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Hindi News ›   Chandigarh ›   admissions 2019, no seats for 1700 students in 11th class in chandigarh schools

चंडीगढ़ः 1700 विद्यार्थियों को नहीं मिला दाखिला, कभी स्कूल कभी डीईओ ऑफिस के काट रहे चक्कर

Tue, 20 Aug 2019 10:05 AM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 20 Aug 2019 10:05 AM IST
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admissions 2019, no seats for 1700 students in 11th class in chandigarh schools
विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के स्कूलों में 11वीं कक्षा में दाखिला नहीं मिलने से 1700 स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर लग गया है और शिक्षा विभाग ने चुप्पी साध ली है। दाखिले की मांग को लेकर 30 से 40 पेरेंट्स सोमवार डीईओ ऑफिस पहुंच गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस भी बुलानी पड़ी। उधर, स्कूलों में सीटें बढ़ाने को लेकर सोमवार को एजुकेशन डायरेक्टर बीएल शर्मा, डीएसई रूबिंदरजीत सिंह बराड़ और डीईओ अनुजीत कौर के बीच बैठक भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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पहली, दूसरी और तीसरी काउंसलिंग में दाखिला नहीं पाने वाले स्टूडेंट्स की डिटेल आने के बाद 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इन बच्चों का क्या होगा, इसको लेकर सभी अधिकारी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। दूसरी ओर 1700 बच्चे घर बैठे हैं। समझ नहीं पा रहे कि 40 या 50 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी अगर उन्हें 11वीं कक्षा में दाखिला नहीं मिलता है तो गलती किसकी है, उनकी या विभाग की? हैरानी की बात है कि दाखिला न मिल पाने के कारण बच्चे दर-दर की टोकरे खा रहे हैं।
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कभी स्कूल तो कभी जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी मौन बैठे हैं। स्कूलों में सीटें बढ़ाने पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। चौथी काउंसलिंग में अप्लाई करने वालों में बहुत से बच्चों ने शहर के स्कूल से 10वीं पास की है, लेकिन अगर 11वीं में इन्हें दाखिला नहीं मिलता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, वह चंडीगढ़ शहर में किसी प्राइवेट स्कूल में दाखिले की फीस भरने में सक्षम नहीं है, ऐसे में इन बच्चों का भविष्य क्या होगा।
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यह सोचकर सभी चिंतित है। उधर, पेरेंटस ने बातचीत में कहा कि क्या बच्चों का पास होना ठीक नहीं, क्यों दाखिला नहीं दिया जा रहा है। अगर हमारी स्थिति ठीक होती तो प्राइवेट स्कूलों में दाखिला करवा लेते। यह हमारे साथ खिलवाड़ नहीं तो क्या है।

 

नियमों का हवाला देकर सीटें नहीं बढ़ाना चाहता विभाग

शिक्षा विभाग का कहना है कि वह सीबीएसई के नियमों को दरकिनार कर सीटें नहीं बढ़ा सकते। ऐसा करने से कई एजुकेशन क्वालिटी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। एफिलिएशन व स्कूलों की रैंकिंग पर भी फर्क पड़ सकता है। सीबीएसई के मानकों के मुताबिक एक कक्षा में 40 स्टूडेंट्स होने चाहिए। लेकिन शहर के कई सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में अभी भी 50 से 60 स्टूडेंट्स की कक्षाएं लग रही हैं।

ओपन स्कूल में 11वीं का प्रावधान ही नहीं
एजुकेशन सेक्रेटरी का कहना है कि स्कूलों में एडजस्ट करने के बाद बाकी बचे स्टूडेंट्स को ओपन बोर्ड से पढ़ने की सलाह दी जाएगी। इसके लिए वह स्कूलों में हेल्प डेस्क लगाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल है कि ओपन स्कूल में 11वीं कक्षा का प्रावधान ही नहीं है, सिर्फ 12वीं कक्षा कराई जाती है। ऐसे में अगर इन बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता है तो इनका साल खराब होना तय है।

सीटें ही नहीं तो चौथी काउंसलिंग के लिए क्यों भरवाए गए फॉर्म?
शिक्षा विभाग ने 7 और 8 अगस्त को पहली, दूसरी और तीसरी काउंसलिंग में दाखिला नहीं पाने वाले स्टूडेंट्स को ऑनलाइन आवेदन करने को कहा था। इसमें करीब 1700 स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया। इसके बाद अभी तक 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इन 1700 स्टूडेंट्स का क्या होगा इसको लेकर विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा।

