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पुटा के चुनावी घोषणा पत्रों से गायब हुआ केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा, इस बार चर्चा तक नहीं

Mon, 21 Sep 2020 11:31 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 21 Sep 2020 11:31 AM IST
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Central University Issue Missed from Manifesto of Puta
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिशन(पुटा) के घोषणा पत्र से इस बार पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का मुद्दा गायब है। एक ग्रुप ने घोषणा पत्र जारी कर दिया है। उसमें इसका थोड़ा ही जिक्र है। हालांकि वह यह मुद्दा उठाते रहेंगे। वहीं दूसरे ग्रुप ने घोषणा पत्र अभी जारी नहीं किया है।
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उनकी ओर से प्रचार के दौरान दिए जा रहे पंफलेट में यह मुद्दा कहीं भी नजर नहीं आ रहा है, जबकि पीयू की 90 फीसदी समस्याओं का एक ही इलाज है पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाए। पीयू केंद्रीय विश्वविद्यालय बनता है तो यहां संसाधनों की कमी नहीं रहेगी और सातवां वेतनमान का लाभ तुरंत मिलना शुरू हो जाएगा।
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इस दिशा में कदम शिक्षकों को उठाना होगा। उसके बाद पीयू प्रशासन पर दबाव बनाकर केंद्र सरकार को जगाया जाए। पीयू के पास प्लस प्वाइंट यह है कि केंद्र सरकार पीयू को सालाना 250 करोड़ रुपये से अधिक देती है जो वेतन के काम आता है। हालांकि पहले शिक्षकों की ओर से इस मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन आदि किया गया है। इस मुद्दे को फिर से उठाने की जरूरत है।
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क्या कहते हैं शिक्षक

पीयू का भविष्य दो ही बिंदुओं पर टिका है। एक तो इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाए और दूसरा इसका गवर्नेंस रिफॉर्म हो। यह होने के बाद तमाम समस्याओं का समाधान स्वत: ही हो जाएगा। आए दिन लगाए जाने वाले आरोप-प्रत्यारोप खत्म हो जाएंगे और संसाधनों की कमी नहीं होगी। इस दिशा में शिक्षकों ने पहले भी कदम उठाए हैं और कोशिश होगी कि आगे भी उठाए जाएंगे।
- प्रो. अक्षय कुमार, पुटा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षक

पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा नंबर- 1 पर होता था
पुटा चुनाव में इस वर्ष पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का मुद्दा प्रमुखता नहीं पा रहा है। पहले कम से कम हर चुनाव में शिक्षक नेताओं के घोषणा पत्र में यह मुद्दा नंबर- 1 पर होता था। एक घोषणा पत्र तो आ ही चुका है, जिसमें कुछ ही जिक्र किया गया है। दूसरे का अभी इंतजार है। क्या इसे मृत मुद्दा मान लिया जाए या फिर कोई और वजह है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारे विश्वविद्यालय की समस्याओं का स्थाई समाधान केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने से ही हो सकता है।
- डॉ. गुरमीत सिंह, अध्यक्ष हिंदी विभाग
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