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कटघरे में आई पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट, सीनेटर्स के ‘बाउंसर’ का तथ्यों से देना होगा जवाब
Thu, 06 Jun 2019 10:27 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 06 Jun 2019 10:27 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट ने पिछले कुछ माह में ऐसे फैसले लिए हैं जो विवादों में आ गए। सीनेट सदस्यों ने उनके इन फैसलों का कड़ा विरोध भी किया। अब फिर जुलाई में होने वाली सीनेट की बैठक में सिंडिकेट को वह कटघरे में खड़ा करने जा रहे हैं। सिंडिकेट को लिए गए हर फैसले के लिए नियम दिखाने होंगे। तथ्यों को प्रस्तुत करना होगा अन्यथा की स्थिति में यह फैसले पलटे जाएंगे। हालांकि सिंडिकेट अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अभी से ताकत लगाए हुए है।
सिंडिकेट ने पिछले दिनों एसडी कॉलेज के प्रिंसिपल का उसी पद पर री-अप्वाइंटमेंट कर दिया, जो कि यूजीसी व पीयू कैलेंडर के खिलाफ था। यह मुद्दा डॉ. सुभाष शर्मा, विक्की गिल, डॉ. अजय रंगा आदि ने उठाया तो सिंडिकेट घेरे में आ गई। सीनेट के सदस्य चाहते थे कि इस मुद्दे के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए। इसके लिए 19 सदस्यों ने लिखित में पत्र भी दिया था।
वीसी प्रो. राजकुमार ने इन सदस्यों को यह कहते हुए चुप कराया कि वह 28 मई को होेेने वाली सिंडिकेट की बैठक में विशेष सत्र के लिए तिथि घोषित करा देंगे, लेकिन वीसी नहीं करा सके। एक ही पक्ष के सदस्यों का दबदबा होने के कारण वीसी की यहां नहीं चलने दी। अब वीसी को सीनेट में जवाब देना होगा कि आखिर वह तिथि घोषित क्यों नहीं करा सके।
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सिंडिकेट ने पिछले दिनों एसडी कॉलेज के प्रिंसिपल का उसी पद पर री-अप्वाइंटमेंट कर दिया, जो कि यूजीसी व पीयू कैलेंडर के खिलाफ था। यह मुद्दा डॉ. सुभाष शर्मा, विक्की गिल, डॉ. अजय रंगा आदि ने उठाया तो सिंडिकेट घेरे में आ गई। सीनेट के सदस्य चाहते थे कि इस मुद्दे के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए। इसके लिए 19 सदस्यों ने लिखित में पत्र भी दिया था।
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वीसी प्रो. राजकुमार ने इन सदस्यों को यह कहते हुए चुप कराया कि वह 28 मई को होेेने वाली सिंडिकेट की बैठक में विशेष सत्र के लिए तिथि घोषित करा देंगे, लेकिन वीसी नहीं करा सके। एक ही पक्ष के सदस्यों का दबदबा होने के कारण वीसी की यहां नहीं चलने दी। अब वीसी को सीनेट में जवाब देना होगा कि आखिर वह तिथि घोषित क्यों नहीं करा सके।
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मुद्दा प्राथमिकता से उठेगा डीन रिसर्च का मुद्दा
सीनेट में तय हो गया कि बिना एजेंडे के कोई भी प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, यदि प्रस्ताव लाया भी गया तो उस पर फैसला नहीं होगा। इस पर कई सीनेटरों ने आरोप लगाया कि डीन रिसर्च का प्रस्ताव एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन उन्हें कुर्सी पर बैठा दिया गया। सीनेटरों ने इस प्रस्ताव को भी पलटने की मांग की है, जो अगली सीनेट की बैठक में यह प्रमुखता से उठाया जाएगा।
डीएसडब्ल्यू का एक्सटेंशन पड़ सकता है खटाई में
सिंडिकेट ने हाल ही में निर्णय लेकर डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू वुमेन प्रो. नीना कप्लास का एक्सटेंशन उसी पर पद के लिए कर दिया और इसका प्रस्ताव सीनेट को भेज दिया। सीनेट की बैठक में यह नाम फाइनल होंगे। वीसी प्रो. राजकुमार अपने विवेक के मुताबिक डीएसडब्ल्यू बनाना चाहते हैं।
यही कारण रहा कि उन्होंने सिंडिकेट में इनके नामों पर मुहर नहीं लगाई। सूत्रों का कहना है कि यदि वीसी अपने निर्णय पर अड़े रहे और कुछ सीनेटरों ने साथ दिया तो यह नाम खटाई में पड़ेंगे। हालांकि दूसरा गुट भी इन नामों को पास करवाने के लिए सीनेटरों के संपर्क साध रहा है।
डीएसडब्ल्यू का एक्सटेंशन पड़ सकता है खटाई में
सिंडिकेट ने हाल ही में निर्णय लेकर डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू वुमेन प्रो. नीना कप्लास का एक्सटेंशन उसी पर पद के लिए कर दिया और इसका प्रस्ताव सीनेट को भेज दिया। सीनेट की बैठक में यह नाम फाइनल होंगे। वीसी प्रो. राजकुमार अपने विवेक के मुताबिक डीएसडब्ल्यू बनाना चाहते हैं।
यही कारण रहा कि उन्होंने सिंडिकेट में इनके नामों पर मुहर नहीं लगाई। सूत्रों का कहना है कि यदि वीसी अपने निर्णय पर अड़े रहे और कुछ सीनेटरों ने साथ दिया तो यह नाम खटाई में पड़ेंगे। हालांकि दूसरा गुट भी इन नामों को पास करवाने के लिए सीनेटरों के संपर्क साध रहा है।
इन मुद्दों पर भी होगी बहस
- कई कॉलेजों में अयोग्य प्रधानाचार्य बना दिए गए, उन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनेगा।
- चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर के बदलाव को लेकर कई सदस्य मांग कर रहे हैं।
- सिंडिकेट के दो सदस्यों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग।
- सीजेएम विश्वविद्यालय की पीएचडी की जांच के लिए सीनेटरों को भेजने का निर्णय क्यों लिया गया।
- वार्डन की तैनाती में वरिष्ठता का मानक अभी क्यों लागू किया गया, पहले से क्यों नहीं।
- डीएवी कॉलेज को एमबीए की मान्यता देने व नहीं देने को लेकर बहस होगी।
- चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर के बदलाव को लेकर कई सदस्य मांग कर रहे हैं।
- सिंडिकेट के दो सदस्यों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग।
- सीजेएम विश्वविद्यालय की पीएचडी की जांच के लिए सीनेटरों को भेजने का निर्णय क्यों लिया गया।
- वार्डन की तैनाती में वरिष्ठता का मानक अभी क्यों लागू किया गया, पहले से क्यों नहीं।
- डीएवी कॉलेज को एमबीए की मान्यता देने व नहीं देने को लेकर बहस होगी।