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10 दिन बाद परीक्षाएं, मगर अभी तक नहीं पहुंची किताबें
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 22 Apr 2016 11:11 AM IST
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परीक्षाएं तीन मई से शुरू होनी हैं, लेकिन अभी तक स्टडी मैटीरियल ही नहीं पहुंचा है। ऐसे में इक्डोल के हजारों विद्यार्थियों मुश्किल में हैं।
- फोटो : Demo pic
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परीक्षाएं तीन मई से शुरू होनी हैं, लेकिन अभी तक स्टडी मैटीरियल ही नहीं पहुंचा है। ऐसे में इक्डोल के हजारों विद्यार्थियों मुश्किल में हैं। तीन मई से यूजी के दूसरे, चौथे और छठे सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, मगर इक्डोल का स्टडी मैटीरियल प्रिंट होकर विवि नहीं पहुंचा है। जो पहुंचा है, उसे छात्र के लिए विषयों के हिसाब से पैक कर घर पहुंचाने को स्टाफ नहीं है।
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ऐसे में इक्डोल (अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र) के छात्रों को बिना स्टडी मैटीरियल और लेसन प्लान के ही परीक्षा देनी पड़ेगी। और तो और रोलनंबर जेनरेट करने को सिर्फ एक कर्मी को जिम्मा सौंपा गया है। यूजी के बीए, बीकॉम रूसा सीबीसीएस कोर्स के तहत पंजीकृत तीन सेमेस्टर के करीब साढ़े पांच हजार छात्रों के प्रवेश, रोलनंबर जेनरेट करने, स्टडी मैटीरियल को छांटने, पैक कर डाक से छात्रों को भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ पांच कर्मियों को सौंपी गई है, जिसमें से एक कर्मी मेडिकल लीव पर चला गया है।
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ऐसे में इक्डोल के इन छात्रों को शायद ही परीक्षा से पहले स्टडी मैटीरियल लैसन प्लान तो दूर रोलनंबर भी जेनरेट कर मिल जाएं। प्रदेश और प्रदेश के बाहर के इक्डोल छात्रों को संस्थान से यूजी डिग्री करना महंगा सौदा साबित हुआ है। कुछ छात्र तो स्वयं इक्डोल पहुंचकर लैसन प्लान लेने को मजबूर हो रहे हैं। इक्डोल से छठे सेमेस्टर के छात्रों के सिर्फ कामर्स के विषय के लैसन व स्टडी मैटीरियल पहुंचा है।
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इंग्लिश जैसे कई ऐसे विषय हैं, जिनके लैसन चंद रोज पूर्व ही प्रिंट करने को भेजे हैं। जाहिर है उनका परीक्षा से पहले विवि और वहां से छात्रों तक पहुंच पाना संभव नहीं है। वीरवार को चंबा से पहुंची छठे सेमेस्टर की छात्रा किरण को स्टडी मैटीरियल मांगने पर जवाब मिला, अभी पहुंचा ही नहीं है। छात्राएं प्रति सेमेस्टर 500 और छात्र 1400 रुपये फीस चुकाते हैं।
मार्च में हटा दिए गए शाखा में तैनात अतिरिक्त कर्मी
विवि और इक्डोल प्रशासन ने इक्डोल यूजी शाखा में जो अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया था, उसे मार्च माह में हटा कर दूसरी ब्रांच में तैनात कर दिया गया। अब ब्रांच में एक एसओ, दो अधीक्षक और तीन क्लर्क ही शेष बचे हैं। ऐसे में ब्रांच में प्रिंट होकर पहुंचे स्टडी मैटीरियल को छांटकर पैक करने का काम करना मुश्किल हो गया है।
संपादकों की फौज के बावजूद सामग्री प्रिंट नहीं
इक्डोल में इसी स्टडी मैटीरियल को समय से प्रिंट करवाने के लिए चार से पांच संपादक और उप संपादक रखे गए हैं, लेक्चरर और प्रोफेसर भी हैं। इसके बावजूद मैटीरियल क्यों समय से प्रिंट नहीं हुआ, क्यों छात्रों को हर बार की तरह परेशानी पेश आई, यह जांच का विषय है।
इक्डोल निदेशक प्रो. प्रदीप वैद्य ने माना कि मैटीरियल समय से प्रिंट करवाने छात्रों को पहुंचाने में देरी हुई है। इसमें मुख्य वजह बाहर के शिक्षकों से प्रिंट होने वाले लैसन ही देरी से मिले, वहीं संबंधित शाखा में स्टाफ की कमी और यूजी परीक्षाओं को 15 दिन पहले किया जाना भी वजह है। भविष्य में समस्या नहीं रहेगी। विवि प्रशासन के सामने समस्या रखी गई है।