बीएससी ऑनर्स एडमिशन के लिए जारी पंजाब विश्वविद्यालय की मेरिट जांच लिस्ट विवादों में
- राज्य बोर्ड से 12वीं करने वाले छात्रों के दाखिले आसानी से होंगे, सीबीएसई वाले छात्रों को नुकसान
- छात्रों का आरोप- राज्य बोर्ड ने कुछ विषयों के अंकों के आधार पर छात्रों को दे दिए इंटरमीडिएट में बेहतर अंक
- सीबीएसई के छात्रों की हुईं थी सभी परीक्षाएं, उनकी मेरिट राज्य बोर्ड के छात्रों से कम रही
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पंजाब यूनिवर्सिटी से बीएससी ऑनर्स अधिकांश वही छात्र कर पाएंगे जिन्होंने राज्य बोर्ड से इंटरमीडिएट की होगी, क्योंकि उनकी मेरिट अधिक आई है। सीबीएसई के छात्र इस एडमिशन में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। बुधवार को पीयू ने बीएससी ऑनर्स की मेरिट जांच लिस्ट (टेंटेटिव मेरिट) वेबसाइट पर जारी कर दी है। सूची देखते ही छात्र हैरत में पड़ गए।
उन्होंने पीयू की मेरिट व्यवस्था पर तमाम सवाल खड़े कर दिए और इस सूची को विवादों में ला दिया। मांग उठी है कि मेरिट लिस्ट का आधार बदला जाए। उन्होंने पीयू के अधिकारियों व संबंधित वेबसाइट पर कड़ी आपत्तियां दायर की हैं। कहा है कि पीयू ने एडमिशन का आधार नहीं बदला तो इस विषय में होशियार विद्यार्थी दाखिला लेने में बहुत पीछे रह जाएंगे। हालांकि पीयू के पास आपत्तियां पहुंचने पर उनका निपटारा किया जाएगा।
पीयू के बीएससी ऑनर्स में बॉटनी, जूलॉजी, बी फार्मेसी, भौतिक विज्ञान आदि विषय आते हैं। इनमें दाखिले के लिए पीयू हर साल सीईटी का पेपर लेता आया है लेकिन इस बार मेरिट के आधार पर दाखिले लिए जा रहे हैं। सीईटी का पेपर लिए बिना ही पीयू ने सभी छात्रों को एक समान मानते हुए सभी को 75 फीसदी अंक दिए हैं और इंटर के 25 फीसदी अंक जोड़े गए हैं।
इसके आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर दी गई। टेंटेटिव मेरिट में 4266 छात्रों को रखा गया है। छात्र वंशज गोयल को सर्वाधिक अंक मिले हैं। उनकी मेरिट 99.66 फीसदी है। जशनजीत कौर, मोक्क्षा की भी मेरिट वंशज के बराबर ही रही है। टॉप 100 छात्रों की मेरिट 99 फीसदी रही है। मेरिट काफी अधिक पहुंची है। इससे तमाम छात्र एडमिशन से वंचित रह सकते हैं।
ये हैं छात्रों की आपत्तियां
पंजाब के नवांशहर की छात्रा प्राची, मीनाक्षी, छात्र विवेक शर्मा, मयंक आदि ने आपत्तियां दायर की हैं। उन्होंने कहा है कि वह सीबीएसई की सभी परीक्षाएं देकर यहां पहुंचे हैं। उनकी 12वीं में 90 से 92 फीसदी अंक आए हैं जबकि राज्य बोर्ड से इंटर करने वाले विद्यार्थियों को 95 से अधिक अंक इंटर में मिले हैं।
इन विद्यार्थियों ने कुछ ही पेपर दिए थे लेकिन कोरोना के कारण उन पेपरों के अंकों के आधार पर ही अन्य पेपरों के अंक दे दिए गए और प्रमोट कर दिया गया। इससे उनके अंक अधिक आए। पीयू ने इंटरमीडिएट में 25 फीसदी नंबर मेरिट में लिए हैं। ऐसे में सीबीएसई के छात्रों को नुकसान हो गया।
उन्होंने कहा है कि जो छात्र इंटरमीडिएट में प्रमोट हुए हैं उनमें से कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने दसवीं में 70 से 80 फीसदी अंक पाए हैं जबकि सीबीएससी वाले छात्रों की दसवीं की मेरिट 90 फीसदी से अधिक रही। छात्रों ने कहा है कि सीईटी बिना करवाए ही उसके अंक मेरिट में न जोड़े जाएं। दसवीं व 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिला दें। इस व्यवस्था से हजारों छात्रों को नुकसान होगा।
प्रोफेसरों के बच्चों के दाखिले भी नहीं हो पाएंगे
कुछ प्रोफेसर्स ने भी मेरिट के लिए बनाए गए आधार पर सवाल खड़े किए हैं। उनके बच्चों के दाखिले इस व्यवस्था से नहीं हो पा रहे हैं जबकि सीबीएसई बोर्ड से इंटर में उन्हें 90 से लेकर 93 फीसदी अंक मिले हैं। पीयू में यह मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मेरिट का आधार तय करने वालों पर तमाम सवाल खड़े हो गए हैं।
यह भी कहा है कि जब परीक्षाएं देशभर में आयोजित की जा रही हैं तो पीयू को भी करनी चाहिए थी। मालूम हो कि यूआईएलएस में दाखिला लेने का प्रकरण हाईकोर्ट पहुंच गया है। उन्होंने भी मेरिट के आधार पर चयन पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि वहां भी होशियार बच्चे पीछे छूट जाएंगे और सीधे प्रमोट हुए छात्रों को लाभ मिलेगा। यहां प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की मांग उठाई गई है।