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पंजाब यूनिवर्सिटी में छुट्टियों के नाम बड़े खेल का खुलासा, 45 दिन की मिलती, ले रहीं 365 का अवकाश
Wed, 19 Feb 2020 02:53 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 02:53 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पंजाब यूनिवर्सिटी में छुट्टियों के नाम पर नया खेल सामने आया है। बच्चों की परीक्षा के लिए शिक्षिकाओं को 45 दिन का अवकाश मिलता है, लेकिन यहां कुछ शिक्षिकाओं ने 365 दिन के अवकाश लगातार ले लिए। हैरत तो ये है कि इन छुट्टी के दिनों का भुगतान भी हो गया। इसका पता ऑडिट को लगा तो हड़कंप मच गया। अब इन शिक्षिकाओं से रिकवरी की तैयारी की जा रही है या फिर अन्य छुट्टियों में इन अवकाशों को समाहित करना होगा। सूत्रों का कहना है कि इस अनियमितताओं पर ऑडिट विभाग संबंधित विभागों को पत्र जारी कर रहा है।
पीयू की चाइल्ड केयर लीव योजना के तहत शिक्षिकाओं को बच्चों की देखभाल व परीक्षा के लिए अवकाश दिया जाता है। बीमारी के लिए अवकाश अधिक दिन का मिल जाता है, लेकिन परीक्षा की तैयारी के लिए अधिकतम 45 दिन का अवकाश तय है। शिक्षिकाएं बच्चों की परीक्षा से 15 दिन पहले व 30 अन्य दिन के अवकाश ले सकती हैं। पूरे सर्विस काल में 365 दिन का अवकाश लिया जा सकता है। जिन शिक्षिकाओं के बच्चे 12वीं पास कर गए हैं उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।
वर्ष 2017-18 में एक दर्जन से अधिक शिक्षिकाओं ने चाइल्ड केयर लीव लीं। यह छुट्टियां बच्चों की परीक्षा के लिए ली गई हैं। इसके तहत 45 दिन का अवकाश मान्य है, लेकिन इन शिक्षिकाओं ने लगातार 365 दिन अवकाश ले लिए। विभाग के जरिये छुट्टियों का प्रकरण कई कार्यालयों से होकर गुजरा और उन छुट्टियों का भुगतान भी कर दिया गया।
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सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षिकाओं के बच्चे 12वीं पास करने वाले थे। उससे पहले चाइल्ड केयर लीव का लाभ उन्होंने नहीं लिया और उन्होंने बाद में एक साथ छुट्टियां ले लीं जबकि ऐसा नहीं होता। इस पर ऑडिट ने आपत्ति लगाई है। साथ ही संबंधित विभागों को चिट्ठी भेजी जा रही है। पुराने प्रकरण सामने आने के बाद ऑडिट ने वर्तमान चाइल्ड केयर लीव को भी गंभीरता से लिया है। कुछ केस नए भी सामने आए हैं।
365 दिन छुट्टी तो पढ़ाने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या रही
सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षिकाओं ने अपने बच्चों की परीक्षा के लिए लगातार 365 दिन के अवकाश ले लिए, लेकिन उनकी कक्षाओं में आ रहे दूसरे बच्चों की पढ़ाई का क्या हुआ। यदि सालभर शिक्षिकाओं ने अवकाश ले लिए तो उन शिक्षिकाओं का कोर्स किसने पूरा करवाया? यह सवाल खड़ा हो गया है। इसकी वैकल्पिक व्यवस्था क्या रही? यह भी देखना होगा।
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पीयू की चाइल्ड केयर लीव योजना के तहत शिक्षिकाओं को बच्चों की देखभाल व परीक्षा के लिए अवकाश दिया जाता है। बीमारी के लिए अवकाश अधिक दिन का मिल जाता है, लेकिन परीक्षा की तैयारी के लिए अधिकतम 45 दिन का अवकाश तय है। शिक्षिकाएं बच्चों की परीक्षा से 15 दिन पहले व 30 अन्य दिन के अवकाश ले सकती हैं। पूरे सर्विस काल में 365 दिन का अवकाश लिया जा सकता है। जिन शिक्षिकाओं के बच्चे 12वीं पास कर गए हैं उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।
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वर्ष 2017-18 में एक दर्जन से अधिक शिक्षिकाओं ने चाइल्ड केयर लीव लीं। यह छुट्टियां बच्चों की परीक्षा के लिए ली गई हैं। इसके तहत 45 दिन का अवकाश मान्य है, लेकिन इन शिक्षिकाओं ने लगातार 365 दिन अवकाश ले लिए। विभाग के जरिये छुट्टियों का प्रकरण कई कार्यालयों से होकर गुजरा और उन छुट्टियों का भुगतान भी कर दिया गया।
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सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षिकाओं के बच्चे 12वीं पास करने वाले थे। उससे पहले चाइल्ड केयर लीव का लाभ उन्होंने नहीं लिया और उन्होंने बाद में एक साथ छुट्टियां ले लीं जबकि ऐसा नहीं होता। इस पर ऑडिट ने आपत्ति लगाई है। साथ ही संबंधित विभागों को चिट्ठी भेजी जा रही है। पुराने प्रकरण सामने आने के बाद ऑडिट ने वर्तमान चाइल्ड केयर लीव को भी गंभीरता से लिया है। कुछ केस नए भी सामने आए हैं।
365 दिन छुट्टी तो पढ़ाने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या रही
सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षिकाओं ने अपने बच्चों की परीक्षा के लिए लगातार 365 दिन के अवकाश ले लिए, लेकिन उनकी कक्षाओं में आ रहे दूसरे बच्चों की पढ़ाई का क्या हुआ। यदि सालभर शिक्षिकाओं ने अवकाश ले लिए तो उन शिक्षिकाओं का कोर्स किसने पूरा करवाया? यह सवाल खड़ा हो गया है। इसकी वैकल्पिक व्यवस्था क्या रही? यह भी देखना होगा।