अप्रैल से वाईफाई हो जाएगा लखनऊ का ये सरकारी कॉलेज
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राजधानी का गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर अप्रैल के दूसरे सप्ताह से पूरी तरह से वाई-फाई जोन में तब्दील हो जाएगा। कॉलेज प्राचार्य प्रो. जगबीर सिंह ने बताया कि इसके लिए एक निजी कंपनी को काम सौंपा गया है।
इसके बाद छात्र-छात्राएं हॉस्टल में रहते हुए भी इंटरनेट प्रयोग कर सकेंगे। इससे उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स तैयार करने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा कॉलेज में अब उच्चस्तरीय ई-जर्नल्स भी मंगवाए जा रहे हैं जो कि 15 दिन में कॉलेज लाइब्रेरी में उपलब्ध होंगे। साढ़े पांच लाख रुपये के ई-जर्नल्स का ऑर्डर दिया जा चुका है।
इनके आने से छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों को भी नॉलेज अपडेशन में फायदा मिलेगा। हालांकि, ई-जर्नल्स की सुविधा केवल लाइब्रेरी में ही उपलब्ध होगी। साथ ही कॉलेज की कम्प्यूटर लैब को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
यहां कुछ नए सॉफ्टवेयर्स लाए जा रहे हैं, जिससे स्टूडेंट्स ग्राफिक्स व अन्य काम बेहतर कर सकेंगे। कॉलेज ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान स्टूडेंट फैसिलिटीज को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई प्रावधान किए हैं।
50 लाख की लागत से कंस्ट्रक्शन यार्ड का होगा निर्माण
आर्किटेक्चर के स्टूडेंट्स को अपनी अपने कुछ मॉडल्स ओपन एरिया में ही तैयार करने पड़ते हैं। प्रो. जगबीर सिंह ने बताया कि अब आर्किटेक्चरल मॉडल्स बनाने के लिए कॉलेज में ही 50 लाख रुपये की कीमत से कंस्ट्रक्शन यार्ड बनवाया जाना है, जिसका निर्माण अप्रैल में शुरू होगा। इस यार्ड को टीन शेड से कवर किया जाएगा।
बरसात हो या गर्मी छात्र-छात्राओं का काम किसी भी मौसम में न रुकेगा न ही खराब होगा। इसके अलावा यार्ड कॉलेज की खूबसूरती में भी इजाफा करेगा। अभी तक कॉलेज में पार्किंग व्यवस्था भी नहीं है, इसकी वजह से कई बार गाड़ियां परिसर के अंदर मुख्य मार्ग पर ही खड़ी होती हैं। करीब तीस लाख रुपये की लागत से परिसर में पार्किंग निर्माण कराया जाएगा।
निशक्तजनों के लिए बनेंगे शौचालय
कॉलेज में जल्द ही 12 लाख रुपये की लागत से निशक्तजनों के लिए चार शौचालय बनवाए जाएंगे ताकि यदि कोई व्हीलचेयर पर भी आए तो आसानी से इनमें जा सके। इनके अलावा ऐसे स्पॉट भी चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां निशक्तजनों के लिए रैंप की जरूरत हो।
प्रो. जगबीर ने बताया कि कई बार यहां निशक्त स्टूडेंट्स भी आते हैं। ऐसे में उनको किसी तरह की समस्या न हो, इसीलिए यह व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा यदि कोई बाहरी निशक्तजन भी आता है तो उसे दिक्कत नहीं होगी। कॉलेज अपने परिसर में व्हीलचेयर की व्यवस्था करने पर भी विचार कर रहा है।