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पीजीएमईई काउंसलिंग दोबारा कराने का विरोध, मेडिकोज ने निकाला मार्च

Mon, 16 May 2016 02:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 16 May 2016 02:40 PM IST
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Medicos march against PGMEE counseling.
मार्च करते मेडिकोज - फोटो : amar ujala

यूपीपीजीएमईई-2016 में सरकारी चिकित्सकों को 30 फीसदी अंक देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में चयनित मेडिकोज ने रविवार शाम को केजीएमयू में मार्च निकाला। अपना भविष्य बचाने को एकजुट मेडिकोज कहना है कि उनकी काउंसलिंग हो चुकी है। एक मई 2016 से नया सत्र शुरू हो गया है।

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अब फिर से मेरिट लिस्ट बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे जो चिकित्सक चयनित होकर कॉलेजों में प्रवेश ले चुके हैं उनका पूरा कॅरिअर ही दांव पर लग जाएगा।

यूपीपीजीएमईई की दूसरी काउंसलिंग को स्थगित करने की खबर के बाद केजीएमयू के मेडिकोज में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने शनिवार को कलाम सेंटर पर हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद रविवार को फिर से मार्च निकालकर अपनी बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई।
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मेडिकोज का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनका कॅरिअर तबाह हो गया। कोर्ट के आदेश के हिसाब से उनकी 10 साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएस डॉक्टर्स को तीन साल तब ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने की एवज में हर साल के हिसाब से 10 फीसदी अतिरिक्त अंक देने के आदेश दिए हैं।

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30 फीसदी अंक से पहुंचेंगे मेरिट लिस्ट में ऊपर

Medicos march against PGMEE counseling.

इस तरह से तीन साल में 30 फीसदी अधिक अंक देने से पीएमएस चिकित्सक पूरी तरह से मेरिट लिस्ट में ऊपर पहुंच जाएंगे। टॉप टेन मेडिकोज 150वें नंबर पर रह जाएंगे। ये आदेश स्टूडेंट्स के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के बाद आया है।

कई स्टूडेंट एआईपीजीएमई-2016 और डीएनबी 2015 को छोड़कर आए हैं। डीएनबी सीट छोड़ने के कारण तीन साल तक चिकित्सक वहां फिर से आवदेन नहीं कर सकेंगे। इससे चिकित्सकों का भविष्य अंधेरे में पड़ गया है।

मेडिकोज ने कहा कि पीएमएस डॉक्टरों को पीजी डिप्लोमा की 50 फीसदी सीटें पहले से ही आरक्षित हैं। अब मेरिट में अतिरिक्त अंक देने से एमबीबीएस के बाद पीजी करने वाले सभी छात्र-छात्राएं प्रभावित हो जाएंगे।

गौरतलब है कि एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया इंस्टीट्यूट, रिम्स सैफई सहित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पीजी प्रवेश के लिए पहली काउंसलिंग अप्रैल माह में हो चुकी है। इन संस्थानों में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है।

17 मई को दूसरी काउंसलिंग होनी थी, जिसमें प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग को मेडिकल कॉलेजों का आवंटन होना था। लेकिन, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इनका चयन निरस्त कर दिया। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया था।

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