में सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए प्रमोशन किया था।
वहीं हर सार्वजनिक क्षेत्र में लोगों को सूचना पहुंचाने के लिए पोस्टर चिपकाए गए थे। इन पोस्टर में सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सभी सुविधाओं का विस्तार से जिक्र किया गया था। स्कूल स्टाफ ने अपने आस-पास के एरिया में पब्लिक पिलर, मार्केट की दुकानों, संपर्क केंद्र और गार्डन में ‘एडमिशन ओपन’ के पोस्टर चिपकाकर दाखिले का प्रमोशन किया था।