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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में इस बार भाजपा बनाम कांग्रेस, दोनों गुटों को लगानी होगी ताकत
Fri, 17 Jul 2020 02:02 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 17 Jul 2020 02:02 PM IST
सार
- भाजपा से डॉ. सुभाष शर्मा, कांग्रेस से प्रो. नवदीप गोयल मैदान में
- गोयल ग्रुप की ताज बचाने, सुभाष ग्रुप के सामने ताज पहनने की चुनौती
- बदल सकता है सीनेट का नजारा, दोनों ही ग्रुपों की वोटरों पर है अच्छी पकड़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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विस्तार
इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सीनेट चुनाव कुछ खास होंगे। इस बार लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस होगी। दोनों दलों की विचारधाराओं के जरिये ही वोट जुटाए जाएंगे। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। भाजपा से डॉ. सुभाष शर्मा वहीं कांग्रेस से प्रो. नवदीप गोयल अपनी ताकत दिखाएंगे।
दोनों ही ग्रुपों के लिए यह चुनाव नई राह खोलेगा। गोयल ग्रुप के लिए चुनौती ताज बचाने की है यानी सीनेट में अपना दबदबा बनाए रखने की होगी। वहीं सुभाष ग्रुप के सामने सीनेट का ताज पहनने की होगी। दोनों ही ग्रुप अपनी ताकत दिखाने को तैयार है। प्रचार इस बार फोनेटिक ही चल रहा है।
ये है सीटों का गणित
सीनेट में चुनाव में कुल सीटें 91 हैं। इसमें से 36 सदस्यों का मनोनयन चांसलर की ओर से किया जाता है। 14 सीटें स्नातक चुनाव के लिए होती हैं। चार सीटें पीयू कैंपस के नाम हैं। वहीं प्रिंसिपल, फैकल्टी व रीजनल सेंटरों के नाम भी कुछ सीटें होती हैं। सुभाष ग्रुप का दावा है कि इस सीनेट के चुनाव में नजारा अलग होगा।
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चांसलर कार्यालय की ओर से मनोनीत होने वाले सदस्यों में से कम से कम 32 नाम उन्हीं के पक्ष के होंगे। यदि इतनी बड़ी संख्या में सुभाष ग्रुप चांसलर कार्यालय से सीटें ले आता है तो निश्चित ही गोयल ग्रुप के लिए परेशानी होगी, क्योंकि सुभाष ग्रुप को फिर सीनेट में 50 फीसदी से अधिक बहुमत मिल सकता है। डीएवी व सुभाष ग्रुप मिलकर चुनाव लड़ेंगे। माना जा रहा है कि इनका पक्ष मजबूती से उभर रहा है।
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दोनों ही ग्रुपों के लिए यह चुनाव नई राह खोलेगा। गोयल ग्रुप के लिए चुनौती ताज बचाने की है यानी सीनेट में अपना दबदबा बनाए रखने की होगी। वहीं सुभाष ग्रुप के सामने सीनेट का ताज पहनने की होगी। दोनों ही ग्रुप अपनी ताकत दिखाने को तैयार है। प्रचार इस बार फोनेटिक ही चल रहा है।
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ये है सीटों का गणित
सीनेट में चुनाव में कुल सीटें 91 हैं। इसमें से 36 सदस्यों का मनोनयन चांसलर की ओर से किया जाता है। 14 सीटें स्नातक चुनाव के लिए होती हैं। चार सीटें पीयू कैंपस के नाम हैं। वहीं प्रिंसिपल, फैकल्टी व रीजनल सेंटरों के नाम भी कुछ सीटें होती हैं। सुभाष ग्रुप का दावा है कि इस सीनेट के चुनाव में नजारा अलग होगा।
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चांसलर कार्यालय की ओर से मनोनीत होने वाले सदस्यों में से कम से कम 32 नाम उन्हीं के पक्ष के होंगे। यदि इतनी बड़ी संख्या में सुभाष ग्रुप चांसलर कार्यालय से सीटें ले आता है तो निश्चित ही गोयल ग्रुप के लिए परेशानी होगी, क्योंकि सुभाष ग्रुप को फिर सीनेट में 50 फीसदी से अधिक बहुमत मिल सकता है। डीएवी व सुभाष ग्रुप मिलकर चुनाव लड़ेंगे। माना जा रहा है कि इनका पक्ष मजबूती से उभर रहा है।
गोयल ग्रुप का यहां दबदबा
दूसरी ओर गोयल ग्रुप का पीयू कैंप, स्नातक सीटों, प्रिंसिपल, रीजनल सेंटर आदि के चुनकर आने वाले सदस्यों पर दबदबा होगा यानी अधिकांश गोयल ग्रुप के होंगे। सूत्रों का कहना है कि चुनकर आने वाले सदस्यों में से अधिकांश इसी ग्रुप के लोग होंगे। इसके अलावा पंजाब सरकार के दो मंत्री भी मनोनीत होते हैं, जो गोयल ग्रुप के पक्ष में ही आते हैं। अभी फिलहाल दोनों ही ग्रुप अपने अपने चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। कुछ के नाम फाइनल हो गए हैं तो कुछ का अभी बाकी है।
पीयू कैंपस से ये नाम सामने आए
पीयू कैंपस की चार सीटों के लिए फिलहाल कुछ नाम सामने आए हैं। दो असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर चुने जाएंगे और दो प्रोफेसर। गोयल ग्रुप से असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर कॉंसीटेंसी से साइंस वर्ग से जहां डॉ. प्रवीन गोयल चुनाव लड़ेंगे। वहीं आर्ट फैकल्टी से यूसोल के डॉ. प्रवीन श्योराण शामिल हैं। सुभाष ग्रप से साइंस वर्ग से डॉ. सुमन मोर व अन्य वर्ग से डॉ. अजय रंगा, डॉ. दिनेश कुमार आदि के नाम चल रहे हैं। हालांकि नाम किसी के फाइनल नहीं हुए हैं। लेकिन इनमें से कई ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। प्रोफेसर वर्ग के लिए भी नाम अभी पूरे सामने नहीं आए हैं।
सीनेट के चुनाव को लेकर असमंजस
सीनेट चुनाव सिंतबर में होने हैं। कोरोना वायरस के चलते यह आगे हो सकते हैं। अब तक तो पीयू निर्धारित तिथि में ही चुनाव कराता नजर आ रहा है। एक ग्रुप चाहता है कि समय पर चुनाव हों तो दूसरा चाहता है कि कुछ आगे किए जा सकते हैं। सभी के अपने अपने तर्क हैं। जानकारों का तो यह भी कहना है कि सीनेट की बैठक तो हो नहीं रही। सिंडिकेट दिसंबर तक चलेगी, ऐसे में पीयू के काम नहीं रुकेंगे। दो से तीन माह सीनेट चुनाव को आगे किया जा सकता है या फिर चांसलर कार्यालय की ओर से एग्जीक्यूटिव कमेटी भी बनाई जा सकती है।
पीयू कैंपस से ये नाम सामने आए
पीयू कैंपस की चार सीटों के लिए फिलहाल कुछ नाम सामने आए हैं। दो असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर चुने जाएंगे और दो प्रोफेसर। गोयल ग्रुप से असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर कॉंसीटेंसी से साइंस वर्ग से जहां डॉ. प्रवीन गोयल चुनाव लड़ेंगे। वहीं आर्ट फैकल्टी से यूसोल के डॉ. प्रवीन श्योराण शामिल हैं। सुभाष ग्रप से साइंस वर्ग से डॉ. सुमन मोर व अन्य वर्ग से डॉ. अजय रंगा, डॉ. दिनेश कुमार आदि के नाम चल रहे हैं। हालांकि नाम किसी के फाइनल नहीं हुए हैं। लेकिन इनमें से कई ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। प्रोफेसर वर्ग के लिए भी नाम अभी पूरे सामने नहीं आए हैं।
सीनेट के चुनाव को लेकर असमंजस
सीनेट चुनाव सिंतबर में होने हैं। कोरोना वायरस के चलते यह आगे हो सकते हैं। अब तक तो पीयू निर्धारित तिथि में ही चुनाव कराता नजर आ रहा है। एक ग्रुप चाहता है कि समय पर चुनाव हों तो दूसरा चाहता है कि कुछ आगे किए जा सकते हैं। सभी के अपने अपने तर्क हैं। जानकारों का तो यह भी कहना है कि सीनेट की बैठक तो हो नहीं रही। सिंडिकेट दिसंबर तक चलेगी, ऐसे में पीयू के काम नहीं रुकेंगे। दो से तीन माह सीनेट चुनाव को आगे किया जा सकता है या फिर चांसलर कार्यालय की ओर से एग्जीक्यूटिव कमेटी भी बनाई जा सकती है।