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स्कूलों में खेल : पढ़ाई कहीं से, परीक्षा कहीं और से

Sat, 09 Apr 2016 01:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 09 Apr 2016 01:50 PM IST
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non aided schools playing big game of fraudulent
- फोटो : अमर उजाला

साइबर सिटी में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों का जाल बढने के साथ नया खेल शुरू हो गया है। नया सत्र शुरू होने के साथ ही पढ़ाई कहीं से और परीक्षा कहीं और से दिलाने का काम चालू हो गया है।

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शिक्षा विभाग की अनदेखी की वजह से इस तरह के स्कूल तेजी से बढ़ रहे हैं। विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने से स्कूलों को शह मिल रही है। ऐसे में नुकसान अभिभावकों और छात्रों को हो रहा है, लेकिन इस असर भविष्य में दिखाई देता है। शुरुआत में कम स्कूल फीस की वजह से उन्हें भी समझ नहीं आता है।
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शिक्षा विभाग ने नए स्कूल खोलने के लिए मानक तय कर रखा है। लेकिन मानक को नजरअंदाज कर महज चार से पांच कमरों में किराए के मकान लेकर शहर के कई इलाके में गैर-मान्यता स्कूल खुल रहे हैं। मारुतिकुंज, जैकबपुरा, माता कॉलोनी, भोंडसी, फाजिलपुर, सोहना रोड, पटौदी में सबसे ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त चल रहे हैं। इनके विज्ञापन शहर के गली मोहल्ले में देखे जा सकते हैं।
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बता दें कि सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबद्धता प्राप्त करने के लिए करीब एक एकड़ जमीन की जरूरत है, जबकि हरियाणा बोर्ड से प्राइमरी स्कूल के लिए मान्यता प्राप्त करने के लिए आधा एकड़, माध्यमिक स्कूल के लिए एक एकड़ और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के लिए करीब दो एकड़ जमीन की जरूरत है। वहीं, शिक्षा बोर्ड ने अभी नए स्कूल खोलने के लिए विराम लगा दिया है।

कैसे चलता है ऐसे स्कूलों का खेल
गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल किसी मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ गठजोड़ कर अपना खेल चलाते हैं। दोनों स्कूलों में बच्चों का नाम होता है। पढ़ाई तो गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल में करते है, लेकिन जब बोर्ड परीक्षा या रजिस्ट्रेशन की बारी आती है तो बोर्ड के मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इस गठजोड़ के बदले मान्यता प्राप्त स्कूल गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल से प्रति छात्र के हिसाब से फीस वसूलते हैं, जो पूरी तरह से स्कूल प्रबंधक की जेब में जाता है। मान्यता प्राप्त स्कूल केवल रजिस्टर में बच्चे का नाम दिखाकर अन्य खर्च मसलन कक्षा लगाने, पढ़ाने और अन्य जिम्मेवारी से बच जाते है। किसी तरह के क्रॉस चेक नहीं इस तरह का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि हाल ही में बोर्ड ने क्रॉस चेक की व्यवस्था की है।

क्या है नुकसान
गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल में एक बार दाखिला लेने के बाद छात्र बुरी तरह से फंस जाता है। स्कूल छोड़कर किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में जाने में बहुत दिक्कत होती है। गैर-मान्यता होने की वजह से स्कूल द्वारा दी गई सर्टिफिकेट फर्जी मान लिया जाता है, जिससे आगे दाखिला लेने में दिक्कत होती है। ऐसी सूरत में मजबूरन उसी स्कूल में रहकर छात्र को पढना होता है।


एमएल कौशिक, निदेशक, हरियाणा शिक्षा विभाग: विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। अगर इस तरह के स्कूल चल रहे हैं तो इस पर गंभीरता से लिया जाएगा। उसकी संबद्धता जांच कराई जाएगी।

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