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UPSC: ट्राइसिटी के 4 टापर्स से लीजिए सफलता के टिप्स
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Wed, 11 May 2016 12:12 PM IST
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नाजुक कुमार, यूपीएसी में 58 वां रैंक
- फोटो : amar ujala
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पूर्व गृह सचिव की बेटी नाजुक उन्हीं केनक्शे कदम पर
चंडीगढ़ के पूर्व गृह सचिव अनिल कुमार की बेटी नाजुक कुमार ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूपीएससी में सफलता हासिल की है। उसको 58वां रैंक मिला है। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद नाजुक ने जॉब शुरू कर दी। पिछले एक साल से नाजुक सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। अनिल कुमार ने बताया कि नाजुक ने एक साल की तैयारी के बाद ही यह रैंक हासिल किया है। उन्होंने भी दिल्ली आईआईटी से पढ़ाई की थी।
टॉपर ने दिए टिप्स
-जो आप बनना चाहते हैं पहले उसे तय करें।
-जीवन में हर चीज का बैलेंस बनाकर चलना चाहिए।
-सभी विषयों को बराबर का समय दें।
-असफलता से परेशान नहीं होना।
-रूटीन में अखबार पढ़ने की आदत डालें।
-तैयारी करते हुए खुद के नोट्स तैयार करें।
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चंडीगढ़ के पूर्व गृह सचिव अनिल कुमार की बेटी नाजुक कुमार ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूपीएससी में सफलता हासिल की है। उसको 58वां रैंक मिला है। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद नाजुक ने जॉब शुरू कर दी। पिछले एक साल से नाजुक सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। अनिल कुमार ने बताया कि नाजुक ने एक साल की तैयारी के बाद ही यह रैंक हासिल किया है। उन्होंने भी दिल्ली आईआईटी से पढ़ाई की थी।
टॉपर ने दिए टिप्स
-जो आप बनना चाहते हैं पहले उसे तय करें।
-जीवन में हर चीज का बैलेंस बनाकर चलना चाहिए।
-सभी विषयों को बराबर का समय दें।
-असफलता से परेशान नहीं होना।
-रूटीन में अखबार पढ़ने की आदत डालें।
-तैयारी करते हुए खुद के नोट्स तैयार करें।
आर्तिका बोलीं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
यूपीएससी में डॉक्टर आर्तिका ने चौथा रैंक हासिल किया
- फोटो : amar ujala
वाराणसी। सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश भर में चौथा स्थान पाने वाली आर्तिका शुक्ला अपनी उपलब्धि से गदगद हैं। अमर उजाला से बातचीत में आर्तिका ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, इसी मंत्र को ध्यान में रखकर उन्होंने परीक्षा की तैयारी की था। जो नतीजा आया, उससे संतुष्ट हूं। मां लीना शुक्ला की प्रशंसा करते हुए कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान जब भी मन विचलित हुआ, मां का सहारा मिला। मां ने कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी।
आर्तिका ने कहा कि युवाओं में असीम ऊर्जा का भंडार है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके अभाव में बहुत से लोग लक्ष्य से भटक जाते हैं। कहा कि चिकित्सकीय सेवा के दौरान जो समाजसेवा का अनुभव मिला है, प्रशासनिक सेवा में उसका बहुत लाभ मिलेगा। बताया कि चार-पांच घटें की पढ़ाई कर उन्होंने यह सफलता हासिल की है। कहा कि समाज में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जो लड़कियां नहीं कर सकती हैं। आज सेना, प्रशासनिक, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्र में लड़कियां लड़कों के बराबर हैं।
आर्तिका ने कहा कि युवाओं में असीम ऊर्जा का भंडार है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है। इसके अभाव में बहुत से लोग लक्ष्य से भटक जाते हैं। कहा कि चिकित्सकीय सेवा के दौरान जो समाजसेवा का अनुभव मिला है, प्रशासनिक सेवा में उसका बहुत लाभ मिलेगा। बताया कि चार-पांच घटें की पढ़ाई कर उन्होंने यह सफलता हासिल की है। कहा कि समाज में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जो लड़कियां नहीं कर सकती हैं। आज सेना, प्रशासनिक, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्र में लड़कियां लड़कों के बराबर हैं।
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स्पेशल चांस मेरे लिए गोल्डन चांस साबित: संदीप सिंह
संदीप सिंह, 143 रैंक, यूपीएससी
- फोटो : amar ujala
श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज-26 के प्रो. संदीप सिंह ने यूपीएससी में 143वां रैंक हासिल किया है। प्रो. संदीप ने बताया कि यूपीएससी ने 2011 वाले स्टूडेंट्स को 2015 में स्पेशल चांस दिया था। यह स्पेशल चांस उनके लिए गोल्डन चांस साबित हुआ।
चांस मिलने केबाद उन्होंने इसे गोल्डन बनाने केलिए जीतोड़ मेहनत शुरू कर दी थी। प्रो. सिंह ने बताया कि वह बच्चों को पढ़ाने के बाद जितना भी समय मिलता था उसमें अपनी तैयारी करने में जुट जाते थे। मूल रूप से खन्ना के रहने वाले प्रो. सिंह 2009 से चंडीगढ़ में इंग्लिश पढ़ाते हैं। यूपीएससी में भी प्रो. सिंह का विषय इंग्लिश लिटरेचर ही रहा।
पीजीआई की नर्स ने मारी बाजी
पीजीआई की नर्स रह चुकी ज्योतिंद्र कौर बाजवा ने यूपीएससी में 256वां रैंक हासिल किया है। इससे पहले बाजवा पीसीएस पास कर चुकी है। हालांकि अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई थी। सिविल सर्विसेज की तैयारी को पूरा समय देने केलिए बाजवा ने 2015 में पीजीआई की नर्स की नौकरी छोड़ दी थी। बाजवा ने पीजीआई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन से ग्रेजुएशन करने केबाद 2009 में यहीं नर्सिंग की नौकरी शुरू कर दी थी। बाजवा ने बताया कि पहले कुछ पारिवारिक दिक्कतें थीं, जिस कारण जॉब करनी पड़ी। दिक्कतें दूर होने पर उसने नौकरी छोड़कर पढ़ाई शुरू की। नौकरी के समय भी वह रोजाना एक -दो घंटे पढ़ती थी। नौकरी केबाद फुल टाइम पढ़ाई की और एक साल कोचिंग भी ली। बाजवा ने बताया कि यह उसका तीसरा अटेंप्ट था। बाजवा मूल रूप से बटाला की रहने वाली है।
चांस मिलने केबाद उन्होंने इसे गोल्डन बनाने केलिए जीतोड़ मेहनत शुरू कर दी थी। प्रो. सिंह ने बताया कि वह बच्चों को पढ़ाने के बाद जितना भी समय मिलता था उसमें अपनी तैयारी करने में जुट जाते थे। मूल रूप से खन्ना के रहने वाले प्रो. सिंह 2009 से चंडीगढ़ में इंग्लिश पढ़ाते हैं। यूपीएससी में भी प्रो. सिंह का विषय इंग्लिश लिटरेचर ही रहा।
पीजीआई की नर्स ने मारी बाजी
पीजीआई की नर्स रह चुकी ज्योतिंद्र कौर बाजवा ने यूपीएससी में 256वां रैंक हासिल किया है। इससे पहले बाजवा पीसीएस पास कर चुकी है। हालांकि अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई थी। सिविल सर्विसेज की तैयारी को पूरा समय देने केलिए बाजवा ने 2015 में पीजीआई की नर्स की नौकरी छोड़ दी थी। बाजवा ने पीजीआई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन से ग्रेजुएशन करने केबाद 2009 में यहीं नर्सिंग की नौकरी शुरू कर दी थी। बाजवा ने बताया कि पहले कुछ पारिवारिक दिक्कतें थीं, जिस कारण जॉब करनी पड़ी। दिक्कतें दूर होने पर उसने नौकरी छोड़कर पढ़ाई शुरू की। नौकरी के समय भी वह रोजाना एक -दो घंटे पढ़ती थी। नौकरी केबाद फुल टाइम पढ़ाई की और एक साल कोचिंग भी ली। बाजवा ने बताया कि यह उसका तीसरा अटेंप्ट था। बाजवा मूल रूप से बटाला की रहने वाली है।
मंजिल मिलने तक जुटे रहना जरूरी : गजल भारद्वाज
गजल भारद्वाज, यूपीएससी में 40वां रैंक
- फोटो : amar ujala
चंडीगढ़। जिंदगी में मैने एक ही आईएएस बनने का लक्ष्य रखा था। सिविल सर्विसेज में लिए चौथी बार में सफलता मिली। लेकिन मैं लक्ष्य से भटकी नहीं। मेरी नजर में सफलता पाने का एक ही मूलमंत्र है, मंजिल मिलने तक अुपनी कोशिशें जारी रखो। यह कहना है सिविल सर्विसेज में ऑल इंडिया में 40वां रैंक पाने वाली गजल भारद्वाज का। मूल रूप से रूड़की निवासी गजल पिछले दो साल से चंडीगढ़ में कोचिंग ले रही थीं। गजल सेक्टर-32 आईएएस स्टडी सर्कल में हिस्ट्री की कोचिंग दे रही थीं।
गजल ने सिविल इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। सिविल सर्विस में इन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट हिस्ट्री रखा। आईएएस की तैयारी में वह प्रो.अनिल कुमार का विशेष योगदान मानती हैं। इनके पिता सम्राट भारद्वाज रिटायर्ड लेक्चरर और मां अलका गृहणी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें सबसे अधिक उनके पेरेंट्स ने मोटिवेट किया। हर रोज 9 से 10 घंटे की तैयारी करती थी।
गजल ने सिविल इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। सिविल सर्विस में इन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट हिस्ट्री रखा। आईएएस की तैयारी में वह प्रो.अनिल कुमार का विशेष योगदान मानती हैं। इनके पिता सम्राट भारद्वाज रिटायर्ड लेक्चरर और मां अलका गृहणी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें सबसे अधिक उनके पेरेंट्स ने मोटिवेट किया। हर रोज 9 से 10 घंटे की तैयारी करती थी।