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संकटः चंडीगढ़ में कंपार्टमेंट वाले नौवीं और ग्यारहवीं के सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर लटकी तलवार
Fri, 26 Jun 2020 12:23 PM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 26 Jun 2020 12:23 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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नौवीं और 11वीं में कंपार्टमेंट आने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। ये छात्र कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होने पर टीसी लेकर अपने परिजनों के साथ यूपी और बिहार लौट गए थे। उनकी यहां के स्कूलों में रजिस्ट्रेशन हो गई थी। नियमानुसार अब उन्हें वहां दाखिला नहीं मिलेगा। इसके लिए उन्हें दोबारा से 9वीं कक्षा देनी पड़ेगी। शिक्षा विभाग ने शहर के सरकारी स्कूलों से ऐसे छात्रों की लिस्ट मांगी है। शिक्षा विभाग की ओर से 20 अप्रैल को 9वीं और 11वीं की परीक्षा का नतीजा घोषित किया गया।
इस बार कोरोना वायरस के चलते किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया गया और सभी को 30-30 नंबर ग्रेस मार्क्स के रूप में दिए गए थे। इसके बावजूद नौवीं क्लास में 4000 के करीब स्टूडेंट्स और 11वीं क्लास में 550 स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई है। विभाग ने पहले 15 मई को कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित करवाने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में लॉकडाउन के चलते इसे स्थगित कर दिया। विभाग की तरफ से परीक्षा की जगह दूसरा कोई विकल्प भी नहीं निकाला गया।
क्या कहते हैं शिक्षक
सरकारी स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि शहर से 9वीं और 11वीं में कंपार्टमेंट वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स अपनी टीसी लेकर चले गए हैं। उनके स्कूल से 9वीं कक्षा के 5 स्टूडेंट्स अपनी टीसी लेकर गए हैं। टीचर्स ने स्टूडेंट्स को यहीं रुकने की सलाह दी थी क्योंकि उनकी 9वीं में यहां रजिस्ट्रेशन हो गई है। अब किसी और राज्य में उन्हें दाखिला नहीं मिलेगा, इसके लिए उन्हें दोबारा से 9वीं कक्षा करनी पड़ेगी। यही नियम ग्याहरवीं कक्षा के स्टूडेंट्स पर भी लागू होता है।
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इस बार कोरोना वायरस के चलते किसी भी स्टूडेंट्स को फेल नहीं किया गया और सभी को 30-30 नंबर ग्रेस मार्क्स के रूप में दिए गए थे। इसके बावजूद नौवीं क्लास में 4000 के करीब स्टूडेंट्स और 11वीं क्लास में 550 स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई है। विभाग ने पहले 15 मई को कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित करवाने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में लॉकडाउन के चलते इसे स्थगित कर दिया। विभाग की तरफ से परीक्षा की जगह दूसरा कोई विकल्प भी नहीं निकाला गया।
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क्या कहते हैं शिक्षक
सरकारी स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि शहर से 9वीं और 11वीं में कंपार्टमेंट वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स अपनी टीसी लेकर चले गए हैं। उनके स्कूल से 9वीं कक्षा के 5 स्टूडेंट्स अपनी टीसी लेकर गए हैं। टीचर्स ने स्टूडेंट्स को यहीं रुकने की सलाह दी थी क्योंकि उनकी 9वीं में यहां रजिस्ट्रेशन हो गई है। अब किसी और राज्य में उन्हें दाखिला नहीं मिलेगा, इसके लिए उन्हें दोबारा से 9वीं कक्षा करनी पड़ेगी। यही नियम ग्याहरवीं कक्षा के स्टूडेंट्स पर भी लागू होता है।
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स्टूडेंट्स को देखते हुए एमएचआरडी नियमों में करें बदलाव
सरकारी स्कूल के शिक्षक स्वर्ण सिंह कम्बोज ने बताया कि पूरे देशभर से स्टूडेंट्स को परिजनों के साथ माइग्रेट करना पड़ा है। नियमों के अनुसार 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स की बोर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुकी है। वे किसी और राज्य में 10वीं और 12वीं कक्षा में दाखिला नहीं ले सकते।
शिक्षा विभाग को हालातों को देखते हुए कंपार्टमेंट वाले स्टूडेंट्स के लिए पहले ही कोई विकल्प निकलना चाहिए था। जिन स्टूडेंट्स ने माइग्रेट किया है उन्हें 9वीं और 11वीं कक्षा दोबारा करनी पड़गी अन्यथा वापस इसी शहर लौटना पड़ेगा। एमएचआरडी को बच्चों के भविष्य को देखते हुए नियमों में बदलाव करना चाहिए। सरकार या तो बच्चों को पास करें या नियम बनाए कि दूसरे राज्य से वे बोर्ड की परीक्षा दे सकें।
सरकारी स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षा करवाने के लिए पर्याप्त कमरे
शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि एक स्कूल में 21 से 22 कमरे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षा आयोजित करवा सकते हैं, लेकिन बोर्ड के साथ 9वीं और 11वीं की परीक्षा के लिए भी सीबीएसई के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जो फैसला लेगी, उसी के बाद नौवीं और ग्यारहवीं के परीक्षा पर कोई प्लानिंग की जाएगी।
नौंवी और ग्यारहवीं की कंपार्टमेंट की परीक्षा आयोजित करवाने को लेकर अगले हफ्ते बैठक करेंगे। बैठक के दौरान अधिकारियों की राय के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक
शिक्षा विभाग को हालातों को देखते हुए कंपार्टमेंट वाले स्टूडेंट्स के लिए पहले ही कोई विकल्प निकलना चाहिए था। जिन स्टूडेंट्स ने माइग्रेट किया है उन्हें 9वीं और 11वीं कक्षा दोबारा करनी पड़गी अन्यथा वापस इसी शहर लौटना पड़ेगा। एमएचआरडी को बच्चों के भविष्य को देखते हुए नियमों में बदलाव करना चाहिए। सरकार या तो बच्चों को पास करें या नियम बनाए कि दूसरे राज्य से वे बोर्ड की परीक्षा दे सकें।
सरकारी स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षा करवाने के लिए पर्याप्त कमरे
शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि एक स्कूल में 21 से 22 कमरे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षा आयोजित करवा सकते हैं, लेकिन बोर्ड के साथ 9वीं और 11वीं की परीक्षा के लिए भी सीबीएसई के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जो फैसला लेगी, उसी के बाद नौवीं और ग्यारहवीं के परीक्षा पर कोई प्लानिंग की जाएगी।
नौंवी और ग्यारहवीं की कंपार्टमेंट की परीक्षा आयोजित करवाने को लेकर अगले हफ्ते बैठक करेंगे। बैठक के दौरान अधिकारियों की राय के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक