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पंजाब यूनिवर्सिटी की पहल: ई-कचरा प्रबंधन के लिए तैयार होगी युवाओं की फौज, 14 दिन मिलेगा एक युवा को प्रशिक्षण

Fri, 16 Jul 2021 10:39 AM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 16 Jul 2021 10:39 AM IST
सार

पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विशाल शर्मा, डॉ. अमित चौधरी और भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. मनीष शर्मा को केंद्र सरकार ने यह प्रोजेक्ट दिया है। इसके लिए 2.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस बजट से युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। 14 दिन का यह प्रशिक्षण होगा। सात दिन पीयू अपने यहां प्रशिक्षण देगी और सात दिन उद्योगों में जाकर यह प्रशिक्षण लेंगे।

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Chandigarh: Panjab University will Train Students for E Garbage Management
पीयू देगी ई कचरा प्रबंधन की ट्रेनिंग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार जल्द ही चक्रीय अर्थव्यवस्था कानून (जहां से जिस उत्पाद की शुरूआत हुई उसका उसी कंपनी के पास वापस आना) लाने की योजना बना रही है। इसके तहत कंप्यूटर टीवी, मोबाइल समेत 21 उत्पाद बनाने वाली कंपनियां उपकरणों की आयु की पूरी होने पर उसे वापस लेकर उन्हें रिसाइकिल या उसका प्रबंधन करेंगी। इस कार्य के लिए लोगों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी। 

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इसी को देखते हुए सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी को जिम्मा सौंपा है, जो युवाओं की फौज तैयार करेगी। उनका कार्य ई-कचरा प्रबंधन करना रहेगा। लाखों युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। प्रथम चरण में ई-कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण इंटरमीडियट पास करने वाले छात्रों को मिलेगा या इंजीनियरिंग के छात्रों को, यह तय होना बाकी है। 14 दिन का यह प्रशिक्षण पूरी तरह मुफ्त होगा। माना जा रहा है कि पीयू के प्रयास से देशभर में ई-कचरे के ढेर कम होंगे।
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ई-कचरे के मामले में दुनिया में भारत चौथे स्थान पर है। लगातार इसके ढेर बढ़ रहे हैं। अभी ई-कचरा कबाड़ियों के पास बड़ी संख्या में पहुंच रहा है। वह ई-कचरा प्रबंधन में कुशल न होने के कारण उनको तोड़ते हैं या जलाते हैं। उनमें मैटल्स आदि निकलता है। जलने से उत्पन्न होने वाले धुएं से कैंसर हो रहा है। पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विशाल कहते हैं कि सर्वे के मुताबिक 40 से 44 साल तक के लोग इस कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। नदियों आदि में ई-कचरे को फेंकने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। साथ ही जलीय जीवों का जीवन खतरे में है। इस तरह ई-कचरे का निस्तारण न होने से यह लगातार सिरदर्द बन रहा है। इसी को देखते हुए सरकार कानून लाने की तैयारी कर रही है।

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ऐसे होगा प्रशिक्षण

पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विशाल शर्मा, डॉ. अमित चौधरी और भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. मनीष शर्मा को केंद्र सरकार ने यह प्रोजेक्ट दिया है। इसके लिए 2.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस बजट से युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। 14 दिन का यह प्रशिक्षण होगा। सात दिन पीयू अपने यहां प्रशिक्षण देगी और सात दिन उद्योगों में जाकर यह प्रशिक्षण लेंगे। माना जा रहा है कि पीयू हजारों युवाओं को दो साल में प्रशिक्षित कर देगी। एक बैच में 80 से 100 युवाओं को लिया जाएगा। हालांकि इसके लिए सीटें व योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। पूरी गाइडलाइन पीयू की ओर से बनाई जानी हैं। इसके समन्वयक यूआईईटी के डॉ. नरेश कुमार रहेंगे।

प्रशिक्षित युवा बनेंगे एंटरप्रेन्योर
पीयू का मानना है कि यहां प्रशिक्षण पाने वाले युवा एंटरप्रेन्योर बन सकेंगे। वह स्टार्टअप आदि शुरू करके अन्य युवाओं को नौकरी दे सकेंगे। स्टार्टअप शुरू करने के लिए बाकायदा सरकार की ओर से पीयू मदद करवाएगी। ई-कचरा निस्तारण के लिए अलग से बाजार भी बन सकेंगे। इस तरह यह एक बड़ी योजना है।

ई-कचरा प्रबंधन पर युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके जरिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। प्रशिक्षण किन युवाओं को मिलेगा, उसके लिए गाइडलाइन बनाई जा रही है। अभी सीटों की संख्या से लेकर योग्यता तक तय होना बाकी है।  - डॉ. विशाल शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूआईईटी पीयू

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