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शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल : परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को स्कूल बुलाया, शिक्षकों को अन्य कामों में लगा दिया 

Mon, 08 Mar 2021 04:18 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 08 Mar 2021 04:18 PM IST
सार

  • चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल 
  • दसवीं और बारहवीं के छात्रों को बोर्ड की तैयारी के लिए बुलाया जा रहा स्कूल 
  • शिक्षकों को किया शैक्षणिक कार्यों के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त 

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Chandigarh education department called students to school, involved teachers in other work
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ दसवीं और बारहवीं के छात्रों को बोर्ड की तैयारी के लिए स्कूल बुलाया जा रहा है। दूसरी तरफ शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त कर रखा है। शिक्षकों को इस महीने चाइल्ड मैंपिग, मिड-डे मील में ड्यूटी के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में वे बच्चों को पढ़ा नहीं पा रहे हैं। 

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शहर के सरकारी स्कूलों में मार्च 2020 से लगभग हर महीने लगातार शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बहुत सारे स्कूलों में वर्तमान में स्कूल प्रमुखों के भी पद खाली पड़े हैं। इस मामले में शिक्षा सचिव सरप्रीत सिंह गिल से बात करने पर उन्होंने कहा कि मैं व्यस्त चल रहा हूं, इस बारे में जानकारी नहीं है। इस महीने की 15 तारीख से नौवीं और ग्यारहवीं की ऑफलाइन परीक्षा भी शुरू हो रही है।
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शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को 25 फरवरी से 12 मार्च तक घरों में जाकर चाइल्ड मैपिंग सर्वे करना है। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर विभाग को जमा करवानी है। इसके साथ ही 1 दिसंबर, 2020 से 28 फरवरी तक तीन महीने के मिड डे मील का राशन आठवीं तक के बच्चों के अभिभावकों को बांटा जाएगा। 

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शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार इसी समय अवधि में विद्यार्थियों को पीसा रीडिंग चैंलेज की गतिविधि करवानी है। इसमें सातवीं से लेकर 11वीं तक के सभी विद्यार्थियों को शामिल करवाना है। महिला दिवस को समर्पित एक हफ्ते की गतिविधियां आयोजित करवानी है। बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट की गतिविधियों में विद्यार्थियों को शामिल करवाना है। परीक्षा पर चर्चा में 14 मार्च तक विद्यार्थियों को आवेदन करवाना है। 

सरकारी स्कूल के शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय इन्हीं सब गतिविधियों में ही अपनी जिम्मेदारी निभाने को मजबूर है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है। कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि व्यस्त शेड्यूल के चलते बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 

विद्यार्थियों को पढ़ाने के बजाय अन्य कामों में शिक्षकों को लगाया 
मार्च विद्यार्थियों के शैक्षणिक कार्यों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की पढ़ाई को अनदेखा करते हुए शिक्षकों की ड्यूटी अन्य कामों में लगा रखी है। बहुत सारी गतिविधियां मार्च में ही करवानी है, जबकि ये सब काम विभाग स्थगित कर बाद में भी करवा सकता है। - स्वर्ण सिंह कंबोज, अध्यक्ष, यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज

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