फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   chandigarh govt schools ground report, reality very horrible

मोदी जी! देखिए क्या ऐसे स्कूल नौनिहालों का भविष्य स्वर्णिम बनाएंगे?

Sun, 12 Nov 2017 03:21 PM IST
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Nov 2017 03:21 PM IST
विज्ञापन
chandigarh govt schools ground report, reality very horrible
सरकारी स्कूल
देश के नौनिहालों का भविष्य सुनहरा बनाना सरकार की अहम जिम्मेदारी है, लेकिन हकीकत तो इससे काफी परे हैं। क्या ऐसे स्कूलों से बच्चों का फ्यूचर बनेगा। चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग ने जहां टॉप मॉडल स्कूलों को सुधारने और उनकी देखरेख करने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं, वहीं देहात या कालोनियों में खुले सरकारी स्कूलों के साथ पूरा भेदभाव किया है।
विज्ञापन


अमर उजाला टीम की ओर से चार स्कूलों की ग्राउंड रिपोर्ट जांची गई। इसमें यह बात सामने आई है कि सेक्टर के स्कूलों की सुविधा ठीक है, वहीं, कालोनी के स्कूलों की हालात बदतर है। मॉडल स्कूलों में स्टूडेंट्स को खेल के मैदान, टॉयलेट, नियमों के पालन की गाइडलाइन साफ तौर पर लिखी गई है।
विज्ञापन


वहीं, सरकारी स्कूलों में पाया गया कि वहां के टॉयलेट बदबूदार गंदगी से भरे हैं। खेलों के मैदान भी खराब हैं। दीवार पर लिखी हिदायतें भी मिट रही हैं। स्कूलों में प्रार्थना करने की लाइन में भी मुश्किल से लगना पड़ रहा है। इस कारण स्टूडेंट्स को परेशानी हो रही है। वहीं कालोनी के स्कूल बच्चों से भरे पड़े हैं। ऐसे में बच्चे कैसी शिक्षा ले रहे हैं, आसानी से समझा जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हल्लोमाजरा स्कूल तीन जगह चल रहा, खेल के मैदान भी नहीं

chandigarh govt schools ground report, reality very horrible
govt school building
गवर्नमेंट हाईस्कूल हल्लोमाजरा तीन बिल्डिंग में चल रहा है। यहां पर पहला स्कूल अस्थायी तौर पर बनाई गई टीन की छत में है। यह दो शिफ्ट में चलता है। यहां पर स्टूडेंट्स के टॉयलेट टूटे हुए हैं। बच्चों की गाइडलाइन के लिखे स्लोगन वाले दीवार पर डाली गई चादर फटी हुई है। वहीं यहां पर पानी केलिए केवल एक वाटर कूलर लगाया है। वह भी खराब है। वहीं दूसरा स्कूल हल्लोमाजरा डिस्पेंसरी के अंदर पुरानी बिल्डिंग में है। यहां पर भी दीवारें जर्जर हालत में टूटी हुई हैं।

यहां के स्टूडेंट्स को खेलने के लिए मैदान नहीं है। वहीं गवर्नमेंट स्कूल हल्लोमाजरा के अंदर कालोनी में चल रहा है। यहां पर भी स्टूडेंट्स दरी टाट पर बैठे मिले। स्टूडेंट्स के टॉयलेट यहां पर साफ नहीं है। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन कैसे मिलेगी। वहीं 66 टीचर के भरोसे तीन हजार स्टूडेंट्स तीनों स्कूलों में पढ़ते हैं। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स कैसे पढे़ंगे यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। इनके दो स्कूलों में कंप्यूटर क्लास नहीं है।

वहीं हल्लोमाजरा के अंदर एक स्कूल में केवल दस कंप्यूटर रखे हैं। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स को कंप्यूटर क्लास में प्रैक्टिकल भी नहीं मिल पाता है। हल्लोमाजरा में खेल मैदान भी नहीं हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को खेल कूद के लिए सामान भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। गवर्नमेंट हाईस्कूल के हेड मास्टर साधू राम ने बताया कि सभी व्यवस्थाओं की जानकारी शिक्षा विभाग को दी गई है।

वहीं गवर्नमेंट हाईस्कूल किशनगढ़ का भी यही हाल बना हुआ है। यहां पर भी स्टूडेंट्स के खेल का मैदान नहीं है। वहीं बाउंड्री वॉल भी छोटी है। पुलिस का बीट बॉक्स बना है लेकिन यह भी नहीं खुलता है।

यह पाई गई है स्कूल में खामियां

chandigarh govt schools ground report, reality very horrible
प्राइमरी पाठशाला - फोटो : अमर उजाला
गवर्नमेंट स्कूल कालोनी नंबर चार लाइव
कालोनी नंबर चार स्थित गवर्नमेंट हाईस्कूल का दौरा किया गया। यहां पाया गया कि खेल का मैदान स्कूल में नहीं है। यहां पर प्रार्थना के लिए स्टूडेंट्स लंबी लाइन में लगते है। यहां पर कुल स्टूडेंट्स को खड़े होने के लिए जगह नहीं है। वहीं स्कूल में क्लास रूम की कमी के कारण बरामदे में बेंच लगाकर स्टूडेंट्स को पढ़ाया जा रहा है। यह स्कूल दो शिफ्ट में चलता है। यहां पर 2800 स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। पहली शिफ्ट के बाद स्कूल की सफाई होती है। तक दूसरी शिफ्ट के स्टूडेंट्स को इंट्री दी जाती है। यहां पर टॉयलेट की संख्या भी कम है। इस कारण कई बार यहां पर बदबूदार गंदगी बनी रहती है। यहां की प्रिंसिपल सरबिंदर कौर 31 अक्तूबर को रिटायर हो चुकी है। इसे भी शिक्षा विभाग ने रेगुलर तौर पर नहीं भरा है।

मॉडल स्कूलों में दुरुस्त मिली व्यवस्था
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-28 में स्टूडेंट्स केखेलने केलिए बेहतर प्ले ग्राउंड , स्कूल गार्डन, इंस्ट्रक्शन बोर्ड ठीक दिखे। वहीं यहां पर कंप्यूटर लैब भी बेहतरीन बनी रही। जीएमएसएसएस- 28 के प्रिंसिपल राकेश सूद ने बताया कि मॉडल स्कूल की सुविधा के लिहाज से स्कूल फीट है। यहां पर खेल के मैदान, स्टूडेंट्स के लिए इंस्ट्रक्शन बोर्ड ठीक है। स्कूल डबल शिफ्ट में चलाते हैं। यहां पर 1400 स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।

यह कहते हैं एक्टिविस्ट
- शिक्षा विभाग अपने स्कूलों के साथ दोहरा मापदंड अपना रहा है। अगर वह स्कूलों की व्यवस्था को दुरुस्त करेगा तभी क्वालिटी एजूकेशन स्टूडेंट्स को मिलेगी। शिक्षा विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए नहीं तो कालोनियों और गांवों में बेहतरीन स्टूडेंट्स नहीं होंगे।
 स्वर्ण सिंह कंबोज, प्रेसीडेंट, यूटी कैडर एजुकेशन इंप्लाइज यूनियन

 शिक्षा विभाग सभी स्कूलों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास कर रहा है। हमें पूरी जानकारी है। हम अगले नए सेशन से कुछ स्कूल और शुरू करेंगे जिसके बाद स्टूडेंट्स को खेल के मैदान, बेहतर टॉयलेट और अन्य सुविधाएं मिलेगी। शिक्षा विभाग अपने काम की ओर अग्रसर है।
 रुबिंदर जीत सिंह बराड़, डीएसई, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed