फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Atal Cancer and Research Institute proposal could not be passed in five years

पंजाब विश्वविद्यालय: पांच साल में अटल कैंसर और रिसर्च संस्थान का प्रस्ताव नहीं हो सका पास, केंद्र को फिर भेजा जाएगा

Sun, 04 Jul 2021 01:54 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 04 Jul 2021 01:54 AM IST
सार

सूत्रों का कहना है कि पीयू की योजना थी कि वह कैंसर पर शोध करेगा और टाटा इंस्टीट्यूट मरीजों का इलाज करेगा। पीयू ने यह योजना इसलिए भी बनाई थी कि उसे टाटा इंस्टीट्यूट से भी कुछ फंड मिल सके। हालांकि अभी तक प्रस्ताव केंद्र में ही लटका हुआ है। पीयू अब फिर से इसके लिए पहल कर रही है।

विज्ञापन
Atal Cancer and Research Institute proposal could not be passed in five years
पंजाब विश्वविद्यालय। - फोटो : फाइल फोटो।

विस्तार

पंजाब विश्वविद्यालय की ओर से केंद्र सरकार को भेजा गया अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर का प्रस्ताव तीन साल में पास नहीं हो सका। पीयू का यह प्रस्ताव काफी बड़ा था, जिसके जरिए पीयू को ख्याति मिलनी थी। अब पीयू फिर से इस प्रस्ताव को पास करवाने के लिए केंद्र सरकार के जिम्मेदारों से संपर्क साध रही है। बताया जाता है कि यह प्रस्ताव केंद्र की स्टैंडिंग कमेटी पास करेगी। इसकी बैठक जुलाई में ही होने की उम्मीद है।

विज्ञापन


पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर का प्रस्ताव तैयार करवाया। प्रो. देविंदर मेहता की अगुवाई में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग, बायोइन्फॉर्मेटिक विभाग के वैज्ञानिकों ने यह प्रस्ताव तैयार किया था।
विज्ञापन


इसका बेस तैयार किया गया कि पंजाब के अलावा आसपास के क्षेत्रों में कैंसर लगातार पैर पसार रहा है। ऐसे में अनुसंधान व मरीजों को इलाज की अधिक आवश्यकता है। बेस तैयार करने के बाद इस रिसर्च संस्थान पर 742 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रोटोन थैरेपी समेत कई विधियों से होना था काम
इस रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोटोन थैरेपी पर काम करने की बात कही गई थी। यह उपचार व रिसर्च दोनों के लिए काम आएगी। यहां कैंसर पर शोध करने वाले शोधार्थी कैंसर केसों के अलावा जीनोमिक परिवर्तनशीलता, महामारी के आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण, सांख्यिकीय मूल्यांकन पर काम करना तय था। साथ ही मेटास्टेसिस में शामिल आणविक तंत्र को समझने के लिए बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा देना था। इस सेंटर में जैव चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना शामिल था। कैंसर निदान के लिए विवो इमेजिंग तकनीकों और स्पेक्ट्रोमेट्रिक विधियों को व्यवहार में लाया जाना था।


सेंटर में बनाए जाने वाले विभाग

  • विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान
  • जैव सूचना विज्ञान
  • कैंसर इमेजिंग
  • प्रवाह साइटोमेट्री कोर
  • जीनोमिक्स प्रोटिओमिक्स
  • ऊतक अधिग्रहण और सेलुलर सेल
  • आणविक विश्लेषण कोर
  • रोग की रोकथाम और प्रारंभिक निदान

क्या कहते हैं अधिकारी
अटल कैंसर इंस्टीट्यूट का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा गया था। इसकी प्रगति जानी जा रही है, ताकि फिर से महत्वपूर्ण बिंदुओं के साथ काम को आगे बढ़ाया जा सके। - प्रो. वीआर सिन्हा, डीयूआई

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed