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स्कूल जाने के लिए हर रोज जान जोखिम में डालते हैं बच्चे, देखिए कैसे?
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Nov 2017 09:05 AM IST
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स्कूल जाने के लिए हर रोज जान जोखिम में डालते है बच्चे
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देश भर में स्कूल जाने के लिए बच्चे हर रोज जान जोखिम में डालते हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण है तस्वीर, जिसे देखकर एक बार तो हैरान रह जाएंगे। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुड़ैल और सेक्टर-45ए के बीच लोहे की रेलिंग तो लगा दी गई। लेकिन विभाजन से दोनों एरिया के लोग बुरी तरह से परेशान है।
ऐसे में लोगों का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले का तो सम्मान करते हैं लेकिन प्रशासन को चाहिए कि जो आधा किमी की रेलिंग(ग्रिल) लगाई गई है उसके बीच में एक या दो जगहों पर आने-जाने के लिए रास्ता दिया जाए। 10 फुट ऊंची ग्रिल लगने से सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे और बुजुर्ग है। बुड़ैल में रहने वाले बच्चे सेक्टर-45 के सरकारी स्कूल में पढ़ते है ऐसे में बच्चों को अतिरिक्त सफर तय करके स्कूल जाना पड़ता है जबकि कुछ बच्चे जल्दी घर और स्कूल पहुंचने के चक्कर में जान जोखिम में डालकर ऊंची ग्रिल फांद कर जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि सेक्टर-45 से बुड़ैल जहां पहले 5 मिनट में पहुंच जाते थे अब घूमकर जाने में आधा घंटे का समय लग रहा है। बुड़ैल में खरीददारी करने के लिए सेक्टर-45 के लोग आते है ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि उनका कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हो गए है कि रेलिंग लगने के बाद कुछ लोगों ने एक्टिवा सिर्फ इसलिए खरीदी है कि सामान लाने के लिए उस पार जा सकें। वार्ड पार्षद ने सोमवार को होने वाली सदन की बैठक में मेयर और कमिश्नर को इस ग्रिल का हल निकालने की मांग की है उन्होंने कहा है कि ग्रिल के बीचों बीच के दरवाजे आने-जाने के लिए खोले जाए।
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क्यों लगाई गई ये लोहे की ग्रिड
दरअसल, साल 2012 से ट्रैफिक, अतिक्रमण आदि की समस्या लेकर रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन की तरफ से हाइकोर्ट में एक अरजी दाखिल की गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कोबुड़ैल की साइड और सेक्टर-45ए के बीच एक रेलिंग बनवाने के आदेश दिए थे। फेडरेशन के अध्यक्ष अशोक नाभावाले के अनुसार पहले लोग सड़कों पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते थे जिससे बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही थी। उनका कहना है कि हाइकोर्ट के इस फैसले से सेक्टर-45ए के लोग राहत की सांस ले रहे हैं।
क्या चाहते हैं स्थानीय लोग
सेक्टर-45ए में दो मंदिर और एक स्कूल है। रात में मंदिर जाना तो अब नामुमकिन ही हो गया है क्योंकि जहां रास्ता खुला है वहां शराब का ठेका है, रात में वहां से निकलने में भी डर लगता है।
- रोशन, निवासी,बुड़ैल
ज्यादा ग्राहक सेक्टर के ही थे लेकिन जब से यह रेलिंग बनी है, दुकानें दूर हो जाने की वजह से वह लोग अब इकट्ठा ही सामानों की खरीदारी कर लेते हैं। केमिस्ट की दुकाने सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
- विनोद, अरोड़ा, दुकानदार
बीमारी की वजह से रोज दवाई लेने जाना पड़ता है। बेटा और पति काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। पहले बीच से रास्ता होने की वजह से मै खुद जाकर ले आती थी लेकिन अब शाम का इंतजार करना पड़ता है।
- कृष्णा रानी, निवासी सेक्टर-45 ए
सेक्टर में कोई मार्केट नही है। राशन, सब्जी, दवाईयां आदि लेने के लिए बुड़ैल जाना पड़ता है। अब हम पूरा घूमकर आते हैं
- हरिंदर मान निवासी, सेक्टर-45 ए
रेलिंग बहुत उंची है, हम रोजाना स्कूली बच्चों को उपर से चढ़कर पार करते हुए देखते हैं। कई बार बच्चे जल्दी के चक्कर में गिर जाते हैं। प्रशासन को इसके लिए कुछ करना चाहिए। सभी बहुत परेशान है।
- सुरेंद्र सैनी, निवासी
अब उम्र हो चुकी है, इतना पैदल नहीं चला जाता। अब मार्केट आने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। उपर से जहां रास्ता खुला हुआ है वहां बहुत ट्रैफिक होता है। रेलिंग के बीच से रास्ता खुला होना चाहिए।
- श्रीराम, निवासी, सेक्टर-45ए
रेलिंग के बनने से दोनों साइड के लोग बुरी तरह से परेशान है। पहले बच्चे टॉफी के लिए जिद्द करते थे तो दिला लाते थे लेकिन अब सभी सामानों की लिस्ट बनाकर एक बार ही मार्केट जाना हो पाता है।
- रीटा राणा, निवासी, सेक्टर-45ए
