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चंडीगढ़ः 11वीं में दाखिला नहीं मिलने पर टूटीं सैकड़ों विद्यार्थियों की उम्मीदें, विरोध प्रदर्शन किया
Wed, 28 Aug 2019 11:10 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 28 Aug 2019 11:10 AM IST
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दाखिले के लिए जुटे विद्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के स्कूलों में 11वीं कक्षा में दाखिले के लिए आयोजित चौथी काउंसिलिंग भी खत्म हो गई, लेकिन सिर्फ 800 को ही सीटें मिली। काउंसिलिंग में 40 प्रतिशत के ज्यादा अंक लाने वाले स्टूडेंट्स को दाखिला मिला। लेकिन सबसे दुखद पहलू यह है कि सैकड़ों अन्य स्टूडेंट्स की उम्मीद टूट गईं। दाखिला न मिलने के बाद अब वह क्या करेंगे, इस प्रश्न का जवाब न शिक्षा विभाग के पास है और न ही पेरेंट्स के पास। अपना रोष जताने के लिए स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने स्कूल के गेट पर धरना भी दिया, लेकिन फिर मायूस होकर घर को लौट गए।
शिक्षा विभाग ने मंगलवार को 45 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले ब्वॉयज स्टूडेंट्स को और 40 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वालीं गर्ल्स स्टूडेंट्स को आर्ट्स में दाखिला दिया। हालांकि इससे कम प्रतिशत वाले कुछ स्टूडेंट्स वोकेश्नल कोर्स में दाखिला दिया गया। चौथी काउंसिलिंग में आर्ट्स की 582, स्किल कोर्स की 169, साइंस की 28 और कामर्स की 18 सीटों पर एडमिशन हुए। पिछली काउंसिलिंग की तरह इस बार कोई हंगामा न हो, इसके लिए काफी पुलिस बल तैयार किया गया था।
शाम 6 बजे स्कूल के ऑडिटोरियम का गेट बंद करने से पहले शिक्षा विभाग ने पुलिस को सूचना दे दी। तुरंत मौके पर एक्स्ट्रा पुलिस पहुंच गई और स्टूडेंट्स को स्कूल परिसर से बाहर भेजा। भड़के स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने स्कूल के गेट पर ही धरना दे दिया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को संभाला और किसी तरह सभी को समझा कर घर भेजा। शिक्षा विभाग की तरफ से मौके पर घोषणा की गई कि बाकी बचे स्टूडेंट्स के लिए वेबसाइट या फिर अखबार में सूचना दी जाएगी।
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शिक्षा विभाग ने मंगलवार को 45 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले ब्वॉयज स्टूडेंट्स को और 40 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वालीं गर्ल्स स्टूडेंट्स को आर्ट्स में दाखिला दिया। हालांकि इससे कम प्रतिशत वाले कुछ स्टूडेंट्स वोकेश्नल कोर्स में दाखिला दिया गया। चौथी काउंसिलिंग में आर्ट्स की 582, स्किल कोर्स की 169, साइंस की 28 और कामर्स की 18 सीटों पर एडमिशन हुए। पिछली काउंसिलिंग की तरह इस बार कोई हंगामा न हो, इसके लिए काफी पुलिस बल तैयार किया गया था।
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शाम 6 बजे स्कूल के ऑडिटोरियम का गेट बंद करने से पहले शिक्षा विभाग ने पुलिस को सूचना दे दी। तुरंत मौके पर एक्स्ट्रा पुलिस पहुंच गई और स्टूडेंट्स को स्कूल परिसर से बाहर भेजा। भड़के स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने स्कूल के गेट पर ही धरना दे दिया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को संभाला और किसी तरह सभी को समझा कर घर भेजा। शिक्षा विभाग की तरफ से मौके पर घोषणा की गई कि बाकी बचे स्टूडेंट्स के लिए वेबसाइट या फिर अखबार में सूचना दी जाएगी।
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दाखिला न मिलने पर शिक्षा विभाग पर निकाली भड़ास
बच्चों के दाखिले के लिए पेरेंट्स सुबह 8 बजे ही पेरेंट्स स्कूल पहुंचने लगे थे। पूरे दिन के इंतजार के बाद जब बच्चों को दाखिला नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षा विभाग पर जमकर भड़ास निकाली।
परेंट्स को शिक्षा विभाग से चाहिए इन सवालों का जवाब
1. पास होने के लिए 33 प्रतिशत रखा गया है तो दाखिला देने में भेदभाव क्यों?
2. अगर 11वीं कक्षा में बच्चों को दाखिला नहीं मिलेगा तो उनके भविष्य का क्या होगा?
3. भले बच्चों के कम नंबर आए हैं, लेकिन वह आगे पढ़ना चाहते हैं, तो इनका इंतजाम की जिम्मेदारी किसकी?
4. चंडीगढ़ शिक्षा विभाग आखिर जिम्मेदारी से क्यों बच रहा। जो बच्चा शहर के स्कूल में नर्सरी से पढ़ रहा है, उसे 11वीं में क्यों नहीं दिखा जा रहा दाखिला?
