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एक वेटर की बेटी, एक दिहाड़ीदार की, दोनों गरीब, नतीजा टॉप
रिंपी गुप्ता/अमर उजाला, पटियाला
Updated Sat, 14 May 2016 12:30 PM IST
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पंजाब बोर्ड की 12वीं क्लास रिजल्ट की टॉपर गर्ल्स
- फोटो : अमर उजाला
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एक वेटर की बेटी, दूसरी दिहाड़ीदार की। दोनों के परिवार बेहद गरीब, फिर भी लड़कियों ने 12वीं के रिजल्ट में टॉप किया। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो फिर कोई भी दिक्कत आड़े नहीं आती। यह बात सरकारी गर्ल्स मल्टीपपर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल माडल टाउन की छात्राओं पूजा रानी और रिंकी रानी पर खरी उतरती है। दोनों बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पास न तो यूनिफार्म और न ही कापियां-किताबें खरीदने के पैसे थे।
फिर भी दोनों पढ़ीं और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को बारहवीं के घोषित नतीजों में पूजा रानी ने जहां वोकेशनल स्ट्रीम में 96.4 प्रतिशत अंक लेकर पंजाब में टाप किया है वहीं रिंकी रानी ने 95.78 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा स्थान हासिल किया है। पूजा के पिता वेटर का काम करते हैं जबकि रिंकी के पिता दिहाड़ीदार हैं। स्कूल प्रिंसिपल बलवीर सिंह ने अपने स्कूल की छात्राओं की इस सफलता पर खुशी जताई है।
अमर उजाला से बातचीत में पूजा और रिंकी दोनों ने ही कहा कि वे आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं, ताकि माता-पिता के दुख दूर कर सकें। मूल रूप से यूपी की रहने वाली पूजा ने बताया कि पिता जोगिंदर सिंह वेटर का काम करते हैं, जबकि मां शकुंतला लोगों के घरों में साफ-सफाई व बर्तन साफ करने का काम करती है। आर्थिक तंगियों के बावजूद माता-पिता ने उसे पढ़ाया। स्कूल की यूनिफार्म, किताबें-कापियां खरीदने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन हौसला नहीं छोड़ा और पढ़ाई में खूब मेहनत की। स्कूल से घर आकर छोटे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी, ताकि घर में कुछ पैसा आ सके।
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उसके बाद खुद पढ़ती थी। रिंकी रानी ने कहा कि पिता राम सरूप दिहाड़ीदार हैं और घर में खाने वाले कई हैं। उसके चार बहनें व एक भाई है। गुजारा ही बड़ी मुश्किल से होता है, लेकिन फिर भी पिता व मां शांति देवी ने उसे पढ़ाया। उसने भी खूब मेहनत की, ताकि माता-पिता का सपना पूरा कर सके। उसे अपनी सफलता पर बेहद खुशी हो रही है। बस अब यही सपना है कि आईएएस अधिकारी बनकर माता-पिता की गरीबी दूर कर सकूं।
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फिर भी दोनों पढ़ीं और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को बारहवीं के घोषित नतीजों में पूजा रानी ने जहां वोकेशनल स्ट्रीम में 96.4 प्रतिशत अंक लेकर पंजाब में टाप किया है वहीं रिंकी रानी ने 95.78 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा स्थान हासिल किया है। पूजा के पिता वेटर का काम करते हैं जबकि रिंकी के पिता दिहाड़ीदार हैं। स्कूल प्रिंसिपल बलवीर सिंह ने अपने स्कूल की छात्राओं की इस सफलता पर खुशी जताई है।
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अमर उजाला से बातचीत में पूजा और रिंकी दोनों ने ही कहा कि वे आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं, ताकि माता-पिता के दुख दूर कर सकें। मूल रूप से यूपी की रहने वाली पूजा ने बताया कि पिता जोगिंदर सिंह वेटर का काम करते हैं, जबकि मां शकुंतला लोगों के घरों में साफ-सफाई व बर्तन साफ करने का काम करती है। आर्थिक तंगियों के बावजूद माता-पिता ने उसे पढ़ाया। स्कूल की यूनिफार्म, किताबें-कापियां खरीदने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन हौसला नहीं छोड़ा और पढ़ाई में खूब मेहनत की। स्कूल से घर आकर छोटे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी, ताकि घर में कुछ पैसा आ सके।
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उसके बाद खुद पढ़ती थी। रिंकी रानी ने कहा कि पिता राम सरूप दिहाड़ीदार हैं और घर में खाने वाले कई हैं। उसके चार बहनें व एक भाई है। गुजारा ही बड़ी मुश्किल से होता है, लेकिन फिर भी पिता व मां शांति देवी ने उसे पढ़ाया। उसने भी खूब मेहनत की, ताकि माता-पिता का सपना पूरा कर सके। उसे अपनी सफलता पर बेहद खुशी हो रही है। बस अब यही सपना है कि आईएएस अधिकारी बनकर माता-पिता की गरीबी दूर कर सकूं।