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अलर्टः पंजाब यूनिवर्सिटी में माहौल बिगड़ा या कुछ गलत हुआ तो रद्द हो सकते हैं छात्र संघ चुनाव
Mon, 02 Sep 2019 03:19 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 02 Sep 2019 03:19 PM IST
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कैंपस में छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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छात्र संघ चुनाव से पहले किसी भी छात्र संगठन ने पंजाब यूनिवर्सिटी में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो चुनाव रद्द भी हो सकते हैं। पीयू प्रशासन चाहता है कि चुनाव शांतिपूर्ण हों। बताया जाता है कि इसको लेकर पीयू के अधिकारियों की गोपनीय बैठक हुई है, उसी में यह बात रखी गई है।
छात्रों को भी संदेश दे दिया गया है कि वह शांति से अपने चुनाव प्रचार में लगे रहें और अपने कार्यों को करें। किसी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। हालांकि पुलिस प्रशासन इसके लिए पूरी तरह मुस्तैद है। सैकड़ों पुलिस कर्मियों की ड्यूटी पीयू में लगी है। पुलिस गोपनीय रिपोर्ट भी तैयार कर रही है। साथ ही संदिग्ध छात्रों पर भी नजर है।
हॉस्टलों में चेकिंग जारी
पीयू के सभी हॉस्टलों में चेकिंग जारी है। रविवार को भी पीयू के सभी वार्डन व कई अधिकारियों ने चेकिंग की। प्रिंटेड पोस्टर मिले तो उन्हें कब्जे में लिया गया। छात्रों को चेतावनी दी गई। वहीं वार्डन्स ने सभी छात्रों के आईकार्ड चेक किए। बाहरी छात्र कुछ मिले तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
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छात्रों को भी संदेश दे दिया गया है कि वह शांति से अपने चुनाव प्रचार में लगे रहें और अपने कार्यों को करें। किसी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। हालांकि पुलिस प्रशासन इसके लिए पूरी तरह मुस्तैद है। सैकड़ों पुलिस कर्मियों की ड्यूटी पीयू में लगी है। पुलिस गोपनीय रिपोर्ट भी तैयार कर रही है। साथ ही संदिग्ध छात्रों पर भी नजर है।
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हॉस्टलों में चेकिंग जारी
पीयू के सभी हॉस्टलों में चेकिंग जारी है। रविवार को भी पीयू के सभी वार्डन व कई अधिकारियों ने चेकिंग की। प्रिंटेड पोस्टर मिले तो उन्हें कब्जे में लिया गया। छात्रों को चेतावनी दी गई। वहीं वार्डन्स ने सभी छात्रों के आईकार्ड चेक किए। बाहरी छात्र कुछ मिले तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
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पहले पीयू में मुद्दों पर पड़ते थे वोट, अब रॉयल लाइफ हो गई महत्वपूर्ण
दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के एआरएसडी कॉलेज से छात्र संघ में सचिव रहे हेमंत नंदा कहते हैं कि डीयू में चुनाव ग्राउंड लेवल के मुद्दों पर होते हैं। उन्हीं के जरिये संगठनों को वोट मिलते हैं। लेकिन पीयू की राजनीति में काफी अंतर दिख रहा है। यहां रॉयल लाइफ पर वोट पड़ रहे हैं। बिना मुद्दों के यदि वोट जहां कहीं भी पड़ते हैं तो संबंधित संगठन छात्रों के हितों को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। उन्हें छात्रों के हित नजर नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, पूरे देश के शिक्षण संस्थानों में सवर्ण गरीब छात्रों को दस फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन पीयू में यह अब तक नहीं मिल पाया।
दर्जनों विद्यार्थी इसके लाभ न मिलने के कारण पीयू के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाए। हैरत ये है कि यह मुद्दा इस छात्र संघ चुनाव में नहीं है। किसी संगठन ने इसे नहीं उठाया और न ही कोई छात्र इसकी डिमांड कर रहा। हेमंत नंदा कहते हैं कि वर्ष 2017-18 में वह एआरएसडी कॉलेज से सचिव बने थे। पीयू के भी पुराने चुनावों की झलकियां उन्होंने देखीं तो पहले पीयू का चुनाव अलग होता था। एक दशक पूर्व मुद्दे हावी होते थे और छात्र उन्हीं मुद्दों पर वोट करते थे, लेकिन वर्तमान में बदलाव दिख रहा है। वह कहते हैं कि यही कारण है कि यहां छात्र काउंसिल को पावर नहीं मिल रही है।
जहां छात्रों की सर्वाधिक भागीदारी होगी, वहां अथॉरिटी भी अधिक मिलेगी। कहते हैं कि यहां हर कार्य कागज पर हो रहा है। चुनाव प्रचार में भी कागज बर्बाद किया जा रहा है जबकि डीयू में डिजिटल नोटिस बोर्ड आ गए हैं। उसी का सहारा लेकर चुनाव लड़े जा रहे हैं। मेरा संदेश यही है कि विद्यार्थी मुद्दों को छात्र संघ के सामने रखें और उनका हल करने वालों को वोट दें।
दर्जनों विद्यार्थी इसके लाभ न मिलने के कारण पीयू के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाए। हैरत ये है कि यह मुद्दा इस छात्र संघ चुनाव में नहीं है। किसी संगठन ने इसे नहीं उठाया और न ही कोई छात्र इसकी डिमांड कर रहा। हेमंत नंदा कहते हैं कि वर्ष 2017-18 में वह एआरएसडी कॉलेज से सचिव बने थे। पीयू के भी पुराने चुनावों की झलकियां उन्होंने देखीं तो पहले पीयू का चुनाव अलग होता था। एक दशक पूर्व मुद्दे हावी होते थे और छात्र उन्हीं मुद्दों पर वोट करते थे, लेकिन वर्तमान में बदलाव दिख रहा है। वह कहते हैं कि यही कारण है कि यहां छात्र काउंसिल को पावर नहीं मिल रही है।
जहां छात्रों की सर्वाधिक भागीदारी होगी, वहां अथॉरिटी भी अधिक मिलेगी। कहते हैं कि यहां हर कार्य कागज पर हो रहा है। चुनाव प्रचार में भी कागज बर्बाद किया जा रहा है जबकि डीयू में डिजिटल नोटिस बोर्ड आ गए हैं। उसी का सहारा लेकर चुनाव लड़े जा रहे हैं। मेरा संदेश यही है कि विद्यार्थी मुद्दों को छात्र संघ के सामने रखें और उनका हल करने वालों को वोट दें।