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फीस नहीं भर सकते, पर कोचिंग की जरूरत है तो 15 जनवरी तक करें आवेदन, मुफ्त में मिलेगी
Sat, 28 Dec 2019 02:20 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 28 Dec 2019 02:20 PM IST
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सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के सशक्तिकरण के लिए भाई जैता जी फाउंडेशन इस बार मुफ्त कोचिंग के लिए 45 बच्चों का बैच शुरु कर रही है। इसके लिए बच्चे 15 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। अब तक कुल 107 बच्चे मुफ्त कोचिंग ले चुके हैं, जिनमें से 97 बच्चे प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे हैं।
यह बात फाउंडेशन के मैनेजिंग फाउंडर हरपाल सिंह ने सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने बताया कि 2014 में उन्होंने सेक्टर-28 में कोचिंग देनी शुरू की थी। हर साल 20 बच्चों का बैच दो साल के लिए बनाया जाता था। इसमें केवल उन बच्चों को लिया जाता है जो पंजाब निवासी हों और जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन और पारिवारिक आय 25 हजार रुपये प्रति माह से कम है। चिन्हित करने के बाद बच्चों का लिखित टेस्ट लिया जाता है। बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ रहना खाना भी मुफ्त दिया जाता है।
पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर और फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. बीएनएस वालिया ने कहा कि बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ समाज के प्रति उनके कर्तव्यों को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जो बच्चे कामयाबी हासिल कर चुके हैं वह समाज के लिए अपनी कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा दे रहे हैं। उन्होेंने बताया कि हर साल शिक्षा पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह संस्था पंजाब के 12 जिले कवर चुकी है और अब तक इन जिलों के कमजोर वर्ग के 700 बच्चों को शिक्षा देकर वह नवोदय विद्यालय भेज चुके हैं।
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यह बात फाउंडेशन के मैनेजिंग फाउंडर हरपाल सिंह ने सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने बताया कि 2014 में उन्होंने सेक्टर-28 में कोचिंग देनी शुरू की थी। हर साल 20 बच्चों का बैच दो साल के लिए बनाया जाता था। इसमें केवल उन बच्चों को लिया जाता है जो पंजाब निवासी हों और जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन और पारिवारिक आय 25 हजार रुपये प्रति माह से कम है। चिन्हित करने के बाद बच्चों का लिखित टेस्ट लिया जाता है। बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ रहना खाना भी मुफ्त दिया जाता है।
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पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर और फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. बीएनएस वालिया ने कहा कि बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ समाज के प्रति उनके कर्तव्यों को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जो बच्चे कामयाबी हासिल कर चुके हैं वह समाज के लिए अपनी कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा दे रहे हैं। उन्होेंने बताया कि हर साल शिक्षा पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह संस्था पंजाब के 12 जिले कवर चुकी है और अब तक इन जिलों के कमजोर वर्ग के 700 बच्चों को शिक्षा देकर वह नवोदय विद्यालय भेज चुके हैं।
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