बाहरी स्टूडेंट्स की वजह से चंडीगढ़ के बच्चे रह गए वंचित

इस बार कुल 12 हजार 815 सीटों पर 18 हजार 575 आवेदन आए थे। इनमें से 15,931 कैंडिडेट्स का नाम मेरिट लिस्ट में जारी किया गया। आवेदनों में काफी संख्या चंडीगढ़ से बाहर के स्टूडेंट्स का रहा। जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग के पास 11वीं कक्षा में दाखिले के लिए मोहाली, पंचकूला, कालका, पिंजौर, जीरकपुर, खरड़, लालड़ू, अंबाला आदि जगहों से भी स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया।

चंडीगढ़ के कॉलेजों में दाखिले के लिए यूटी पूल है, इसके तहत चंडीगढ़ से 12वीं करने वालों के लिए शहर के कॉलेजों की 85 फीसदी सीटें होती हैं, बाकी 15 फीसदी पर यूटी के बाहर के विद्यार्थियों को दाखिला मिलता है। इसकी वजह से चंडीगढ़ से बाहर रहने वाले स्टूडेंट्स शहर के स्कूल से ही 11वीं और 12वीं करना पसंद करते हैं।

3 अगस्त को हुआ था हंगामा, बुलानी पड़ी थी पुलिस
दो और तीन अगस्त को शिक्षा विभाग ने तीसरी काउंसलिंग को ऑफलाइन करने का फैसला किया। जीएमएसएसएस-10 में दोनों दिन अलग-अलग समय पर प्रसेंटेज के हिसाब से स्टूडेंट्स को बुलाया गया लेकिन सीटें फुल होने से कई स्टूडेट्स दाखिले से वंचित रह गए। इन स्टूडेंट्स ने स्कूल में हंगामा कर दिया।

काबू पाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। उस दिन माइक पर घोषणा की गई कि आने वाले दिनों में बाकी बचे स्टूडेंट्स को दाखिले की अगली जानकारी दे दी जाएगी लेकिन विभाग ने फॉर्म भरवाने के बाद दाखिला का क्या होगा, इसपर सभी अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।

ऐसे निकल सकता है रास्ता..

शहर के 40 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कुल 12 हजार 815 सीटें हैं। 1700 स्टूडेंट्स ने दाखिले के लिए आवेदन किया है। जानकारी के अनुसार इनमें से कई बच्चों ने माइग्रेशन के लिए भी अप्लाई कर दिया है। विभाग अगर सभी स्कूलों में 12 प्रतिशत सीटें भी बढ़ाता है तो 1537 सीटें बढ़ जाएंगी। ऐसे में माइग्रेशन के लिए अप्लाई करने वाले बच्चों को अलग करने के बाद बाकी बच्चों को दाखिला मिल जाएगा।

क्या कहते हैं पेरेंट्स
मेरी बेटी के 46 प्रतिशत अंक है। वह शुरू से चंडीगढ़ के ही सरकारी स्कूल में पढ़ी है। 11वीं में अब उसके लिए सीट नहीं है। समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं। डीईओ ऑफिस के चक्कर काटकर थक गए हैं।
- मनोज

अगस्त का महीना भी अब खत्म होने वाला है। अभी तक बच्ची का दाखिला नहीं हो पाया है। स्कूलों में जाओ तो कहते हैं कि डीईओ दफ्तर जाओ, यहां कोई जवाब नहीं देता। समझ नहीं आ रहा कि लड़की के भविष्य का क्या होगा।
- गौतम कुमार

शुरू से चंडीगढ़ के स्कूल में पढ़ने के बाद भी बेटे को दाखिला नहीं मिल रहा है। दाखिला नहीं मिलने की वजह से वह घर बैठा है। अगर शिक्षा विभाग अपने स्कूलों के बच्चों को 11वीं कक्षा में दाखिला नहीं दे सकता तो यह उनकी नाकामी है।
- सुनील कुमार

अभी तक नहीं निकल पाया कोई हल

आज भी एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर के साथ सीटें बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। जिन बच्चों को दाखिला नहीं मिला है, विभाग उन्हें सलाह दे रहा है कि वह ओपन बोर्ड से आगे की पढ़ाई जारी रखें। - अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी

सीटें बढ़ाने को लेकर एडवाइजर से मिले मेयर
स्कूलों में सीटे बढ़ाने को लेकर मेयर राजेश कालिया एडवाइजर मनोज परिदा से मिले। मेयर ने कहा कि 11वीं में दाखिला नहीं मिलने की वजह से करीब 1700 स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक गया है। एडवाइजर ने पूरे मामले को सुनने के बाद कहा कि वह शहर के किसी भी बच्चे का भविष्य खराब नहीं होने देंगे।
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