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हिंदी-पंजाबी भाषा को लेकर पीयू सीनेट में मचा घमासान, सीनेटरों में नहीं बनी सहमति

Sun, 04 Nov 2018 01:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 04 Nov 2018 01:54 PM IST
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Clash in Punjab University Senate on Punjabi and Hindi Language
पंजाब यूनिवर्सिटी
हिंदी व पंजाबी भाषा को लेकर शनिवार को सीनेट में काफी खींचतान चली। कुछ सीनेटरों ने कहा कि पंजाबी भाषा को प्रथम स्थान मिले और उसके बाद दूसरी भाषा को। कुछ सीनेटर ने हिंदी का भी पक्ष रखा। काफी देर तक बहस चलती रही। आखिर में एक बात रखी गई कि इसके लिए हिंदी डायरेक्ट्रेट न बनाया जाए। हिंदी व पंजाबी विभाग अपनी-अपनी जगह भाषाओं का विकास करते रहेंगे। हालांकि इस पर फाइनल निर्णय नहीं हो पाया और न ही सीनेट को बताया गया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय हर साल राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पत्र लिखता है।
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यूजीसी भी इसको लेकर पत्र जारी करती है। विश्वविद्यालय की ओर से सीनेट के बैठक के एजेंडे में यह बात शामिल की गई। जैसे ही सीनेटरों को पता लगा तो उन्होंने उन्होंने विरोध कर दिया। हंगामा हो गया। मामला शांत किया गया और सभी से राय ली गई। सीनेट सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने कहा कि पीयू में पंजाब भाषा को तरजीह मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा वे हर भाषा का सम्मान करते हैं, लेकिन मां बोली भाषा पंजाबी को विशेष स्थान मिलना चाहिए। हरविंदर शर्मा ने कहा कि हिंदी का सतकार हो, लेकिन पीयू में हिंदी डायरेक्ट्रेट न बनाया जाए।
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उन्होंने कहा कि पीयू में कोई भी ऐसी चीज न लागू की जाए, जिससे दिक्कतें खड़ी हों। सीनेटर मुकेश अरोड़ा ने कहा कि यहां की मां बोली भाषा पंजाबी है, लेकिन हिंदी का भी अपमान नहीं होना चाहिए। उन्होंने पिछले दिनों पोती गई कालिख की निंदा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हिंदी विभाग के चेयरमैन गुरमीत सिंह सीनेटरों को बताया कि हर साल हिंदी के बढ़ावे के लिए आदेश आते हैं। इस बार भी आया है। यहां हिंदी डायरेक्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव आए, लेकिन मैंने सुझाव दिया था कि अकेले हिंदी नहीं पंजाबी व अंग्रेजी के भी अनुवादक इसमें रखे जाएं। इस दौरान चमन लाल आदि ने भी विचार रखे। कुछ सीनेटरों ने यह भी कहा कि हिंदी व पंजाबी हमारे दाएं व बायें हाथों की तरह हैं। आखिर में फैसला सीनेटर्स के सामने नहीं आया। इसको लेकर असमंजस बना हुआ है।
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पेपर सैटर को हो तीनों भाषाओं का ज्ञान हो
सीनेटर्स ने कहा कि कंट्रोलर दफ्तर में पेपर सैटर ऐसे तैनात हैं जिन्हें तीनों भाषाओं का ज्ञान नहीं है। इसके कारण तमाम छात्रों का भविष्य चौपट हो सकता है। तीनों भाषा हिंदी, पंजाबी व अंग्रेजी का ज्ञान रखने वाले तैनात किए जाएं। साथ ही पंजाबी में लिखी छात्रों की कॉपियों को प्रशिक्षित हाथों में दी जाएं ताकि छात्रों को सही से अंक मिल सकें।


डीसीडीसी चार्ज अलग किया जाए
कंट्रोलर परमिंदर सिंह के पास ही डीसीडीसी का चार्ज है। सीनेट सदस्य वीरेंद्र गिल ने कहा कि कंट्रोलर पर दो कार्य होने के कारण छात्रों के काम पेंडिंग हो रहे हैं। उनके रिजल्ट समय से नहीं आ रहे हैं। वह दूसरी जगह एडमिशन लेने में लेट हो रहे हैं। तमाम कॉलेजों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के पैरेंट्स यहां तक नहीं पहुंचे। उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ऑब्लाइज किया गया है, जो यह मामला नहीं उठाते हैं। यह स्टूडेंट्स के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इस पर जल्द कार्रवाई की जाए। कुछ लोगों ने कंट्रोलर का भी पक्ष लिया।

 
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