{"_id":"5e01b6398ebc3e882043832b","slug":"chandigarh-teachers-busy-in-extra-official-work-students-study-affecting","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"...जब शिक्षक करेंगे अन्य काम तो कैसे आएंगे बेहतर परिणाम, बच्चों की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
...जब शिक्षक करेंगे अन्य काम तो कैसे आएंगे बेहतर परिणाम, बच्चों की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित
Tue, 24 Dec 2019 12:24 PM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 24 Dec 2019 12:24 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग शहर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा अन्य सारे काम ले रहा है। 16 से 21 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक की गतिविधियां भी आयोजित करवाई गई। वहीं पीसा का पेपर भी इसी हफ्ते करवाया गया। 19 दिसंबर से शिक्षकों की चाइल्ड मैपिंग में ड्यूटी लगी हुई है। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के पेपर जांच कर उनका रिजल्ट भी मंगलवार को देना है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि शिक्षक कैसे बच्चों के पेपर जांच कर रिजल्ट तैयार करें और रेगुलर चल रही कक्षाओं में बच्चों के लेक्चर भी लें।
सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों का रिजल्ट भी प्राइवेट की तुलना में बेहतर करने का है। शहर के सरकारी स्कूलों में बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग रोजाना कोई ना कोई बैठक करता रहता है। लेकिन ग्राउंड पर स्कूलों की हालत इसके एकदम विपरीत है। एक तो पहले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी चल रही है, दूसरी तरफ जो शिक्षक स्कूलों में हैं उनकी गैर शैक्षणिक कामों में ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में शिक्षक बच्चों की कब क्लासें लेंगे ? कैसे विद्यार्थियों पर अलग से ध्यान देंगे जिससे कमजोर बच्चों की मदद की जा सके, यह समझ से परे है।
सरकारी स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि 9वीं से 12वीं तक के बच्चों की परीक्षा 2 दिसंबर से 18 दिसंबर तक चली। इसी बीच 16 दिसंबर से 21 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक मनाया गया, जिसमें प्रार्थना सभा में योगा, व्यायाम, प्राणायाम आदि गतिविधियां करवानी थी। इसके अलावा बच्चों में डिबेट, सेमीनार, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट की तरफ से लेक्चर, रंगोली प्रतियोगिता, कविता-निबंध लेखन, डांस, मार्शल आर्ट, रस्सी-कूद, गार्डनिंग, स्पोर्ट्स क्विज, बच्चों-परिजनों-शिक्षकों में पारंपरिक खेलों को लेकर प्रतियोगिताएं इत्यादि आयोजित करवाई गई।
विज्ञापन
इन सभी गतिविधियों की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी फोटो के साथ क्लस्टर हेड को 23 दिसंबर तक ई-मेल करनी थी। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के पेपर जांच कर उनका रिजल्ट भी 24 दिसंबर तक देना है। इसी बीच पीसा का पेपर भी लिया गया, उसका भी रिजल्ट तैयार कर विभाग को भेजना है। वहीं 19 दिसंबर से स्कूलों में शिक्षकों की चाइल्ड मैपिंग सर्वे में भी ड्यूटी लगा दी गई है। इसका भी रिपोर्ट आगामी हफ्ते में विभाग को भेजनी है। ऐसे में कक्षाओं में शिक्षक नहीं होने के कारण दिसंबर में बच्चे भी कम आए हैं।
विज्ञापन
सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों का रिजल्ट भी प्राइवेट की तुलना में बेहतर करने का है। शहर के सरकारी स्कूलों में बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग रोजाना कोई ना कोई बैठक करता रहता है। लेकिन ग्राउंड पर स्कूलों की हालत इसके एकदम विपरीत है। एक तो पहले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी चल रही है, दूसरी तरफ जो शिक्षक स्कूलों में हैं उनकी गैर शैक्षणिक कामों में ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में शिक्षक बच्चों की कब क्लासें लेंगे ? कैसे विद्यार्थियों पर अलग से ध्यान देंगे जिससे कमजोर बच्चों की मदद की जा सके, यह समझ से परे है।
विज्ञापन
सरकारी स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि 9वीं से 12वीं तक के बच्चों की परीक्षा 2 दिसंबर से 18 दिसंबर तक चली। इसी बीच 16 दिसंबर से 21 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक मनाया गया, जिसमें प्रार्थना सभा में योगा, व्यायाम, प्राणायाम आदि गतिविधियां करवानी थी। इसके अलावा बच्चों में डिबेट, सेमीनार, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट की तरफ से लेक्चर, रंगोली प्रतियोगिता, कविता-निबंध लेखन, डांस, मार्शल आर्ट, रस्सी-कूद, गार्डनिंग, स्पोर्ट्स क्विज, बच्चों-परिजनों-शिक्षकों में पारंपरिक खेलों को लेकर प्रतियोगिताएं इत्यादि आयोजित करवाई गई।
विज्ञापन
इन सभी गतिविधियों की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी फोटो के साथ क्लस्टर हेड को 23 दिसंबर तक ई-मेल करनी थी। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के पेपर जांच कर उनका रिजल्ट भी 24 दिसंबर तक देना है। इसी बीच पीसा का पेपर भी लिया गया, उसका भी रिजल्ट तैयार कर विभाग को भेजना है। वहीं 19 दिसंबर से स्कूलों में शिक्षकों की चाइल्ड मैपिंग सर्वे में भी ड्यूटी लगा दी गई है। इसका भी रिपोर्ट आगामी हफ्ते में विभाग को भेजनी है। ऐसे में कक्षाओं में शिक्षक नहीं होने के कारण दिसंबर में बच्चे भी कम आए हैं।
सर्वे के दौरान महिलाओं की सुरक्षा जिम्मेदारी कौन लेगा?
सरकारी स्कूल के शिक्षक स्वर्ण सिंह ने बताया कि आरटीई, धारा-27 के मुताबिक शिक्षक आबादी की जनगणना, आपदी राहत कर्तव्यों और चुनाव के अलावा अन्य किसी भी गैर शैक्षणिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते। स्कूलों में 80 प्रतिशत तक महिला स्टाफ है। ऐसे में रूरल एरिया और कॉलोनियों में सर्वे के लिए जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या है चाइल्ड मैपिंग सर्वे...
14 वर्ष तक की आयु का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत हर साल अनिवार्य रूप से दाखिले से पहले चाइल्ड मैपिंग सर्वे करवाया जाता है जिससे पता चल सके कि कौन सा बच्चा कहां और क्या पढ़ रहा है। इसके साथ ही कोई ऐसा बच्चा तो नहीं है जो शिक्षा से वंचित हो।
शिक्षकों से शैक्षणिक काम ही करवा रहे: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी अल्का मेहता ने बताया कि चाइल्ड मैपिंग शिक्षा से संबंधित काम है। हमेशा से ही ये कार्य शिक्षक करते आए हैं। वहीं जिला शिक्षा निदेशक रूबिंदर जीत सिंह बराड़ से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वो छुट्टियों पर है। इस संबंधी अभी कुछ नहीं बता सकते।
क्या है चाइल्ड मैपिंग सर्वे...
14 वर्ष तक की आयु का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत हर साल अनिवार्य रूप से दाखिले से पहले चाइल्ड मैपिंग सर्वे करवाया जाता है जिससे पता चल सके कि कौन सा बच्चा कहां और क्या पढ़ रहा है। इसके साथ ही कोई ऐसा बच्चा तो नहीं है जो शिक्षा से वंचित हो।
शिक्षकों से शैक्षणिक काम ही करवा रहे: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी अल्का मेहता ने बताया कि चाइल्ड मैपिंग शिक्षा से संबंधित काम है। हमेशा से ही ये कार्य शिक्षक करते आए हैं। वहीं जिला शिक्षा निदेशक रूबिंदर जीत सिंह बराड़ से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वो छुट्टियों पर है। इस संबंधी अभी कुछ नहीं बता सकते।