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प्रशासन सख्त, पिकनिक-फेस्ट के नाम पर पैसे वसूले तो स्कूलों की खैर नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Oct 2016 05:38 PM IST
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अफसर को ज्ञापन सौंपते हुए चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्य
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प्राइवेट स्कूल सालाना कार्यक्रम, फेस्ट और पिकनिक के नाम पर मोटी वसूली कर लेते हैं, इसे लेकर प्रशासन ने सख्त रवैया अपना लिया है। मामले को लेकर चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन (सीपीए) ने यूटी प्रशासन को लिखित शिकायत दी है। पेरेंट्स का आरोप है कि इन कार्यक्रमों के लिए स्कूल भारी भरकम पैसे वसूल रहे हैं और उसकी रसीद भी नहीं दे रहे। मामले में प्रशासन ने संबंधित स्कूलों को जल्द नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है।
शुक्रवार को सीपीए प्रेसिडेंट नितिन गोयल की अगुवाई में अभिभावकों का एक दल डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ से मिला। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्राइवेट स्कूल सालाना कार्यक्रम, फेस्ट, पिकनिक और अन्य कार्यक्रमों के लिए 500 से 2 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, लेकिन संबंधित स्कूल पैसे लेने का कोई सुबूत भी नहीं दे रहे। सीपीए मेंबर पूनम कौशिक ने आरोप लगाया कि प्राइवेट स्कूल कार्यक्रम का बजट अपने स्तर पर खुद बढ़ा लेते हैं और उसका बोझ अभिभावकों पर डालते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूलों द्वारा पैसे की कोई रसीद भी नहीं दी जाती। सबीना खान ने कहा कि अधिकतर अभिभावक स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को तंग करने के डर के कारण कोई सवाल भी नहीं उठाते। गुरप्रीत कौर ने कहा कि कई स्कूल पैसा इक्कठा करने के नाम पर सालाना कार्यक्रम के लिए दूसरे स्कूलों में महंगे दाम पर ऑडिटोरियम बुक करवाते हैं। कई स्कूलों द्वारा कल्चरल इवेंट की तैयारी के लिए महंगे कोरियोग्राफ की सेवाएं ली जा रही हैं।
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नितिन गोयल ने बताया कि डीएसई ने माना कि स्कूलों को अभिभावकों द्वारा दिए गए सभी पैसों की जानकारी देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मनमाने ढंग से पैसे लेने वाले स्कूलों को नोटिस जारी किया जाएगा।
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शुक्रवार को सीपीए प्रेसिडेंट नितिन गोयल की अगुवाई में अभिभावकों का एक दल डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ से मिला। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्राइवेट स्कूल सालाना कार्यक्रम, फेस्ट, पिकनिक और अन्य कार्यक्रमों के लिए 500 से 2 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, लेकिन संबंधित स्कूल पैसे लेने का कोई सुबूत भी नहीं दे रहे। सीपीए मेंबर पूनम कौशिक ने आरोप लगाया कि प्राइवेट स्कूल कार्यक्रम का बजट अपने स्तर पर खुद बढ़ा लेते हैं और उसका बोझ अभिभावकों पर डालते हैं।
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उन्होंने कहा कि स्कूलों द्वारा पैसे की कोई रसीद भी नहीं दी जाती। सबीना खान ने कहा कि अधिकतर अभिभावक स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को तंग करने के डर के कारण कोई सवाल भी नहीं उठाते। गुरप्रीत कौर ने कहा कि कई स्कूल पैसा इक्कठा करने के नाम पर सालाना कार्यक्रम के लिए दूसरे स्कूलों में महंगे दाम पर ऑडिटोरियम बुक करवाते हैं। कई स्कूलों द्वारा कल्चरल इवेंट की तैयारी के लिए महंगे कोरियोग्राफ की सेवाएं ली जा रही हैं।
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नितिन गोयल ने बताया कि डीएसई ने माना कि स्कूलों को अभिभावकों द्वारा दिए गए सभी पैसों की जानकारी देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मनमाने ढंग से पैसे लेने वाले स्कूलों को नोटिस जारी किया जाएगा।