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पंजाब यूनिवर्सिटी में डीएसडब्ल्यू पद को लेकर फिर घमासान होना तय, दिए गए विरोधाभासी बयान
Mon, 11 May 2020 11:50 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 11 May 2020 11:50 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में डीएसडब्ल्यू पद को लेकर घमासान होना तय है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। सिंडिकेट व सीनेट में जो ग्रुप लीडर हैं उनके बयानों में भी विरोधाभास है। ऐसे में माना जा रहा है कि फिर से यह पद विवादों में आ सकता है। अब देखना है कि वीसी प्रो. राजकुमार इस पर कैसा स्टैंड लेते हैं।
यदि पीयू के कैलेंडर के मुताबिक निर्णय होता है तो उस पर उंगली नहीं उठनी चाहिए और यदि कोई कैलेंडर को दरकिनार कर अपने नियमों को आगे बढ़ाना चाहता है तो फिर संकट खड़ा होगा। पीयू के डीएसडब्ल्यू का पद महत्वपूर्ण होता है। सभी 20 हॉस्टल उनके अधीन होते हैं। इसके अलावा छात्र कल्याण का पूरा कार्य वही देखते हैं।
इस महत्वपूर्ण कुर्सी पर अपने-अपने चेहरे बैठाने की जुगत पहले भी लगाई जाती रही है और अब फिर से शुरू हो गई। नियमों को कहीं तार-तार किया जाता है तो कहीं नियमों की दुहाई दी जाती है। इस पद पर तैनात प्रो. इमैनुअल नाहर 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस पद के लिए एक चेहरा चाहिए जो योग्य हो। डीएसडब्ल्यू योग्यता के अनुसार लगाया जाना चाहिए न कि सीनियोरिटी को देखते हुए। साथ ही यह पद सीधे विद्यार्थियों के हित का होता है। ऐसे में वीसी के साथ बेहतर तालमेल भी जरूरी है। योग्यता के साथ अनुभव भी होना जरूरी है।
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इन चेहरों पर नजर
पीयू डीएसडब्ल्यू के पद के लिए प्रो. देविंदर सिंह, प्रो. जतिंदर ग्रोवर, प्रो. हरीश कुमार, डॉ. जगत भूषण आदि नाम सामने आ रहे हैं। योग्यता के मुताबिक यही चेहरे भी फिट बैठते नजर आ रहे हैं। इन नामों में दोनों ग्रुप के लोग हैं जो उन्हें पसंद भी करते हैं और समय-समय पर उनके अनुभव का लाभ भी लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें दो नाम ऐसे हैं जिन पर सहमति बन सकती है, लेकिन उनमें से एक चेहरा फाइनल करना मुश्किल होगा। हालांकि फिर भी चयन तो एक व्यक्ति का करना ही होगा।
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यदि पीयू के कैलेंडर के मुताबिक निर्णय होता है तो उस पर उंगली नहीं उठनी चाहिए और यदि कोई कैलेंडर को दरकिनार कर अपने नियमों को आगे बढ़ाना चाहता है तो फिर संकट खड़ा होगा। पीयू के डीएसडब्ल्यू का पद महत्वपूर्ण होता है। सभी 20 हॉस्टल उनके अधीन होते हैं। इसके अलावा छात्र कल्याण का पूरा कार्य वही देखते हैं।
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इस महत्वपूर्ण कुर्सी पर अपने-अपने चेहरे बैठाने की जुगत पहले भी लगाई जाती रही है और अब फिर से शुरू हो गई। नियमों को कहीं तार-तार किया जाता है तो कहीं नियमों की दुहाई दी जाती है। इस पद पर तैनात प्रो. इमैनुअल नाहर 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस पद के लिए एक चेहरा चाहिए जो योग्य हो। डीएसडब्ल्यू योग्यता के अनुसार लगाया जाना चाहिए न कि सीनियोरिटी को देखते हुए। साथ ही यह पद सीधे विद्यार्थियों के हित का होता है। ऐसे में वीसी के साथ बेहतर तालमेल भी जरूरी है। योग्यता के साथ अनुभव भी होना जरूरी है।
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इन चेहरों पर नजर
पीयू डीएसडब्ल्यू के पद के लिए प्रो. देविंदर सिंह, प्रो. जतिंदर ग्रोवर, प्रो. हरीश कुमार, डॉ. जगत भूषण आदि नाम सामने आ रहे हैं। योग्यता के मुताबिक यही चेहरे भी फिट बैठते नजर आ रहे हैं। इन नामों में दोनों ग्रुप के लोग हैं जो उन्हें पसंद भी करते हैं और समय-समय पर उनके अनुभव का लाभ भी लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें दो नाम ऐसे हैं जिन पर सहमति बन सकती है, लेकिन उनमें से एक चेहरा फाइनल करना मुश्किल होगा। हालांकि फिर भी चयन तो एक व्यक्ति का करना ही होगा।
हाईकोर्ट पहुंचा था यह प्रकरण
पीयू का डीएसडब्ल्यू प्रकरण पिछले साल हाईकोर्ट पहुंचा था। सीनेट की बैठक में वीसी प्रो. राजकुमार ने प्रो. इमैनुअल नाहर का एक्सटेंशन नहीं किया था और उन्हें हटा दिया था। उसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कुछ दिन में फैसला आ गया। गोयल ग्रुप इस प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा था। छात्रों ने भी कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था। आखिर में गोयल ग्रुप के हाथ जीत लगी थी।
वीसी डीएसडब्ल्यू के लिए नाम सामने लेकर आएं। डीएसडब्ल्यू पद के लिए नाम ऐसा हो जो वार्डन रहे हों। साथ ही अनुभवी हों। हम किसी के नाम का कोई विरोध नहीं कर रहे हैं।
- डॉ. नवदीप गोयल, सीनेटर
पीयू के कैलेंडर के मुताबिक डीएसडब्ल्यू पद पर तैनाती होनी चाहिए। योग्य उम्मीदवार का चयन होना चाहिए। कुछ लोग निजी स्वार्थों के चलते कैलेंडर को दरकिनार कर देते हैं और अपने नियम बनाने लगते हैं।
- डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेटर
वीसी डीएसडब्ल्यू के लिए नाम सामने लेकर आएं। डीएसडब्ल्यू पद के लिए नाम ऐसा हो जो वार्डन रहे हों। साथ ही अनुभवी हों। हम किसी के नाम का कोई विरोध नहीं कर रहे हैं।
- डॉ. नवदीप गोयल, सीनेटर
पीयू के कैलेंडर के मुताबिक डीएसडब्ल्यू पद पर तैनाती होनी चाहिए। योग्य उम्मीदवार का चयन होना चाहिए। कुछ लोग निजी स्वार्थों के चलते कैलेंडर को दरकिनार कर देते हैं और अपने नियम बनाने लगते हैं।
- डॉ. सुभाष शर्मा, सीनेटर