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पब्लिक स्कूलों की मनमानी से पब्लिक त्रस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 May 2016 03:42 AM IST
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स्कूल
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ऑल उत्तराखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पब्लिक स्कूलों पर अभिभावकों को लूटने और बच्चों व अभिभावकों पर दबाव बनाकर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।
राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में एसोसिएशन ने पब्लिक स्कूलों पर मनमानी फीस वृद्धि का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार कोई भी पब्लिक स्कूल तीन वर्ष से पहले फीस में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकता। लेकिन प्रदेश के ज्यादातर स्कूल हर साल मनमर्जी से फीस बढ़ा रहे हैं।
किताबों और ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों की जमकर जेब काटी जा रही है। स्कूल काउंटर और खास दुकान से किताबें व ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जाता है।
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मोटा पैसा वसूल रहे स्कूल
इसके अलावा बिल्डिंग फंड, रिएडमिशन, फेस्ट, पिकनिक और डेवलपमेंट के नाम पर अभिभावकों से हर मोटा पैसा वसूला जा रहा है। स्कूलों में पढ़ाई के बजाय बच्चों को ट्यूशन के लिए भी मजबूर किया जा रहा है। लाखों रुपये फीस वसूलने वाले कई निजी स्कूल कोचिंग संस्थानों के साथ मिलकर अभिभावकों को लूट रहे हैं।
कोचिंग के नाम पर भी हर साल लाखों रुपये लिए जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की, ताकि अभिभावकों को लाभ मिल सके। ज्ञापन देने वालों में केंद्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल, महासचिव सुदेश उनियाल, सचिव आरिफ खान समेत अन्य शामिल रहे।
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राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में एसोसिएशन ने पब्लिक स्कूलों पर मनमानी फीस वृद्धि का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार कोई भी पब्लिक स्कूल तीन वर्ष से पहले फीस में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकता। लेकिन प्रदेश के ज्यादातर स्कूल हर साल मनमर्जी से फीस बढ़ा रहे हैं।
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किताबों और ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों की जमकर जेब काटी जा रही है। स्कूल काउंटर और खास दुकान से किताबें व ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जाता है।
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मोटा पैसा वसूल रहे स्कूल
इसके अलावा बिल्डिंग फंड, रिएडमिशन, फेस्ट, पिकनिक और डेवलपमेंट के नाम पर अभिभावकों से हर मोटा पैसा वसूला जा रहा है। स्कूलों में पढ़ाई के बजाय बच्चों को ट्यूशन के लिए भी मजबूर किया जा रहा है। लाखों रुपये फीस वसूलने वाले कई निजी स्कूल कोचिंग संस्थानों के साथ मिलकर अभिभावकों को लूट रहे हैं।
कोचिंग के नाम पर भी हर साल लाखों रुपये लिए जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की, ताकि अभिभावकों को लाभ मिल सके। ज्ञापन देने वालों में केंद्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल, महासचिव सुदेश उनियाल, सचिव आरिफ खान समेत अन्य शामिल रहे।