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हिमाचल में ही में प्लास्टिक टेक्नालॉजी में डिप्लोमा कर पाएंगे युवा

Wed, 27 Apr 2016 12:08 AM IST
हेमंत शर्मा/अमर उजाला, बददी (सोलन)
हेमंत शर्मा/अमर उजाला, बददी (सोलन) Updated Wed, 27 Apr 2016 12:08 AM IST
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Now Plastic Processing Technology course in himachal.
बद्दी औद्योगिक शहर में सीपेट की 22वीं इकाई स्थापित की जा रही है। - फोटो : Demo pic

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट) के माध्यम से हिमाचल के उद्योगों को जल्द ही प्रशिक्षित कामगार मिल सकेंगे। स्टेट गवर्नमेंट स्पांसरशिप के तहत सीपेट में युवाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे प्रदेश के शिक्षित युवाओं को उद्योगों में कुशल कामगार के तौर पर आसानी से रोजगार और बेहतर वेतन प्राप्त हो सकेगा।

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सीपेट में जमा दो के बाद जेईई टेस्ट के माध्यम से प्रवेश लिया जा सकता है। जुलाई महीने में इस टेस्ट के बाद बद्दी स्थित सीपेट में प्रवेश लिया जा सकेगा। जिसमें दो साल के डीपीटी कोर्स (डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी) और डेढ़ साल के पीपीटी कोर्स (प्लास्टिक प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी) कोर्स करवाए जाएंगे। बद्दी औद्योगिक शहर में सीपेट की यह 22वीं इकाई स्थापित की जा रही है।
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औद्योगिक हब बद्दी में बुधवार को इस संस्थान की आधारशिला केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार रखेंगे। प्रदेश के इस पहले प्रशिक्षण संस्थान को केंद्र और राज्य सरकार की पचास-पचास फीसदी की भागीदारी के साथ 40 करोड़ रुपये की लागत से संड़ोल पंचायत की करीब 44 बीघा सरकारी भूमि पर विकसित किया जा रहा है।
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स्किल डेवलपमेंट का प्रशिक्षण होगा निशुल्क
सीपेट की ओर से राज्य सरकार के स्पांसरशिप प्रोग्राम के तहत संस्थान में दो तरह का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें संस्थान तीन माह व छह माह के प्रशिक्षण की सुविधा देगा। ट्रेनिंग में मशीनिस्ट और आपरेटर का प्रशिक्षण मुख्य रहेगा। प्रशिक्षु संख्या को लेकर संस्थान की ओर से कोई सीमा नहीं रखी गई है।


हिमाचली उद्योग जगत को मिलेगा लाभ
अप्रशिक्षित कामगारों की समस्या से जूझ रहे हिमाचली उद्योगों को इस संस्थान से संजीवनी मिलेगी। प्रदेश में करीब चार हजार उद्योग कार्यरत हैं। इसके बावजूद प्रदेश में सीपेट की तरह औद्योगिक प्रशिक्षण देने वाले संस्थान न होने से उद्योगों को अकुशल कामगारों के साथ ही कार्य करना पड़ता है। सीपेट के माध्यम से कामगारों को प्रशिक्षण मिलने से उद्योगों को काफी लाभ मिलेगा।

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