हाईकोर्ट का फैसला सम्मानजनक है लेकिन इस रेलिंग की वजह से न बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं और न ही महिलाएं मंदिर। दोनों ओर के लोग बहुत परेशान है। कई बार अधिकारियों को इस परेशानी से अवगत करवा चुका हूं। प्रशासन को चाहिए ग्रिल के बीचों बीच दो से तीन रास्ते आने जाने के लिए खोल दिए जाए इससे हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना नहीं होगी।
- कवरजीत राणा, वार्ड पार्षद
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ऐसे में लोगों का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले का तो सम्मान करते हैं लेकिन प्रशासन को चाहिए कि जो आधा किमी की रेलिंग(ग्रिल) लगाई गई है उसके बीच में एक या दो जगहों पर आने-जाने के लिए रास्ता दिया जाए। 10 फुट ऊंची ग्रिल लगने से सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे और बुजुर्ग है। बुड़ैल में रहने वाले बच्चे सेक्टर-45 के सरकारी स्कूल में पढ़ते है ऐसे में बच्चों को अतिरिक्त सफर तय करके स्कूल जाना पड़ता है जबकि कुछ बच्चे जल्दी घर और स्कूल पहुंचने के चक्कर में जान जोखिम में डालकर ऊंची ग्रिल फांद कर जा रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि सेक्टर-45 से बुड़ैल जहां पहले 5 मिनट में पहुंच जाते थे अब घूमकर जाने में आधा घंटे का समय लग रहा है। बुड़ैल में खरीददारी करने के लिए सेक्टर-45 के लोग आते है ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि उनका कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हो गए है कि रेलिंग लगने के बाद कुछ लोगों ने एक्टिवा सिर्फ इसलिए खरीदी है कि सामान लाने के लिए उस पार जा सकें। वार्ड पार्षद ने सोमवार को होने वाली सदन की बैठक में मेयर और कमिश्नर को इस ग्रिल का हल निकालने की मांग की है उन्होंने कहा है कि ग्रिल के बीचों बीच के दरवाजे आने-जाने के लिए खोले जाए।
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क्यों लगाई गई ये लोहे की ग्रिड
दरअसल, साल 2012 से ट्रैफिक, अतिक्रमण आदि की समस्या लेकर रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन की तरफ से हाइकोर्ट में एक अरजी दाखिल की गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कोबुड़ैल की साइड और सेक्टर-45ए के बीच एक रेलिंग बनवाने के आदेश दिए थे। फेडरेशन के अध्यक्ष अशोक नाभावाले के अनुसार पहले लोग सड़कों पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते थे जिससे बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही थी। उनका कहना है कि हाइकोर्ट के इस फैसले से सेक्टर-45ए के लोग राहत की सांस ले रहे हैं।
क्या चाहते हैं स्थानीय लोग
सेक्टर-45ए में दो मंदिर और एक स्कूल है। रात में मंदिर जाना तो अब नामुमकिन ही हो गया है क्योंकि जहां रास्ता खुला है वहां शराब का ठेका है, रात में वहां से निकलने में भी डर लगता है।
- रोशन, निवासी,बुड़ैल
ज्यादा ग्राहक सेक्टर के ही थे लेकिन जब से यह रेलिंग बनी है, दुकानें दूर हो जाने की वजह से वह लोग अब इकट्ठा ही सामानों की खरीदारी कर लेते हैं। केमिस्ट की दुकाने सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
- विनोद, अरोड़ा, दुकानदार
बीमारी की वजह से रोज दवाई लेने जाना पड़ता है। बेटा और पति काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। पहले बीच से रास्ता होने की वजह से मै खुद जाकर ले आती थी लेकिन अब शाम का इंतजार करना पड़ता है।
- कृष्णा रानी, निवासी सेक्टर-45 ए
सेक्टर में कोई मार्केट नही है। राशन, सब्जी, दवाईयां आदि लेने के लिए बुड़ैल जाना पड़ता है। अब हम पूरा घूमकर आते हैं
- हरिंदर मान निवासी, सेक्टर-45 ए
रेलिंग बहुत उंची है, हम रोजाना स्कूली बच्चों को उपर से चढ़कर पार करते हुए देखते हैं। कई बार बच्चे जल्दी के चक्कर में गिर जाते हैं। प्रशासन को इसके लिए कुछ करना चाहिए। सभी बहुत परेशान है।
- सुरेंद्र सैनी, निवासी
अब उम्र हो चुकी है, इतना पैदल नहीं चला जाता। अब मार्केट आने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। उपर से जहां रास्ता खुला हुआ है वहां बहुत ट्रैफिक होता है। रेलिंग के बीच से रास्ता खुला होना चाहिए।
- श्रीराम, निवासी, सेक्टर-45ए
रेलिंग के बनने से दोनों साइड के लोग बुरी तरह से परेशान है। पहले बच्चे टॉफी के लिए जिद्द करते थे तो दिला लाते थे लेकिन अब सभी सामानों की लिस्ट बनाकर एक बार ही मार्केट जाना हो पाता है।
- रीटा राणा, निवासी, सेक्टर-45ए
हाईकोर्ट का फैसला सम्मानजनक है लेकिन इस रेलिंग की वजह से न बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं और न ही महिलाएं मंदिर। दोनों ओर के लोग बहुत परेशान है। कई बार अधिकारियों को इस परेशानी से अवगत करवा चुका हूं। प्रशासन को चाहिए ग्रिल के बीचों बीच दो से तीन रास्ते आने जाने के लिए खोल दिए जाए इससे हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना नहीं होगी।
- कवरजीत राणा, वार्ड पार्षद