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पीयू की सुरक्षा को लेकर घमासान, मेंबर बोले- दीवारें ऊंची करने से नहीं रुकेंगी घटनाएं

Sun, 15 Dec 2019 01:15 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 15 Dec 2019 01:15 PM IST
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Arguments over PU security, members said, incidents will not stop from raising walls
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पीयू में शनिवार को हुई सीनेट की मीटिंग में सुरक्षा के मुद्दे को लेकर काफी देर तक माहौल गर्माया रहा। सीनेट में पहली बार किसी मुद्दे को लेकर सभी मेंबर एक दिखाई दिए। सभी का कहना था कि प्रोफेसर की पत्नी के साथ हुई घटना निंदनीय है, लेकिन अब आगे ऐसा न हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

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मेंबरों ने कहा कि दीवारें ऊंची करने से काम नहीं चलने वाला, इसके लिए पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। वीसी प्रो. राजकुमार और रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि सुरक्षा को लेकर तेजी से काम चल रहा है। जल्द ही इसके परिणाम सामने दिखाई देंगे। मीटिंग में सबसे पहले मेंबर पाम राजपूत ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया और कहा कि बॉटनीकल गार्डन में आने-जाने का समय निर्धारित कर दिया है जो कि गलत है।
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दीवारें ऊंची करने की बात सामने आ रही है, इससे भी कुछ नहीं होने वाला। सभी को पूरी तरह सुरक्षा मुहैया कराई जाए। कर्मचारी नेता दीपक कौशिक ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों के खाली पद भरे जाएं। इसके लिए एमएचआरडी भी मना नहीं करेगा, सबसे पहले सभी की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं, क्योंकि सभी को अपनी जान की परवाह होती है। इस पर सभी मेंबरों ने अपने-अपने सुझाव दिए और गुस्सा भी जाहिर किया। रजिस्ट्रार बोले कि दीवार ऊंची करवाकर वहां सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और सुरक्षाकर्मी भी तैनात होंगे। 17 दिसंबर को सुरक्षा को लेकर कमेटी की बैठक होगी, उसमें फैसले लिए जाएंगे।

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पूर्व वीसी पर सेक्सुअल हैरासमेंट का मामला बंद किया
पूर्व वीसी पर रिसर्च स्कॉलर की ओर से लगाए गए सेक्सुअल हैरासमेंट के आरोपों के मामले पर कुछ मेंबर ने कहा कि यह मामला चांसलर कार्यालय पहुंच चुका है और वीसी भी अब पीयू में नहीं हैं और इस मामले में साक्ष्यों का भी अभाव है, ऐसे में इसे बंद कर देना चाहिए। इस दौरान पीएचडी डिग्री के लिए यूजीसी के मिनिमम स्टैंडर्ड और प्रोसिजर लागू करने के लिए नियम व रेगुलेशन को मंजूरी दी गई और पीएचडी स्कॉलरशिप व फेलोशिप के नियमों में भी आए सुझावों पर अमल करते हुए प्रस्ताव पास कर दिया गया।

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