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किसानों को सलाह: विशेषज्ञ बोले- कपास में माह के मध्य तक डालें नाइट्रोजन खाद की दूसरी मात्रा

Mon, 05 Aug 2019 02:18 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 05 Aug 2019 02:18 PM IST
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agriculture, Advice to farmers, put nitrogen fertilizer in cotton by the middle of the month
कपास की फसल - फोटो : फाइल फोटो
देसी कपास में पौधे से निकल रही फूटों को इस माह के पहले पखवाड़े में काट दे। फिरमाह के मध्य तक कपास में नाइट्रोजन खाद की दूसरी मात्रा अवश्य डाल दें। देसी कपास में इस समय 25 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ डालें। अमेरिकन कपास में फूल आने के समय 40 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। संकर किस्मों के लिए नत्रजन खाद (150 किलोग्राम यूरिया) को तीन बराबर हिस्सों में बांट कर तीन बार बिजाई के समय, बौकी आने पर और फूल आने पर डाली जाती है। इसलिए आगे फूल आने पर 50 किलोग्राम यूरिया की तीसरी मात्रा अवश्य डालें।
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यदि जमीन में पर्याप्त नमी न हो तो हल्का पानी लगा दें। इसस पैदावार में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकन कपास में फलों को सड़ने और टिंडों को गिरने से रोकने के लिए फसल में एनएए (जैसे प्लेनोफिक्स या और कोई इस जैसी दवा) का दो बार छिड़काव करें। पहला छिड़काव 50 ईसी दवा 280 लिटर पानी में मिलाकर फल आने के समय प्रति एकड़ करें व दूसरा छिड़काव 70 सीसी के हिसाब से पहले छिड़काव के 20 दिन बाद करें। छिड़काव में खारे पानी का इस्तेमाल न करें।
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फसल को कोणदार धब्बों की बीमारी से बचाव के लिए प्लांटोमाइसिन (30 - 40 ग्राम प्रति एकड़) या स्ट्रैप्टोसाइक्लिन (6 -8 ग्राम प्रति एकड़) व  कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (600 - 800 ग्राम प्रति एकड़) के घोल का 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। 2,4 - डी कपास के लिए घातक है। किसी भी रूप में इसे कपास की फसल के संपर्क में न आने दें। जिन छिड़काव यंत्रों से पहले 2,4 - डी का छिड़काव के लिए इस्तेमाल न लाएं। 2,4 - डी से प्रभावित पौधों की समस्या हो जाने पर प्रभावित कोंपलों को 15 सेंटीमीटर काट दें और इसके बाद 2.5 प्रतिशत यूरिया व 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट के घोल का छिड़काव करें।
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