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एचपीयू के हाल, रेस्ट रूम में हो रही एमबीए की पढ़ाई
नरेंद्र एस. कंवर/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:41 AM IST
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कोई सोफे पर, कोई टेबल पर तो कोई स्टूल लेकर पढ़ाई कर रहा है। दस छात्रों की क्षमता वाले इस रूम में 44 छात्र बैठकर क्लास लगाते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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नेक से ए ग्रेड की उम्मीद लगाए बैठे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का सच जानना है तो एमबीए ग्रामीण का क्लासरूम देखिये। परिसर में स्थित आईआईएचएस के चार पीजी कोर्सों के लिए आज तक स्थायी क्लास रूम नहीं बन सका है। निदेशक के मुश्किल से बारह फीट लंबे और आठ फीट चौड़े रेस्ट रूम में व्हाइट बोर्ड लगाकर चौथे सेमेस्टर के 44 और दूसरे सेमेस्टर के 27 छात्रों की क्लास चलती है।
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कोई सोफे पर, कोई टेबल पर तो कोई स्टूल लेकर पढ़ाई कर रहा है। दस छात्रों की क्षमता वाले इस रूम में 44 छात्र बैठकर क्लास लगाते हैं। कंप्यूटर लैब तक नसीब नहीं है, स्थायी फैकल्टी नहीं, सिर्फ शोध अधिकारियों और शोध छात्र कक्षाएं बढ़ा कर काम चला रहे है। इस प्रोफेशनल और सेल्फ फाइनेंसिंग कोर्स की डिग्री किस फैकल्टी के तहत मिलेगी, यह तक विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक तय नहीं कर पाया है।
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यही हालात यहां चल रहे एमएससी पर्यावरण विज्ञान के छात्रों की है। उनके लिए भी न क्लास रूम, न लैबोरेटरी है। कई मर्तबा तो इनकी क्लास खुले आसमान के तले कैंपस में ही लगानी पड़ती है। इन कोर्स को शुरू हुए तीन तीन साल बीत चुके हैं। दो अन्य कोर्स पीजी डिप्लोमा आपदा प्रबंधन में पढ़ रहे 13 छात्रों, एमएफए पहाड़ी मीनिएचर कोर्स के आठ छात्रों को भी ऐसी ही समस्याओं से रोज दो चार होना पड़ रहा है। सुबह मालूम नहीं होता कि आज क्लास होगी या नहीं, यदि होगी तो कहां होगी।
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सपने देखकर लिया था कोर्स में प्रवेश
एमबीए ग्रामीण विकास के चौथे सेमेस्टर के छात्रों अल्का, चारू, नरेश कुमार, दीप क्वातरा, ईशु, रजनीश, शिवानी, दीपिका, अभिषेक, रजनीश, सूरज, विकास, राहुल, सुनील, रुचिका, हेमंत ने कहा कि उन्होंने प्रोस्पेक्ट देख कर एमबीए के इस कोर्स में रोजगार के अच्छे स्कोप सोच कर प्रवेश लिया था।
उन्हें गेस्ट फै कल्टी के रूप में शोधकर्ता पढ़ाने आते है। 37 हजार की फीस देने पर भी क्लास रूम तक नसीब नहीं है। हर रोज क्लास रूम बदलते हैं। कुछ छात्रों का चौथे सेमेस्टर में पहुंचने पर भी रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है। इन छात्रों ने प्रशासन से गुहार लगाई है उन्हें मूलभूत सुविधाएं दी जाएं।
किस कोर्स में कितने छात्र
एमबीए ग्रामीण विकास की कुल 50 सीटों में चौथे सेमेस्टर में 44, दूसरे में 27, एमएससी पर्यावरण विज्ञान में दूसेरे में 14 चौथे सेमेस्टर में 13, पीजी डिप्लोमा आपदा प्रबंधन में 15 में से 13, एमएफए पहाड़ी मीनिएचर में बीस में से आठ छात्र अध्ययनरत हैं।
निदेशक से लगाई छात्रों ने गुहार
स्थायी क्लास रूम, लैब और डिग्री के मसले को लेकर एमबीए ग्रामीण विकास के चौथे सेमेस्टर के छात्र वीरवार को आईआईएचएस के निदेशक प्रो. अरमजीत सिंह से मिले। गुस्साए छात्रों ने जल्द समस्याओं को स्थायी हल निकालने की मांग उठाई। इस पर निदेशक ने छात्रों से कहा कि क्लास रूम की व्यवस्था कोचिंग सेंटर में कर दी गई है।