{"_id":"56f8d3394f1c1b526df00156","slug":"jashn-e-azadi-in-jnu-today","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेएनयू में ‘जश्न-ए-आजादी’ आज","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
जेएनयू में ‘जश्न-ए-आजादी’ आज
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:16 PM IST
विज्ञापन
JNU
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज की ओर से सोमवार को आधुनिक भारत के इतिहासकार प्रो. बिपिन चंद्र की याद में ‘जश्न-ए-आजादी’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन
कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस कार्यक्रम में देशद्रोह के आरोपी जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर, अनिर्बन समेत कई नामी इतिहासकार प्रोफेसर भी हिस्सा लेंगे।
विज्ञापन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य और जेएनयू छात्रसंघ संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा भी कार्यक्रम में अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा प्रो. इरफान हबीब, प्रो. सीपी भाम्बरी, प्रो. प्रभात पटनायक, प्रो. मृदुला मुखर्जी, प्रो. आदित्य मुखर्जी, प्रो. सुचेता महाजन, आलोक बाजपेयी समेंत अन्य वक्ता ‘जश्न-ए-आजादी’ विषय पर अपनी बात रखेंगे।
विज्ञापन
जेएनयू ने दो आवेदकों को पांच साल के लिए किया बैन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले दो आवेदकों पर पांच साल का बैन लगा दिया है। अब ये दोनों आवेदक अगले पांच साल तक जेएनयू में किसी भी पद के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।
दोनों आवेदकों में एक पुरुष और दूसरी महिला है। ये दोनों नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ एक-दूसरे पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे।
दरअसल, बीते साल जेएनयू ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के अंतर्गत आने वाले सेंटर फॉर इंडो पैसिफिक स्टडीज में प्रोफेसर पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें दो आवेदकों ने सेलेक्शन कमेटी और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
दोनों ने एक-दूसरे पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाए। शिकायतों को ध्यान में रखकर जेएनयू प्रशासन ने जांच के लिए बीते साल नवंबर में एक कमेटी का गठन किया।
कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अब दोनों आवेदकों पर पांच साल के लिए पाबंदी लगा दी गई है। यह फैसला विश्वविद्यालय की पिछले सप्ताह हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में लिया गया।
वहीं, पाबंदी का आदेश पाने के बाद एक आवेदक का आरोप है कि जिस कमेटी ने जांच की उसने उनका पक्ष नहीं सुना।