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एल्यूमनी मीटः 32 साल बाद टीचर्स से मिले 243 स्टूडेंट्स, आंखें हुई नम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 31 Jul 2016 03:29 PM IST
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चंडीगढ़ में सेक्टर 7 के स्कूल की एल्यूमनी मीट
- फोटो : अमर उजाला
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एल्यूमीन मीट में 32 साल पुराने टीचर्स और 243 स्टूडेंट्स का आमना सामना हुआ तो माहौल कुछ पलों के भावुक हो गया। हर किसी के चेहरे पर खुशी के भाव थे। हर किसी के पास कहने और सुनने को बहुत कुछ था। अपने पुराने स्टूडेंट्स से मिलने का उत्साह इतना था कि 82 साल की एक टीचर सुलक्ष्ण कौर लाठी के सहारे सेक्टर 7 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के परिसर में पहुंचीं। उनके चेहरे पर 32 साल बाद स्कूल आने की रौनक साफ झलक रही थी।
यह अवसर था 1982 से 1995 के बैच की एलुमिनी मीट का। जिसमें 243 स्टूडेंट 32 साल बाद अपने टीचर्स से मिले। इन्हें मिलाने का काम रिटायर्ड टीचर सुच्चा सिंह और राकेश कुमार सूद ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुराने टीचर्स और स्टूडेंट्स ने स्कूल परिसर में 25 पौधे लगाकर की। उसके बाद सभी पुराने टीचर्स और स्टूडेंट्स ने जिंदगी के किस्से बयां किए।
सबसे पहले हिंदी और सोशल स्टडी विषय पढ़ाने वाली 82 साल की सुलक्ष्ण कौर ने यादों को साझा किया और बताया कि वह 1976 में इस स्कूल में टीचर बनकर आई थीं। वह बताती हैं कि पिछले साल वह सेक्टर 20 की लाइटों से 46 जाने के लिए एक साइकिल रिक्शे पर बैठीं। उसे एक 18 साल का लड़का चला रहा था। 46 की लाइटों पर जब उन्होंने रिक्शे से उतरकर उस लड़के को पैसे देने चाहे तो उसने यह कहकर मना कर दिया कि वह अपने गुरु से पैसे कैसे ले सकता है। मैं उसकी बात समझ नहीं पाई।
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पूछने पर उसने बताया कि वह स्टूडेंट रह चुका है। उसने बीए सेकेंड के पेपर दिए हैं और डेढ़ महीना फ्री था। उसने पिता जी साइकिल रिक्शा चलाते हैं। सोचा कि जितना समय फ्री रहता हूं, रिक्शा चलाऊंगा। उस बच्चे की बात से मुझे आत्मिक खुशी मिली। सुलक्ष्ण कौर बताती हैं, इस स्कूल ने उन्हें पहचान तो दिलाई, साथ ही नए रिश्तों से भी जोड़ा। कार्यक्रम के अंत में स्कूल की प्रिंसिपल सतवंत कौर ने सभी टीचर्स और स्टूडेंट्स को सम्मानित किया।
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यह अवसर था 1982 से 1995 के बैच की एलुमिनी मीट का। जिसमें 243 स्टूडेंट 32 साल बाद अपने टीचर्स से मिले। इन्हें मिलाने का काम रिटायर्ड टीचर सुच्चा सिंह और राकेश कुमार सूद ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुराने टीचर्स और स्टूडेंट्स ने स्कूल परिसर में 25 पौधे लगाकर की। उसके बाद सभी पुराने टीचर्स और स्टूडेंट्स ने जिंदगी के किस्से बयां किए।
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सबसे पहले हिंदी और सोशल स्टडी विषय पढ़ाने वाली 82 साल की सुलक्ष्ण कौर ने यादों को साझा किया और बताया कि वह 1976 में इस स्कूल में टीचर बनकर आई थीं। वह बताती हैं कि पिछले साल वह सेक्टर 20 की लाइटों से 46 जाने के लिए एक साइकिल रिक्शे पर बैठीं। उसे एक 18 साल का लड़का चला रहा था। 46 की लाइटों पर जब उन्होंने रिक्शे से उतरकर उस लड़के को पैसे देने चाहे तो उसने यह कहकर मना कर दिया कि वह अपने गुरु से पैसे कैसे ले सकता है। मैं उसकी बात समझ नहीं पाई।
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पूछने पर उसने बताया कि वह स्टूडेंट रह चुका है। उसने बीए सेकेंड के पेपर दिए हैं और डेढ़ महीना फ्री था। उसने पिता जी साइकिल रिक्शा चलाते हैं। सोचा कि जितना समय फ्री रहता हूं, रिक्शा चलाऊंगा। उस बच्चे की बात से मुझे आत्मिक खुशी मिली। सुलक्ष्ण कौर बताती हैं, इस स्कूल ने उन्हें पहचान तो दिलाई, साथ ही नए रिश्तों से भी जोड़ा। कार्यक्रम के अंत में स्कूल की प्रिंसिपल सतवंत कौर ने सभी टीचर्स और स्टूडेंट्स को सम्मानित किया।