भीषण गर्मी में सुबह 9 से शाम 7 बजे तक डटे रहे 80 टीचर्स
मंगलवार को करीब शाम 7 बजे तक स्टूडेंट्स को दाखिला दिया गया। भीषण गर्मी के बावजूद मंगलवार को शिक्षा विभाग डिप्टी डीईओ मोनिका मैनी समेत 80 टीचर्स सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक डटे रहे। बच्चों को गाइइ करने के लिए विभाग की तरफ से इस बार कई स्टॉल लगाए गए थे। ऑडिटोरियम के अंदर बच्चों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े इसके लिए हर काम के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे। बच्चों को घर के पास ही स्कूल अलॉट हो, इसको लेकर टीचर्स की तरफ से सलाह भी दी जा रही थी। हालांकि मनपसंद स्कूल में सीट न मिलने पर कई स्टूडेंट्स की तरफ से बदतमीजी की शिकायतें भी मिली हैं।
परेंट्स को शिक्षा विभाग से चाहिए इन सवालों का जवाब
1. पास होने के लिए 33 प्रतिशत रखा गया है तो दाखिला देने में भेदभाव क्यों?
2. अगर 11वीं कक्षा में बच्चों को दाखिला नहीं मिलेगा तो उनके भविष्य का क्या होगा?
3. भले बच्चों के कम नंबर आए हैं, लेकिन वह आगे पढ़ना चाहते हैं, तो इनका इंतजाम की जिम्मेदारी किसकी?
4. चंडीगढ़ शिक्षा विभाग आखिर जिम्मेदारी से क्यों बच रहा। जो बच्चा शहर के स्कूल में नर्सरी से पढ़ रहा है, उसे 11वीं में क्यों नहीं दिखा जा रहा दाखिला?
भीषण गर्मी में सुबह 9 से शाम 7 बजे तक डटे रहे 80 टीचर्स
मंगलवार को करीब शाम 7 बजे तक स्टूडेंट्स को दाखिला दिया गया। भीषण गर्मी के बावजूद मंगलवार को शिक्षा विभाग डिप्टी डीईओ मोनिका मैनी समेत 80 टीचर्स सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक डटे रहे। बच्चों को गाइइ करने के लिए विभाग की तरफ से इस बार कई स्टॉल लगाए गए थे। ऑडिटोरियम के अंदर बच्चों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े इसके लिए हर काम के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे। बच्चों को घर के पास ही स्कूल अलॉट हो, इसको लेकर टीचर्स की तरफ से सलाह भी दी जा रही थी। हालांकि मनपसंद स्कूल में सीट न मिलने पर कई स्टूडेंट्स की तरफ से बदतमीजी की शिकायतें भी मिली हैं।
अगले साल नए स्कूल खोलेंगे : बीएल शर्मा
एजुकेशन सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग पूरी कोशिश कर रहा है कि किसी भी स्टूडेंट का साल खराब न हो। शहर के विभिन्न हिस्सों में बन रहे स्कूलों को अगले साल खोल दिया जाएगा, ताकि अगले सत्र में किसी स्टूडेंट को दाखिले में समस्या न आए। इन स्कूलों में स्टॉफ की कमी को पूरा करने के लिए जल्द ही टीचर्स की भर्ती की जाएगी।
बेटियों को पढ़ने नहीं दिया जा रहा.. फिर कैसा बेटी बचाओ नारा
नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं, लेकिन यहां तो बेटियों को पढ़ने ही नहीं दिया जा रहा। मेरा 82 प्रतिशत लीवर खराब है। बीमारी का हालत में भी एक सीट के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। - महावीर प्रताप, पेरेंट्स
दाखिला के बारे में पूछने पर नहीं मिलता जवाब
सुबह साढ़े 8 बजे से बैठे हैं। यहां न पीने के पानी की सुविधा है, गर्मी बहुत ज्यादा है। दाखिला कब होगा, यह पूछने के लिए किसी अधिकारी के पास जाते हैं तो वह ठीक से बात भी नहीं करते। - बबीता, पेरेंट्स
जब दाखिला देना ही नहीं था तो बच्चों को क्यों किया पास
जब दाखिला देना ही नहीं था, तो बच्चों को पास ही क्यों किया। समझ नहीं आ रहे बेटी का क्या होगा। पहले भी दो दिन बैठ कर गए, इस बार भी दोनों दिन बैठे रहें लेकिन बेटी को दाखिला नहीं मिला। - विनिता शर्मा, पेरेंट्स
बेटियों को पढ़ने नहीं दिया जा रहा.. फिर कैसा बेटी बचाओ नारा
नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं, लेकिन यहां तो बेटियों को पढ़ने ही नहीं दिया जा रहा। मेरा 82 प्रतिशत लीवर खराब है। बीमारी का हालत में भी एक सीट के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। - महावीर प्रताप, पेरेंट्स
दाखिला के बारे में पूछने पर नहीं मिलता जवाब
सुबह साढ़े 8 बजे से बैठे हैं। यहां न पीने के पानी की सुविधा है, गर्मी बहुत ज्यादा है। दाखिला कब होगा, यह पूछने के लिए किसी अधिकारी के पास जाते हैं तो वह ठीक से बात भी नहीं करते। - बबीता, पेरेंट्स
जब दाखिला देना ही नहीं था तो बच्चों को क्यों किया पास
जब दाखिला देना ही नहीं था, तो बच्चों को पास ही क्यों किया। समझ नहीं आ रहे बेटी का क्या होगा। पहले भी दो दिन बैठ कर गए, इस बार भी दोनों दिन बैठे रहें लेकिन बेटी को दाखिला नहीं मिला। - विनिता शर्मा, पेरेंट्स