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चंडीगढ़ः स्कूल में 100% इंगलिश स्पीकिंग न होने पर बेटी का नाम लिया वापस, फीस रिफंड करनी होगी
Thu, 08 Aug 2019 12:48 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 08 Aug 2019 12:48 PM IST
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रिफंड
- फोटो : फाइल फोटो
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स्कूल का विज्ञापन देखने के बाद बेटी का नौंवी कक्षा में दाखिला कराया, लेकिन एक-दो क्लास लगते ही पता चला कि स्कूल तो 100 फीसदी इंगलिश मीडियम है ही नहीं। इसके साथ कक्षाओं में बच्चे भी काफी कम हैं, लेकिन उनके सामने झूठी तस्वीर पेश की गई। इसके बाद पैरेंट्स ने अपनी बेटी का नाम वापस ले लिया और राशि रिफंड करने की मांग की, लेकिन स्कूल ने राशि रिफंड नहीं की।
मामला उपभोक्ता फोरम में पहुंचने पर ब्रिटिश स्कूल पर जुर्माना लगाया गया है। सेक्टर-44ए चंडीगढ़ निवासी राहुल पठानिया ने फोरम में सेक्टर-44बी स्थित द ब्रिटिश स्कूल के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में बताया कि विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का नौंवी कक्षा में एडमिशन करवा दिया। उन्होंने 77 हजार 300 रुपये एडमिशन के समय फीस भी भरी।
उन्होंने कहा कि स्कूल में एडमिशन के दो दिन बाद ही उन्हें पता चला कि स्कूल की गलत तस्वीर उनके सामने पेश की गई। नौंवी कक्षा में काफी सीटें खाली थीं। 30 से 35 छात्रों की क्षमता के बजाय सिर्फ 17-18 छात्र ही थे।
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मामला उपभोक्ता फोरम में पहुंचने पर ब्रिटिश स्कूल पर जुर्माना लगाया गया है। सेक्टर-44ए चंडीगढ़ निवासी राहुल पठानिया ने फोरम में सेक्टर-44बी स्थित द ब्रिटिश स्कूल के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में बताया कि विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का नौंवी कक्षा में एडमिशन करवा दिया। उन्होंने 77 हजार 300 रुपये एडमिशन के समय फीस भी भरी।
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उन्होंने कहा कि स्कूल में एडमिशन के दो दिन बाद ही उन्हें पता चला कि स्कूल की गलत तस्वीर उनके सामने पेश की गई। नौंवी कक्षा में काफी सीटें खाली थीं। 30 से 35 छात्रों की क्षमता के बजाय सिर्फ 17-18 छात्र ही थे।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि वहां पर 100 प्रतिशत इंग्लिश इंट्रैक्शन भी नहीं थी। इंग्लिश, हिंदी, पंजाबी और हरियाणवी की मिक्स इंट्रैक्शन टीचर और छात्रों के बीच थी। क्लास में काफी दिक्कत थी, क्योंकि इसमें अलग-अलग सेक्शन से छात्र इकट्ठे कर दिए जाते थे। यह सब कुछ देखने के बाद बेटी का एडमिशन वापस लेने का फैसला किया, लेकिन स्कूल ने रुपये रिफंड करने से मना कर दिया।
इसकी फोरम में शिकायत दी। स्कूल ने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती, क्योंकि प्रॉस्पेक्टस और स्कूल गाइडलाइंस जानने के बाद ही शिकायतकर्ता ने अपने बच्चे का एडमिशन उनके स्कूल में करवाया था। हालांकि, फोरम ने स्कूल की इन दलीलों को खारिज कर दिया और ब्रिटिश स्कूल को निर्देश दिए कि वह शिकायतकर्ता को एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन चार्जेस काटकर 77 हजार 300 रुपये की राशि लौटाए।
इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न और मुकदमा खर्च के रूप में भी शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा अदा करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इन आदेशों की पालना करनी होगी, नहीं तो स्कूल को 10 हजार रुपये अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा।
इसकी फोरम में शिकायत दी। स्कूल ने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती, क्योंकि प्रॉस्पेक्टस और स्कूल गाइडलाइंस जानने के बाद ही शिकायतकर्ता ने अपने बच्चे का एडमिशन उनके स्कूल में करवाया था। हालांकि, फोरम ने स्कूल की इन दलीलों को खारिज कर दिया और ब्रिटिश स्कूल को निर्देश दिए कि वह शिकायतकर्ता को एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन चार्जेस काटकर 77 हजार 300 रुपये की राशि लौटाए।
इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न और मुकदमा खर्च के रूप में भी शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा अदा करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इन आदेशों की पालना करनी होगी, नहीं तो स्कूल को 10 हजार रुपये अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा।