छात्रों ने बनाई कमाल की साइकिल, पैडल चलाने से पूरे होंगे तीन काम
साइकिल एक और काम तीन। पैडल चलाकर इस साइकिल पर आप एक्सरसाइज तो कर ही सकेंगे, पानी का शुद्धिकरण और वॉशिंग मशीन का काम भी ले सकेंगे। साइकिल पर बैठकर 10 से 15 मिनट तक पैडल चलाने से करीब सात लीटर पानी शुद्ध किया जा सकेगा।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हमीरपुर के मेकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रशिक्षुओं ने छह माह तक रिसर्च कर महज चार से पांच हजार रुपये में सस्ती और नई तकनीक की साइकिल बनाई है। इस तकनीक की मदद से लोग बिजली की बचत कर सकते हैं।
यह पूरी तकनीक साइकिल के पैडल पर निर्भर है। इसके अलावा ऐसे दिव्यांग जिनके हाथ काम नहीं करते इसका फायदा उठाकर कपड़े धो सकते हैं। टुल्लू पंप की तरह पानी लिफ्ट कर सकते हैं। डायनमो का प्रयोग कर इस तकनीक से एक बल्ब जलाकर रोशनी की जा सकती है। इसके अलावा चाकू-छुरियां समेत सब्जी काटने के उपकरणों की धार को तेज किया जा सकता है।
ऐसे तैयार की साइकिल, मिली बड़ी कामयाबी
इंजीनियरिंग के प्रशिक्षुओं ने मल्टी पर्पज पैडल पावर वाटर प्योरीफाई कम वॉशिंग मशीन प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए कबाड़ की दुकान से खराब साइकिल, रॉटरी बैन पंप, तीन रिवर्स ओसमोसिस मेंमब्रेन (आरओ किट), एक टब और प्लास्टिक पाइप खरीदी। इसके बाद सबसे पहले पानी पर ट्रायल किया। पानी के शुद्धिकरण होने के बाद वॉशिंग मशीन की तर्ज पर कपड़े धोने की तकनीक अपनाई।
इन प्रशिक्षुओं ने पूरा किया प्रोजेक्ट
मेकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रशिक्षुओं सुनील कुमार, रोहित पटियाल, गोबिंद काजी, विनय कुमार, सुनील चौहान का कहना है कि उन्होंने मेंटर डॉ. वरुण गोयल के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है। यह प्रोजेक्ट क्रंक रॉकर मेकेनिज्म सिद्धांत पर आधारित है। इसमें रोटरी मॉशन का प्रयोग किया गया है।