फेल हुए तो जिम्मेदार कौन, परीक्षा सिर पर किताबों का पता नहीं
- बिना किताब कैसे तैयारी करेंगे छात्र
- शिक्षक संगठनों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
- सिलेबस बदलने के कारण पुरानी किताबें भी हुई बेकार
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शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए शिक्षा विभाग स्कूलों में मासिक परीक्षा लेने का निर्णय लिया है। इस सत्र की पहली मासिक परीक्षा 25 मई से कराने का निर्णय लिया गया है, लेकिन अभी तक सरकारी स्कूलों में किताब ही नहीं पहुंचाई गई है।
ऐसे में छात्र तैयारी कैसे करेंगे और इन बिना तैयारी व पढ़े परीक्षा में पास होने पर ही शिक्षकों ने सवालिया निशान लगा दिया है। शिक्षा विभाग ने सत्र के शुरुआत में ही किताबें देने की घोषणा की थी। शिक्षा सत्र बीते एक माह से ज्यादा हो गया है, लेकिन किसी भी राजकीय प्राथमिक या उच्च विद्यालयों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।
शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक की नई किताबें अभी तक सभी स्कूलों में नहीं भेजी है। ऐसे में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) द्वारा मासिक परीक्षा की घोषणा से छात्र और शिक्षक दोनों चिंतित है। छात्रों के फेल होने का असर शिक्षकों के एसीआर पर पड़ेगा।
सिलेबस में हो चुका है बदलाव
इस वर्ष शिक्षा विभाग ने प्रदेश के स्कूलों का सिलेबस में बदलाव कर दिया है। बदलाव होने के कारण हर वर्ष की तरह इस बार उधारी की किताबों से भी काम नहीं चल पा रहा है। स्कूलों में एक माह से सिलेबस का कुछ भी नहीं करवाया गया है। ऊपर से शिक्षा विभाग ने 25 मई से मासिक टेस्ट की तारीख भी घोषित कर दी है।
अब यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जब बच्चों ने कुछ पढ़ा ही नहीं तो परीक्षा कहां से देंगे, जबकि इस मासिक टेस्ट का मूल्यांकन वार्षिक प्रगति रिपोर्ट में भी किया जाता है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य सचिव सत्य नारायण यादव का कहना है कि पहले किताबें लेट होती थी तो पुरानी किताबें मंगवाकर काम चला लेते थे, लेकिन इस बार सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है। इस वजह से पुरानी किताबों से भी सिलेबस आगे नहीं बढ़ा सकते। बच्चे खाली बैठे है। अगर अब किताबें भी आ जाए तो 15 दिन के अंदर बच्चों का पूरा सिलेबस कैसे होगा।
मासिक टेस्ट की तिथि की घोषित
शिक्षा विभाग को मालूम है कि किताबें नहीं भेजी गई है। इसके बावजूद टेस्ट की तारीख घोषित कर दी गई है। शिक्षा कैलेंडर में कोई बदलाव नहीं किया गया। 25 से 31 मई से मासिक टेस्ट लेने की घोषणा की गई है। सात मासिक टेस्ट के नंबर भी बच्चों की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट में जोड़े जाते हैं। इन सात मासिक टेस्ट के 20 प्रतिशत अंक होते हैं। 20 प्रतिशत अंक अर्ध वार्षिक परीक्षाए 40 प्रतिशत वार्षिक परीक्षा और 20 प्रतिशत अंक सतत परीक्षा मूल्यांकन के होते हैं।
फेल होने पर कौन होगा जिम्मेवार
स्कूलों के किताब बदल दिए गए है, लेकिन किताबें नहीं पहुंचाई गई है। इस पर सवाल उठाते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान विनोद ठकरान ने कहा कि डेढ़ माह तक विद्यार्थियों की पढ़ाई के नुकसान का कौन जिम्मेदार है? प्रतिनिधिमंडल कई बार शिक्षा अधिकारियों से जल्द किताबें भेजने के बारे में मिल चुका है। लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। यह भी नहीं बताया जा रहा कि किताबें क्यों नहीं रही हैं। शिक्षा विभाग बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने की बात कर रहा है, लेकिन एक माह तक किताबें नहीं मिलेंगी तो पढ़ाएंगे कैसे।
किताबों को लेकर मुख्यालय स्तर पर बात की गई है। 15 मई तक किताबों के आने की उम्मीद है। इस बार सीधे स्कूल में किताब पहुंच जाएगी। इसके लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के लिए भी कह दिया गया है।-प्रेमलता, जिला शिक्षा अधिकारी