फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   private publishers book in schools after court restriction

बैन के बावजूद स्कूलों में बिक रहीं वही किताबें

Fri, 08 Apr 2016 02:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Fri, 08 Apr 2016 02:37 PM IST
विज्ञापन
private publishers book in schools after court restriction
- फोटो : Amar Ujala

निजी स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावक बेबस है। स्कूल प्रबंधक पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को भी नहीं मान रहे हैं। स्कूलों में किताबों की प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबों की रोक के आदेश की अनदेखी की जा रही है। व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक के बावजूद किताब दुकान खोलकर अभिभावकों की जेब ढीली कराई जा रही है। स्कूलों के आगे हरियाणा शिक्षा विभाग और सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) भी मौन है।

विज्ञापन


दरअसल, हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अगले सत्र से सभी कक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबें लागू करवाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने मामले में सीबीएसई को तलब भी किया था। लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूलों की ओर से अब भी प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों से कहा जा रहा है। स्कूलों की दुकान चलाने के लिए वहां दुकानदार ही बैठा दिए गए हैं। इन दिनों स्कूलों में यह देखा जा सकता है। शहर के सभी बड़े निजी स्कूल खुद ही बुक सेट बेच रहे हैं तो कुछ स्कूलों ने दुकानों से साथ सांठगांठ कर रखी है।
विज्ञापन


प्राइवेट पब्लिकेशन से कमा मोटा मुनाफा
शहर के निजी स्कूल प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें लगवाकर मोटा कमीशन वसूल रहे हैं। एनसीईआरटी की छठीं से 8वीं क्लास का बुक सेट 500 से 700 रुपये में आसानी से मिल जाता है। लेकिन प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों का सेट पांच से छह हजार में आता है। सेक्टर-12 स्थित एक निजी स्कूल में 5वीं कक्षा की किताबों का सेट 4246 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। शहर के कान्वेंट स्कूल भी अपनी मर्जी से किताबों का चयन करते हैं। एंट्री लेवल की किताबों का सेट दो हजार में मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल रचते है पूरी कहानी
नए सत्र आने से पहले ही किताबों के बदलने के लिए स्कूलों में पूरी कहानी लिखी जाती है। स्कूलों द्वारा कमेटी बनाई जाती है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रकाशकों की लाइन स्कूलों में लगनी शुरू हो जाती है। कमेटी अलग-अलग प्रकाशकों की किताबें जांचती है। इस बारे में पीटीएम में अभिभावकों की जानकारी दी जाती है।

उन्हें कहा जाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। नई चीजें किताबों में जुड़ रही है। छात्रों को अपडेट करने के लिए जरूरी है कि उन्हें नई जानकारी दी जाए। नई किताबें पढ़ाई जाए। उधर, जो प्रकाशक अधिक कमीशन या गिफ्ट देने के लिए राजी होते हैं, उनकी किताबें लगा दी जाती है।

सीधे स्कूल से करते हैं संपर्क
किताब बिक्री के लिए दुकान संचालको से संपर्क न कर सीधे निजी स्कूलो के संचालको से संपर्क करते है। कमीशन के आधार पर पुस्तकें लागू करने की सौदेबाजी की जाती है। जो प्रकाशक अधिक कमीशन देता है उसी की पुस्तके संचालक अपने स्कूल में लागू करते है। प्रकाशक से डील फाइनल होने के बाद पुस्तकों को बाजार में किसी एक दुकान पर बिक्री के लिए रखवाया जाता है। जो दुकानदार उन पुस्तको को बेचता है उसे भी दस फीसदी तक का कमीशन मिलता है।

यशपाल यादव, अध्यक्ष, हरियाणा शिक्षण संगठन: छात्रों और अभिभावकों को किताब खरीदने के लिए बाजार में भटकना न पड़े। एक ही जगह पर सभी चीजे आसानी से उपलब्ध हो जाए, इसके लिए दुकानदारों को अलॉट किया जाता है। इसमें सीधे स्कूलों का कोई रोल नहीं होता है। हर साल प्रकाशक किताबों को अपडेट करते है। नई चीजें जोड़ते हैं। ऐसे में पुरानी किताबें आउटडेटेड हो जाती है।


एमएल कौशिक, निदेशक, हरियाणा स्कूल शिक्षा: निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के लिए हाईकोर्ट ने विभाग को नहीं सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। अपने स्तर पर शिक्षा विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता है। अभिभावक विभाग से शिकायत करें, फिर कार्रवाई की जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed