एलयू: आखिर कहां जाती है सुविधा के नाम पर वसूली गई फीस?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ विश्वविद्यालय को फीस की वसूली की जितनी चिंता होती है, उतनी फिक्र सुविधाएं देने में नहीं दिखती। एक अनुमान के मुताबिक करीब सवा करोड़ रुपये हर साल सुविधाओं के नाम पर विश्वविद्यालय वसूलता है। पर, साल भर कुछ करता नहीं और रकम उसके खाते में चली जाती है।
मेडिकल रिलीफ फंड के लिए इंश्योरेंस के नाम पर करीब 40 लाख रुपये वसूले हैं, पर इंश्योरेंस कौन-सी एजेंसी करेगी, इसका नाम तक तय नहीं है। साफ है कि आज की तारीख में अगर किसी स्टूडेंट के साथ कोई दुर्घटना घट जाती है तो फीस जमा करने के बावजूद उसे मेडिकल रिलीफ फंड से कोई सहायता नहीं मिलेगी।
यही नहीं निर्बल छात्र सहायता कोष, लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव, डेलीगेसी, गेम्स के नाम पर हर साल लाखों रुपये वसूले जाते हैं। जानिए किन-किन मदों में कैसे हो रही वसूली...
मेडिकल रिलीफ फंड
एलयू मेडिकल रिलीफ फंड के नाम पर हर स्टूडेंट से सालाना 200 रुपये फीस लेता है। परिसर में इस समय औसतन 20 हजार स्टूडेंट हैं। यानी हर साल करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा होते हैं। विवि ने अभी स्टूडेंट्स का बीमा कराने के लिए एजेंसी तक तय नहीं की है। विवि पिछले साल तक केवल फर्स्ट ईयर वाले स्टूडेंट्स का बीमा ही कराता रहा है। जबकि फीस की वसूली सभी से की जा रही है।
खेल-कूद सहायता कोश
यहां भी खेल होता है। विवि स्टूडेंट्स को गेम्स सुविधा देने के लिए 125 रुपये वसूलता है। यह रकम भी करीब 25 लाख रुपये हो जाती है। पर आलम यह है कि फिजिकल एजूकेशन विभाग के स्टूडेंट्स भी सुविधाओं के लिए तरसते रहते हैं। साधारण स्टूडेंट को तो यह भी नहीं पता कि उन्हें खेलने के लिए खेल सामग्री भी मिल सकती है।
निर्बल छात्र सहायता कोष
योजना के अनुसार सहायता पाने के लिए स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालय में काम करना होगा। प्रचार-प्रसार न होने की वजह से पहले साल विवि के करीब 20 हजार स्टूडेंट्स में से केवल 24 ने योजना के लिए आवेदन किया। इनमें से केवल 5 ही विवि के नियमों के खांचे में फिट हो सके। पिछले साल इनकी संख्या 50 के करीब रही। इस साल नियम बदलने की बात कही गई। पर, अभी तक नए नियमों का अता-पता नहीं है।
स्टूडेंट यूनियन फीस
विव प्रशासन छात्रसंघ चुनाव के नाम पर हर स्टूडेंट से 75 रुपये फीस वसूलता है। विश्वविद्यालय में वर्ष 2005 तक छात्रसंघ चुनाव हुए थे। उसके बाद मायावती के शासनकाल में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लग गई थी। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर छात्रसंघ बहाली का आश्वासन दिया गया लेकिन चुनाव आज तक नहीं हो पाए। छात्रसंघ चुनाव पर भले ही रोक लगी हुई थी, पर लविवि लगातार स्टूडेंट्स से छात्रसंघ के नाम पर फीस की वसूली करता रहा। इस तरह से विवि हर साल करीब 15 लाख रुपये छात्र संघ चुनाव के हजम कर रहा है।
डेलीगेसी फीस
विवि डे स्कॉलर स्टूडेंट के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में डेलीगेसी संचालित करता है। इनकी हालत बेहद खराब है। डेलीगेसी में स्टूडेंट्स को समाचार पत्र व पत्रिकाएं तथा स्पोर्ट्स सुविधा उपलब्ध करानी होती है। यहां तक कि विवि की खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए स्टूडेंट्स को हॉस्टल या फिर डेलीगेसी का सदस्य रहना अनिवार्य है। इसके बावजूद हर साल स्टूडेंट्स से वसूल की गई 10 लाख रुपये कहां खर्च होती है, कहीं नजर नहीं आती है।
सत्र शुरू होने से पहले हो जानी चाहिए थी बैठक
लविवि ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार सिंह को कुलसचिव जैसा अहम पद भी दे रखा है। दो पद होने की वजह से वे मेडिकल रिलीफ फंड के साथ ही पूअर बॉयज फंड के लिए प्रस्तावित बैठक का आयोजन नहीं कर सके हैं। जबकि इन दोनों की व्यवस्था सत्र शुरू होने से पहले हो जानी चाहिए थी।
सुविधाओं पर जल्द ही हो जाएगा फैसला
विवि पूअर बॉयज फंड और मेडिकल रिलीफ फंड पर जल्द ही निर्णय लेगा। यह बड़ा मामला है इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले सकते। मेडिकल इंश्योरेंस एक साल के लिए मिलेगा भले ही किसी अवधि के लिए हो। छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट का स्टे है। बाकी सुविधाओं का लाभ स्टूडेंट्स को दिया जा रहा है। वे इन सुविधाओं के लिए संपर्क कर सकते हैं।
प्रो. एनके पांडेय
प्रवक्ता, लविवि