फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   villagers ready to give land to government for free to make university

गुडग़ांव में सरकारी यूनिवर्सिटी के लिए आगे आए ग्रामीण, 250 एकड़ जमीन मुफ्त में देने को तैयार

Tue, 15 Mar 2016 06:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Tue, 15 Mar 2016 06:12 PM IST
विज्ञापन
villagers ready to give land to government for free to make university
जमीन

साइबर सिटी में एक अदद सरकारी यूनिवर्सिटी के लिए अब गांव मोकलवास के लोग आए है। पंचगांव के ग्वालियर गांव में यूनिवर्सिटी की स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने 250 एकड़ पंचायत की जमीन यूनिवर्सिटी के नाम देने की सहमति बनी है।

विज्ञापन


इसे लेकर सभी ग्रामीणों को केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री व सांसद राव इंद्रजीत सिंह को भी इस बाबत ज्ञापन देकर अपनी मांग रखी है। गांव के लोग अब इस मुद्दे को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन


बता दें कि गुडग़ांव में एक भी सरकारी यूनिवर्सिटी नहीं है। सभी सरकारी कॉलेज महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) रोहतक से संबद्ध है। इसे लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है।करीब दस महीने पहले गुडग़ांव के सेक्टर-14 स्थित गर्वमेंट गल्र्स कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 100 एकड़ में यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन बीते दस महीने में दस कदम भी यूनिवर्सिटी का काम आगे नहीं बढ़ा है। शहर में जगह की किल्लत बताई गई है। इसे देखते हुए गांव के लोग अब आगे आए है। उन्होंने मुफ्त में जगह के साथ अपने स्तर पर हर मदद देने की हामी भरी है। इस बाबत सांसद को पत्र भी लिखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

अर्धसैनिक बल एकता संघर्ष मंच के अध्यक्ष व स्थानीय निवासी रामसिंह का कहना है कि गांव के पास से केएमपी गुजर रही है। गुडग़ांव शहरी क्षेत्र में भले ही यूनिवर्सिटी के लिए पर्याप्त जगह नहीं हो, लेकिन गांव की पंचायत के पास पर्याप्त जमीन है। आपसी सहमति के बाद जमीन सरकार को देने के लिए पंचायत तैयार है। बता दें कि शहर में यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर तीनों कॉलेज के छात्र आंदोलन चला चुके हैं। सोमवार को एनएसयूआई ने भी लघु सचिवालय पर धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा था।


यूनिवर्सिटी से क्या होगा फायदा
शिक्षाविद् डॉ. अशोक दिवाकर का कहना है कि यूनिवर्सिटी मिलने से कम फीस में छात्रों को उच्च शिक्षा की राह आसान हो जाएगी। शहर में ही विभिन्न विषयों में एमफिल, पीएचडी कर सकेंगे। अभी तक कॉलेजों में छात्रों को केवल पारंपरिक कोर्स ही पढने को मिल रही है। यूनिवर्सिटी स्थापित होने के बाद कई नए कोर्स शुरू हो सकते है। विज्ञान के विषयों में रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यूनिवर्सिटी से शहर के कॉलेजों को संबद्धता मिलने से काम काज आसान होगा। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) रोहतक का बोझ कम होगा।


अभी क्या है स्थिति
एमडीयू से संबंधित शहर के तीन कॉलेजों मशें करीब 40 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में आठ प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। जिसमें केवल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई होती है। जिसके लिए मोटी फीस ली जाती है। दक्षिण हरियाणा में कोई सरकारी यूनिवर्सिटी नहीं होने से छात्र रोहतक से सभी कॉलेजों की संबद्धता है। कोई भी काम कराने के लिए रोहतक जाना होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed