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सीबीएसई एग्जामः अभिभावकों ने की दोबारा पेपर कराने की मांग, नियमों के आगे बेबस दिखे अफसर
Thu, 07 Mar 2019 12:24 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 07 Mar 2019 12:24 PM IST
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सीबीएसई एग्जाम पेपर
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चंडीगढ़ में मंगलवार को सिर्फ 3 मिनट की देरी से पहुंचने वाले छात्र अपने भविष्य को लेकर अभी भी असमंजस में हैं। वहीं उनके अभिभावक छूटी परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में बुधवार को यूटी शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से लेकर प्रिंसिपल एवं शिक्षकों के बीच चर्चा खूब रही। किसी ने छात्रों को परीक्षा में एंट्री दे देने की बात की तो किसी ने कहा नियम के अनुसार हर बच्चे को समय से पहले ही सेंटर पर पहुंचना चाहिए।
हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी व प्रिंसिपल सीबीएसई के नियमों के आगे खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। लेट होने की वजह से पेपर नहीं दे पाने की घटनाओं पर शिक्षा सचिव बीएल शर्मा ने कहा कि लेट होने की वजह से छात्रों का साल नहीं खराब चाहिए, लेकिन सीबीएसई के अपने नियम हैं, जिन्हें बच्चों को फॉलो करने चाहिए। पैरेंट्स को समझना चाहिए कि इस वक्त बच्चों की परीक्षा से जरूरी उनके लिए क्या है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए सीबीएसई ने इस बार कड़े नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना चाहिए और सेंटर पर समय से पहले पहुंचना चाहिए।
अकाउंटेंसी पेपर में उलझे विद्यार्थी
सीबीएसई की बुधवार को बारहवीं कक्षा की अकाउंटेंसी की परीक्षा हुई। कॉमर्स के इस पेपर ने अधिकतर विद्यार्थियों को उलझा दिया। पेपर में कुछ प्रश्न गलत छपे थे तो कुछ प्रश्नों के ट्रिकी उत्तर होने का कारण विद्यार्थियों को समय लगा। छात्रों की मानें तो वैसे तो पेपर आसान था, लेकिन प्रश्नपत्र में दिए गए प्रश्न नंबर-15 में गड़बड़ी होने के चलते छात्रों को उसे छोड़ना पड़ा। यह प्रश्न छह नंबर का था। छात्रों ने बताया कि प्रश्नपत्र के 15वें प्रश्न के लिए दो बैंलेस शीट्स दी गई थीं, लेकिन दोनों ही बैलेंस शीट्स 2018 की थी।
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जब इस विषय में एक्सपर्ट से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पेपर नंबर 15 में थोड़ी गड़बड़ी जरूर थी। पेपर में दो बैलेंस शीट्स की जरूरत थी, एक पिछले वर्ष की और एक वर्तमान वर्ष की। पेपर में दोनों ही बैंलेंस शीट्स एक ही वर्ष की दे दी गई थी। जिसमें छात्र एक ही काम कर सकते थे। पेपर में जो मिस प्रिंटिंग हुई है उसे लेकर सीबीएसई को छात्रों को ग्रेस मार्क्स जरूर देने चाहिए।
सीबीएसई के अपने फीडबैक मैकेनिजम हैं जिनके जरिए सारी जानकारी अपने आप सीबीएसई तक पहुंच जाती है। छात्र अपने हुए पेपर को भूलकर अगले पेपर की तैयारी करें। कुछ भी गलत आया होगा तो सीबीएसई खुद जांच कर फैसला करता है।
- रीमा दीवान, सिटी कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई
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हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी व प्रिंसिपल सीबीएसई के नियमों के आगे खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। लेट होने की वजह से पेपर नहीं दे पाने की घटनाओं पर शिक्षा सचिव बीएल शर्मा ने कहा कि लेट होने की वजह से छात्रों का साल नहीं खराब चाहिए, लेकिन सीबीएसई के अपने नियम हैं, जिन्हें बच्चों को फॉलो करने चाहिए। पैरेंट्स को समझना चाहिए कि इस वक्त बच्चों की परीक्षा से जरूरी उनके लिए क्या है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए सीबीएसई ने इस बार कड़े नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना चाहिए और सेंटर पर समय से पहले पहुंचना चाहिए।
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अकाउंटेंसी पेपर में उलझे विद्यार्थी
सीबीएसई की बुधवार को बारहवीं कक्षा की अकाउंटेंसी की परीक्षा हुई। कॉमर्स के इस पेपर ने अधिकतर विद्यार्थियों को उलझा दिया। पेपर में कुछ प्रश्न गलत छपे थे तो कुछ प्रश्नों के ट्रिकी उत्तर होने का कारण विद्यार्थियों को समय लगा। छात्रों की मानें तो वैसे तो पेपर आसान था, लेकिन प्रश्नपत्र में दिए गए प्रश्न नंबर-15 में गड़बड़ी होने के चलते छात्रों को उसे छोड़ना पड़ा। यह प्रश्न छह नंबर का था। छात्रों ने बताया कि प्रश्नपत्र के 15वें प्रश्न के लिए दो बैंलेस शीट्स दी गई थीं, लेकिन दोनों ही बैलेंस शीट्स 2018 की थी।
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जब इस विषय में एक्सपर्ट से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पेपर नंबर 15 में थोड़ी गड़बड़ी जरूर थी। पेपर में दो बैलेंस शीट्स की जरूरत थी, एक पिछले वर्ष की और एक वर्तमान वर्ष की। पेपर में दोनों ही बैंलेंस शीट्स एक ही वर्ष की दे दी गई थी। जिसमें छात्र एक ही काम कर सकते थे। पेपर में जो मिस प्रिंटिंग हुई है उसे लेकर सीबीएसई को छात्रों को ग्रेस मार्क्स जरूर देने चाहिए।
सीबीएसई के अपने फीडबैक मैकेनिजम हैं जिनके जरिए सारी जानकारी अपने आप सीबीएसई तक पहुंच जाती है। छात्र अपने हुए पेपर को भूलकर अगले पेपर की तैयारी करें। कुछ भी गलत आया होगा तो सीबीएसई खुद जांच कर फैसला करता है।
- रीमा दीवान, सिटी कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई