चंडीगढ़ः पीयू को करारा झटका, केंद्र ने डेवलपमेंट के लिए अतिरिक्त ग्रांट देने से किया मना
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पंजाब यूनिवर्सिटी की उम्मीदों को करारा झटका देते हुए केंद्र सरकार ने ग्रांट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। अपने जवाब में केंद्र ने कहा कि पीयू न तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और ना ही सेंट्रली फंडिड यूनिवर्सिटी। यह इंटर स्टेट बॉडी कॉर्पोरेट है। ऐसे में पीयू की 207.80 करोड़ रुपये की वार्षिकी बढ़ाई नहीं जा सकती। हालांकि इसमें हर वर्ष 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी।
हलफनामे में बताया गया कि पीयू के शिक्षकों का पे स्केल पंजाब सरकार के पे स्केल की प्रोविजन के बाद ही रिवाइज किया जा सकता है। पीयू को वर्ष 2017 -18 वित्त वर्ष में 207.80 करोड़ की सैलरी ग्रांट जारी की गयी थी, जिसमें आगामी वर्षों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी किये जाने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट ने पीयू की मौजूदा वित्तीय स्थिति की जानकारी मांगी थी।
जिसके जवाब में पीयू के रजिस्ट्रार ने बताया था कि हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद केंद्र सरकार ने पीयू की वार्षिक ग्रांट को बढ़ा कर 207.8 करोड़ कर दिया है और पंजाब सरकार जो अब तक पीयू को 20 करोड़ रुपये देकर अपना पीछा छुड़ाती रही थी उसने भी पीयू की ग्रांट 27 करोड़ कर दी है।
केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा पीयू की ग्रांट बढ़ाये जाने से हालात में तो काफी सुधार हुआ है, लेकिन पीयू जैसी यूनिवर्सिटी के लिए अभी भी यह नाकाफी है। हाईकोर्ट को बताया गया था कि पीयू को फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से 207.8 करोड़ मिल रहे हैं जबकि पीयू का खर्च वर्ष 2018-19 में बढ़ कर 220.27 करोड़ तो वर्ष 2019-20 में बढ़कर 233.49 करोड़ हो जायेगा।
हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार देश की सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज को विकास कार्यों के लिए अलग से ग्रांट जारी करती है। लेकिन यह ग्रांट पीयू को नहीं दी जा रही है। इसके अलावा पीयू ने विकास कार्यों के लिए 282.57 करोड़ की अलग से ग्रांट की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था।
अब यह रास्ता बचा
पंजाब यूनिवर्सिटी अपनी आय बढ़ाने के लिए हर कक्षा की सीटें बढ़ाने जा रहा है। साथ ही दो दर्जन से अधिक कोर्सेज शुरू किए जाएंगे। माना जा रहा है इस व्यवस्था से दस से 20 करोड़ रुपये सालाना आएंगे। इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज की भी फीस बढ़ाई जा सकती है। सबसे बड़ी दिक्कत पीयू के समक्ष विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की आ रही है।
माना जा रहा है कि पीयू फिर से एमएचआरडी के माध्यम से केंद्र के खजाने तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इसके लिए वीसी प्रो. राजकुमार भी प्रयास में लगे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि प्लान यह भी बना है कि कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों से भी मदद ली जाएगी। साथ ही रिसर्च के जरिये भी एजेंसियों से फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है।
शिक्षा को आगे बढ़ाना है और विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर करना है तो सरकार को पैसे देने होंगे। अगर पीयू के लिए रकम नहीं है तो फिर छोटे छोटे विश्वविद्यालय खोलकर कोई फायदा नहीं है। पीयू बड़ी यूनिवर्सिटी है और इसे आगे बढ़ाना चाहिए। -दीपक कौशिक, सीनेट सदस्य एवं अध्यक्ष, पीयू इम्प्लाइज यूनियन
कोर्ट में फंडिंग को लेकर मामला तो चल रहा है लेकिन इसका नोटिफिकेशन अभी मुझे नहीं मिला है। जब यह मिलेगा तभी उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा। -प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू