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अमर उजाला इंपेक्टः पड़ताल के बाद जागे पीयू के अफसर, सैलरी से नहीं कटेगी पुटा की मेंबरशिप फीस

Sat, 27 Jul 2019 10:21 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 27 Jul 2019 10:21 AM IST
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Amar Ujala Impact, Punjab University Big Decision Regarding PUTA Membership Fees
पंजाब यूनिवर्सिटी का कैंपस - फोटो : फाइल फोटो
अमर उजाला की पड़ताल के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी के अफसर जागे और टीचरों की सैलरी से पुटा की मेंबरशिप फीस न काटने का फैसला ले लिया। पीयू प्रशासन ने फाइनल निर्णय ले लिया है कि शिक्षकों की सैलरी से पुटा का मेंबरशिप शुल्क नहीं काटा जाएगा। इस निर्णय से सैकड़ों शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। पुटा जीबीएम की ओर से सैलरी काटने के फैसले के विरोध में खड़े शिक्षकों ने शुक्रवार को पीयू में बैठक कर मिष्ठान वितरित इसे अपनी जीत करार दिया।
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बता दें कि कानून में कहा गया है कि शिक्षकों की सैलरी प्राइवेट मनी है, उनकी अनुमति के बिना उसे कोई हाथ नहीं लगा सकता है। इस पर कानूनी राय लेने के बाद पीयू ने शिक्षकों के हक में फैसला ले लिया। अब सदस्यता शुल्क शिक्षकों के पास जाकर लिया जाएगा। पुटा जीबीएम ने इस बार मेंबरशिप 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी। साथ ही पुटा की ओर से पीयू प्रशासन को कह दिया गया कि मेंबरशिप शिक्षकों की सैलरी से काट लिया जाए।
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यह बात सामने आते ही शिक्षकों में रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने इस फैसले विरोध किया। लगातार मामला तूल पकड़ रहा था। शिक्षकों ने कह दिया कि पहले पुटा की ओर से यह बताया जाए कि उनके खजाने में कितने रुपये या एफडीआर हैं, लेकिन शिक्षकों की मांग पर गौर नहीं किया गया। पीयू प्रशासन भी पुटा के दबाव में था। उसी दौरान अमर उजाला ने पड़ताल की। यह पता लगाया गया कि किसी की सैलरी से कौन सी कटौती बिना उसकी अनुमति के हो सकती है। पूरी पड़ताल की रिपोर्ट अमर उजाला ने प्रकाशित की।
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इसके बाद पीयू प्रशासन की नींद खुली और उन्होंने कानूनी राय के लिए बैठक बुलाई। वीरवार की देर रात कानूनी राय मिली। बताया गया कि सैलरी से मेंबरशिप नहीं काटी जा सकती। सूत्रों का कहना है कि उसके बाद ही पीयू प्रशासन ने निर्णय ले लिया कि वह सैलरी से किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं करेंगे। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर शिक्षकों पर सैलरी से कटौती का दबाव क्यों बनाया गया और उनके द्वारा एफडीआर की सूचना पुटा ने क्यों नहीं दी? इन सवालों के जवाब अभी शिक्षकों को नहीं मिले हैं। वह इनके इंतजार में हैं।
 

क्या कहते हैं शिक्षक

तानाशाही की हार व सच्चाई की जीत
यह तानाशाही की हार व सच्चाई की जीत है जो लोग शिक्षकों के अधिकारों का तानाशाही पूर्ण तरीके से हनन कर रहे थे यह उनके लिए बड़ा सबक है। डेंटल कॉलेज की प्रमोशन पॉलिसी भी लागू नहीं होने दे रहे हैं। साथ ही रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को भी सदस्य नहीं बनाना चाहते।
- डॉ. अजय रंगा, सीनेटर

सैलरी से कटौती का निर्णय गलत था
इगोयस्टिक से कोई भी संगठन नहीं चलता। शिक्षकों की सैलरी से कटौती करने का निर्णय गलत था जो पहले ही वापस हो जाना चाहिए था। अब शिक्षकों के हित में निर्णय हुआ है जो सही है। अगर ऐसा नहीं होता तो आने वाली जनरेशन के सामने गलत संदेश जाता।
- प्रो. मुहम्मद खालिद, पूर्व अध्यक्ष पुटा

पहले ही हो जाना चाहिए था फैसला
शिक्षकों के विरोध के बाद पुटा की ओर से यह निर्णय लिया गया है, यह फैसला पहले ही हो जाना चाहिए था। शिक्षकों का संगठित रहने में लाभ है। सभी लोग एकजुट रहें।
- प्रो. देविंदर सिंह, पूर्व अध्यक्ष पुटा

कानूनी राय लेना बिल्कुल सही
पुटा के सदस्यता शुल्क कटौती को लेकर पीयू प्रशासन ने लीक से हटकर पहली बार जो कानूनी राय ली है वह बिल्कुल सही है। शिक्षकों के हितों के लिए यह निर्णय लिया गया है। कानून से बढ़कर कोई नहीं है। सभी को कानून का पालन करना चाहिए।
- प्रो. एमसी सिद्धू, पूर्व सचिव पुटा

अब कैश लिया जाएगा शुल्क

पुटा की ओर से अब तक सैलरी से शुल्क लेने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन पीयू प्रशासन के निर्णय के बाद अब सदस्यता शुल्क शिक्षकों के पास जाकर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 6 अगस्त के मेंबर्स की लिस्ट चुनाव के लिए फाइनल करनी है।

ऐसे में टीम बनाकर शिक्षकों के पास भेजी जाएंगी ताकि जल्द से जल्द सदस्यता शुल्क वसूला जा सके। उसी के आधार पर मेंबरों की लिस्ट फाइनल होगी। सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षक बढ़ा हुआ शुल्क देने के मूड में नहीं है। हालांकि जीबीएम की बैठक हुई तो इस पर विचार किया जाएगा।

पुटा चुनाव के लिए अब बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
सदस्यता शुल्क सैलरी से न काटने के निर्णय के बाद अब पुटा चुनाव के समीकरण बदलेंगे। जानकारों की मानें तो अब उस पक्ष को अधिक मेहनत करनी होगी जिनका सिंडिकेट में दबदबा है। उसका कारण ये निकल रहा है कि आखिर शिक्षकों को सदस्यता शुल्क कटौती का दबाव क्यों बनाया जा रहा था।

हालांकि उसका जवाब शिक्षकों का पीयू प्रशासन ने अपने फैसले से दे दिया है। अब दूसरा पक्ष प्रो. देविंदर सिंह का माना जाता है। जानकारों का कहना है कि सैलरी कटौती के निर्णय के जरिये यह पक्ष लाभ ले सकता है। साथ ही डेंटल कॉलेज के शिक्षकों की ओर से बनाए जा रहे अलग संगठन को रोककर भी फायदा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक सभी गुट तैयारी में जुट गए हैं।

वीसी से मिलकर पुटा प्रतिनिधिमंडल ने जताई नाराजगी

पुटा का एक प्रतिनिधिमंडल वीसी प्रो. राजकुमार से मिला। उन्होंने पुटा के कामकाज में हस्तक्षेप करने पर नाराजगी जताई। कहा कि पुटा का एक संवैधानिक प्रावधान है, उसी के आधार पर सभी कार्य किए जा रहे थे, लेकिन पुटा को बिना सूचित किए ही शुल्क को लेकर कानूनी राय ली गई और मौखिक आदेश दे दिए गए, यह गलत है।

उन्होंने यह भी बताया कि कुरुक्षेत्र समेत कई विश्वविद्यालयों में मेंबरशिप ऐसे ही ली जा रही है। जीबीएम के निर्णयों का अनादर किया गया है। इसके बाद पुटा ने शाम को बैठक की और कहा कि सदस्यता शुल्क 3 अगस्त तक एकत्रित कर लिया जाएगा। इसका तरीका जल्द बताया जाएगा।

इधर, शिक्षक बोले- पुटा ने क्यों नहीं ली कानूनी राय
कुछ शिक्षकों का कहना है कि कोई भी निर्णय लागू होता है तो उससे पहले यह सोचना चाहिए कि कहीं वह फैसला कानून का उल्लंघन तो नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुटा जीबीएम ने एक बार भी नहीं सोचा कि सैलरी कटौती का आदेश लागू करने से क्या प्रभाव पड़ेगा। शिक्षकों का कहना है कि पुटा को पहले कानूनी राय लेनी चाहिए थी ताकि शिक्षकों में आपसी फूट नहीं पड़ती और संगठन एक रहता।

उन्होंने यह भी बात कही है कि शिक्षक पांच दिन से मांग करते आ रहे हैं कि शिक्षकों को संतुष्ट किया जाए। बैठक होनी चाहिए, लेकिन नहीं की गई। आज शाम को अचानक बैठक कर ली गई। शिक्षकों ने कहा है कि पीयू प्रशासन ने जो निर्णय लिया है वह ठीक है। शिक्षकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। साथ ही कानून का पालन होना चाहिए।
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